@myogioffice Think about education Jobs and development how can you sleep with peace when you know what you did with millions of Indian people #shameonyouyogi
Around 1200 Muslims are on streets after Behraich violnce everything happening in same pattern of conspiracy first burnt house and Shops and after violence took place Muslims houses becomes illegal
So called heaven is hell for Muslims
This is Rukhsar; listen to her. (Gopal Mishra Case)
"Yesterday at 4 p.m., the UP STF picked up my father Abdul Hamid, my two brothers Sarfaraz and Faheem, and another young with them. My husband and brother-in-law were already picked up. No information on them is accessible from any police station. We fear they will be killed in an encounter!"
This is what the UP Police are doing.
This is how the BJP wins elections.
This is the truth of India today.
This is what Muslim men have to go through just because they tried to protect their families.
Above all, this is the oppression and dehumanisation that Muslim women face in India, everyday.
क्या "उनके" इलाके से शोभायात्रा निकालना गलत है? क्या वे हिन्दू इलाको से ताजिये के जुलूस नहीं निकालते?
क्रिश्चियन, बौद्ध, जैन को दिक्कत नही। मुसलमानों को क्यो है? हिन्दू अपने देश में डरकर रहे, क्या यही सेकुलरिज्म है?
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ऐसे सवाल, तोहमतें है।
जवाब सिलसिलेवार समझ लें।
मुस्लिमो को आपने टेरराइज कर रखा है। डरा हुआ व्यक्ति, रस्सी को भी सांप समझ लेता है।
फिर तो जो लोग शरारतन उनके इलाके में नग्नोत्सव मनाते हुए घुसते है, असल में साँप ही है।
क्योकि इनके इरादों पर किसी को शक नही पूरा विश्वास है। ये लोग उनकी मान, मर्यादा, भावनाओ और सुरक्षा को ठेस पहुचाने के इरादे से ही वहां से जुलूस निकाल रहे है।
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और अपने बाल बच्चो के पास लहराता सांप देखकर आप पूछते नही की- भैया, जहरीले हो, या मासूम वाले..
उस सांप को मरना ही है।
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किसी भी जुलूस का रूट प्रशासन को तय करना है। एप्रूवल लिए बगैर, जुलूस निकलना गलत है,
संवेदनशील रुट से एप्रूवल दिया गया, तो प्रशासन की भी मिलीभगत है। क्योकि उसका काम किसी समस्या से निपटना कम, समस्या को पैदा नही होने देना ज्यादा है।
तो कौन मूर्ख अफसर है, जो शोहदों का जुलूस ऐसे इलाके से जाने दे, जहां की हरकतों से दंगा भड़कने के पूरे चांस हो?
अब या तो अफसरों को नौकरी की परवाह नही, या फिर उन्हें ऊपर से आदेश है।
याने खेला कोई और कर रहा है।
तो सोचो, पत्थर किसने फ़ेंकवाये होंगे?
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ताजिये बिल्कुल निकलते है, हिन्दू इलाको से निकलते हैं।
पर किसी मंदिर पर चढ़, भगवा उखाड़ कर, हरा झंडा लगाते नही देखा। अगर करे, तो यह क्लियर प्रोवोकेशन है।
असामाजिक गतिविधि है,
गुंडई है।
किसी का आजाद अधिकार नही। अगर कोई ऐसा करे, और मारा जाए- तो कतई सहानुभूति नहीं।
अब वह झंडा किसी भी हिन्दू धर्म का उखाड़ रहा हो, या इस्लाम का। पुलिस की गोली से मरे या अपोजिट दंगाई की गोली से..
देश हित मे उसे जल्द मरने दो।
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क्रिश्चियन को भी दिक्कत है, जहां जहां उन्हें टारगेट किया गया है। मणिपुर देख लो।
बौद्धों, जैनों को टारगेट किया जाने लगेगा, तो उन्हें भी दिक्कत होगी। वे भी हर रस्सी को सांप, और सांप को एनाकोंडा समझेंगे। यह होस्टाइल एटमॉस्फियर में रहने वाले की साइकी है।
आप तो लठमार संघी बने, लेकिन वह गांधीवादी हो जाये, आपके तय करने की चीज नही। वो कुछ और हो सकता है।
डू एट योर ओन रिस्क।
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मेरा सेकुलरिज्म यह कहता है कि ऐसे तमाम जुलूस बन्द होने चाहिए। ताजिये, नमाज, पंडाल, विसर्जन, परकास पर्व, सब बन्द करो।
नोच डालो लाउडस्पीकर,
मन्दिरो, मस्जिदों, गुरुद्वारों से।
अपना उत्सव अपने घर मे मनाओ, या धार्मिक स्थल की चारदीवारियों में। शान्ति से -बिना शोर, नाच, हथियार, भीड़ के बगैर।
बाहर आये तो हंटर पड़ें।
धर्म, शौच निजी चीज है। निर्धारित जगह पे करें। घूम घूमकर करेंगे तो गंदगी, बीमारी और अश्लीलता फैलेगी। सड़क पर तो कतई इजाजत न हो।
सड़क चलने के लिए है।
सिर्फ चलने के लिए।।
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सवाल यह भी की कोई इलाका "उनका" कैसे है?
इसलिए कि आपने उन्हें हर कालोनी, हर मोहल्ले से भगा दिया है। उन्हें एक दड़बे, एक घेट्टो, एक बाड़े में तो कैद कर दिया है।
अब उस बाड़े में चैन से जीने दो। वहां भी क्यो घुसना चाहते हो। मुर्गियों को दड़बे में बंद कर दिया, इतनी विजय से संतोष नहीं। दड़बे में भी घुसकर कौन सोता है जनाब??
तो वह "उनका इलाका" है।
ग्रांट करो, शांति उसी में है।
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हां, यह अफसोसनाक है। इसका इलाका- उसका इलाका नही होना चाहिए। सबको सर्व धर्म समभाव से रहना चाहिए। लाउडस्पीकर भी एलाउ हो, जुलूस भी।
पर इसका डेकोरम मेंटेंन करने का शऊर नही, तो बन्द करना श्रेयस्कर है।
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वरना याद रखें, सहने की सीमा होती है। तब तक, जब तक जान माल और मान गए नही, बस जाने का डर बना हो।
पर जब बाल बच्चे, जानोमाल जाना तय ही लगने लगे, तो दुनिया की कोई कौम-वह हिन्दू हो, मुस्लिम हो, क्रिश्चियन, कम्बाला बुन्तु या शिंतो हो, कमिकाजे बन जाता है।
और जो मरने की ठान ले, उसका कुछ नही जाता, बस जान जाती है। लेकिन उसके परिवेश के चीथड़े उड़ जाते हैं।
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वो परिवेश, आपका मेरा घर है। हमारे बच्चे, दोस्त, घर, गांव, शहर देश है।
जब देश टूटेगा, तो दस पांच नए प्रधानमंत्री की कुर्सी बनेगी। नेताओ का लाभ है, आपको कुछ नही मिलेगा। बस, आगे दो पीढियां फिर शांत बैठेंगी, जैसे देश तोड़वाने वालो की पिछली दो पीढियां शांत बैठी।
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फिर आपके जैसी एक नई मूर्ख पीढ़ी आएगी। जो पूछेगी
क्या "उनके" इलाके से शोभायात्रा निकालना गलत है? क्या वे हिन्दू इलाको से ताजिये के जुलूस नहीं निकालते?
क्रिश्चियन, बौद्ध, जैन को दिक्कत नही। मुसलमानों को क्यो है? हिन्दू अपने देश में डरकर रहे,
क्या यही सेकुलरिज्म है?
4 महीने पहले गोपाल मिश्रा की शादी हुई। 22 की उम्र थी। लंबी जिंदगी और बड़ी दुनिया पड़ी थी देखने के लिए। लेकिन जी नहीं पाया। एक गोली ने उसकी जान ले ली।
किसी की मौत पर ऐसा कहते हुए दुख ज़रूर हो रहा है, लेकिन एक बात है। जिस ट्रिगर के दबने से गोपाल की जान गई उस ट्रिगर पर कई हाथों का दबाव था। और उन कई हाथों में से एक हाथ गोपाल का भी था।
मूर्ख भक्तों!!! अतिवाद की राजनीति तुम्हारा सर्वस्व लील लेगी। तुम्हारी कुर्बानी होगी। और इस कुर्बानी का फ़ायदा मिलेगा कुर्बानी दिलाने वालों के बाल बच्चों को।
तुम या तो खुद मरोगे या किसी को मारोगे। तुम कभी शांत नहीं रह पाओगे। तुम्हारा यूं अशांत रहना ही तुम्हारे आकाओं की खुशियों का साधन है। थोड़ा शांत हो। थोड़ा मनुष्य बनकर सोचो।
एक बार उस विधवा औरत और संतान खो चुके मां बाप के बारे में सोचो। अपने परिवार का ख़्याल करो। ये करोगे तो नफ़रत की राजनीति को न बोल पाओगे। और अगर नहीं बोला तो..... उफ्फ
#Baharaich
#BahraichRiots #GopalMishra
अब तो देश के प्रधानमंत्री भी बोलने लगे हैं कि हम बंटेंगे तो बांटने वाले महफिल सजाएंगे. लेकिन नरेंद्र मोदी जी बांटा किसने है? कौन था जो देश दलितों पिछड़ों आदिवासियों को अछूत बनाए रखा? और कौन है जो अभी भी चाहता है कि दलितों पिछड़ों आदिवासियों को उनका हक़, अधिकार व सम्मान उन्हें ना मिले? क्या किसी मुसलमान ने तालाब का पानी पीने से रोका था? या फिर किसी मुसलमान ने किसी दलित को घोड़ी चढ़ने पर मारा था? मंडल कमीशन का विरोध किसी मुसलमान ने किया था क्या नरेंद्र मोदी जी?