‘ये वक़्त है श्रोताओं के फ़ोन कॉल्स सुनने का और दिलचस्प अंदाज़ में फरमाइशी गानों की प्रस्तुति का…’
1994 में नरसंहार के फ़तवों के लिए बदनाम रहा रेडियो रवांडा समय के साथ कैसे बदल गया और किस तरह से आपसी भाईचारे को बढ़ावा दे रहा है… जल्द ही एनडीटीवी इंडिया पर
पश्चिम यूपी में अब आपस में बांटने, झगड़ने, मुद्दाविहीन राजनीति करने के दिन लद गए। किसानों-कमेरों और ग्रामीण जनता ने नफरत को नकार मुद्दों पर वोट डाले, आगे भी डालेंगे। ये आंदोलन की देन है।लोकतंत्र की मजबूती और बेलगाम सरकारों पर अंकुश के लिए आंदोलन भी जरूरी है।