न सरकार मेरी है न रौब मेरा है न बड़ा सा नाम मेरा है, मुझे तो बस एक बात का घमंड है में भारत वर्ष में जन्म लिया है और भारत मेरा है ।। blocked by @vijayrupanibjp
.@MnshaP वो भी क्या दौर था जब कुछ पत्रकार अपने टॉयलेट से देश का मंत्रिमंडल तय किया करते थे, PM के साथ मुफ्त में सफर करते थे, आलीशान होटलों में रहते थे, लाखों की फ्री शॉपिंग करते थे, महंगे-महंगे गिफ्ट्स लिया करते थे और "मैडम माइनो" को त्याग की देवी बताया करते थे...
जर्मनी में गर्मी से 80% से ज्यादा सड़क टूट गई है दरारें आ गई है उबड़ खाबड़ बन चुकी है
लेकिन यह जर्मन शेफर्ड @dhruv_rathee जो जर्मनी में रहता है इस पर अगर एक वीडियो बनाकर जर्मन सरकार से सवाल किया तो इसके पिछवाड़े लात मार कर जर्मनी से भगा दिया जाएगा
आप कल्पना करिए अगर भारत में गर्मी से सड़के टूटती तब ये लंबा चौड़ा वीडियो बनाकर कहता कि तुमने कैसी सड़क बनाई है जो गर्मी नहीं झेल सके
कल सुप्रीम_कोर्ट में वीर सावरकर जी को "माफ़ी वीर" कहने के मानहानि केस में जज ने कहा कि अगर सिर्फ़ चिट्ठियों के आधार पर ये कहा जा रहा है कि वीर सावरकर "माफ़ी वीर" हैं,
तो उन्होंने मोहनदास करमचंद गांधी के ब्रिटिश लॉर्ड और वायसराय को लिखे 12 खत दिखाते हुए राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा कि क्या आपके क्लाइंट राहुल गांधी को पता है कि मोहनदास करमचंद गांधी ब्रिटिश वायसराय को लिखे हर खत के नीचे
"आपका वफ़ादार सेवक"
लिखते थे और अंग्रेजों से हर महीने ₹1200 सैलरी लेते थे.. तो क्या मोहनदास करमचंद गांधी को अंग्रेजों का सेवक माना जाएगा और फिर ये गांधी भी देश का गद्दार है.. ये सुनकर वकील मनु सिंघवी चुप हो गए.. अगर ये 12 चिट्ठियां सच हैं, तो गांधी पक्का गद्दा'र थे, अंग्रेजों के एजें"ट थे..
🚨 AAP को बड़ा झटका
पंजाब के CM भगवंत मान को अकाल तख्त ने 'गुरु-विरोधी' घोषित किया है 😳
— अकाल तख्त सिखों की सर्वोच्च धार्मिक और लौकिक संस्था है
उन्होंने समुदाय से कहा है कि वे AAP नेता से कोई संबंध न रखें
@ADGP_Surat @sanghaviharsh તારીખ ૨/૯/૨૦૨૪ ના રોજ ના સમય ૧૬:૫૫ થી ૧૭:૧૫ નો રેલ્વે સટેશનના બહાર સર્કલ ના સીસીટીવી ફૂટેજ ચેક કરવા વિનંતી. એક P P Savani સ્કૂલ બસ નો ડ્રાઇવર ખૂબ જ ખરાબ વાહન હંકારી ખોટી રીતે ડાબી બાજુ કાવો મારી નીકળી રહ્યો હતો અને બાજુ માં વાહન ચલાવતા વાહન ચાલક ૧/૨
modi ji और Nehru की तुलना बेमानी है। नेहरू जी के सामने न विरोध था, न विपक्षी थे, न जनता की अकांक्षाएं थीं, न विदेशी साजिशें थीं और सबसे बड़ी बात अंग्रेज भी उनके ही पक्ष में थे और मोदी जी के लिए सारी चुनौतियाँ थीं/हैं।
मोदी जी की उपलब्धि बहुत बड़ी है।
आप सभी की जानकारी के लिए
ब्लूमबर्ग की इस मूर्खता का कारण बाद में पता चला, उनके जिस कर्मचारी प्रीति सोनी ने ये आर्टिकल लिखा था। उसने RBI की आधिकारिक वेबसाइट पर GOLD RESERVE के आंकड़ों की तुलना एक सप्ताह के अंतराल पर जब की तो पता चला के उसमे कमी आयी है।
जबकि उस मूर्ख ने ये नहीं देखा की कमी सोने में नहीं , सोने की value में आयी थी जो की रूपए की गिरावट और सोने की कीमतों में गिरावट का परिणाम था।
बस अनुमान और कयास के आधार पर रिपोर्ट छाप दी।
भारत ने सोना बेच दिया....
यह ठीक ऐसी ही बात है कि अगर आपके पास 10 ग्राम सोना है तो जनवरी में उसकी कीमत 180000 रुपए थी लेकिन आज आपके सोने की कीमत 160000 है तो इसका यह मतलब नहीं है कि अपने 20000 का सोना बेच दिया
हमारे देश में सरकार बदलने का फैसला जनता अपने vote से करती है. जनता ने जिसे चाहा हटा दिया. पर जो लोग मोदी को चुनाव में हरा नहीं पाते वो अब चाहते हैं कि नौजवान सड़कों पर आ जाएं, आग लगाएं, दंगा मचाएं, देश में anarchy हो जाए. ये सोच negative है. देश के लिए खतरनाक है. #RahulGandhi #Emergency
......."खेला होबे"...का मतलब अब मोमता दीदी की समझ मे आ रहा होगा....वो "खेला होबे-खेला होबे" करती रही और असली खेला उनके साथ ही हो गया....TMC सिर्फ टूटी नहीं....बल्कि TMC मोमता के हाथ से ही निकल गई....80 मे से 60 विधायकों ने दीदी और भतीजे को पार्टी से बाहर कर खुद पार्टी पर कब्जा कर लिया....विधानसभा मे विपक्ष का नेता भी चुन लिया...और विधानसभा अध्यक्ष ने मान्यता भी दे दी...........अब मोमता ना तो मुख्यमंत्री हैं...न विधायक...ना सांसद....और राज्यसभा मे जाने की जो बचा खुची संभावना थी....वो भी खत्म ही गई...अब 20 विधायक उन्हें राज्यसभा तो नहीं भेज सकते....इसे कहते हैं असली खेला....मतलब इनकी राजनीति तो खत्म. .....
.......सबसे बड़ी बात ये है कि जिन 60 विधायकों ने ये किया....उनमे से ज्यादातर मुस्लिम हैं...यानि...जिनके लिए मोमता ने खजाना खोल रखा था...उन्होंने ही तिजोरी पर डाका डाल दिया....खैर....डूबती नाव मे कौन बैठना चाहेगा....सबको अपना भविष्य देखना है....और अगले 5 साल तो बंगाल मे कुछ होने वाला नहीं...और 5 साल बाद मोमता 80 साल की हो जाएंगी तो उनकी राजनीति तो वैसे ही खत्म है....भतीजे के साथ कोई रहना नहीं चाहता....क्यूंकि एक तो उसका attitude...दूसरे पता नहीं वो कब जेल चला जाए....तो भविष्य यही है...कि अलग होके इनसे पीछा छुड़ाया जाए....
.....BJP बस मजे ले रही है....वो TMC के किसी विधायक को BJP मे नहीं आने देगी...क्यूंकि वो नहीं चाहती कि TMC खत्म हो....क्यूंकि TMC खत्म होगी तो कॉंग्रेस और लेफ्ट को बंगाल में फिर से खड़े होने का मौका मिलेगा....और उनकी राजनीति दोबारा बंगाल मे शुरू हो....ऐसा BJP किसी क़ीमत पर नहीं चाहेगी...तो उसके लिए ये अच्छा है कि TMC ही रहे लेकिन बिना बुआ-भतीजे के.....ये ज्यादा फायदे वाली बात है....
.....लेकिन कमाल है ना....15 साल एकछत्र शासन करने वाली दीदी के साथ ऐसा होगा....वो भी चुनाव हारने के एक महीने के भीतर...ऐसा शायद ही किसी ने सोचा होगा.....और ये एक सबक भी है उन पार्टियों के लिए....जो सिर्फ एक खास वोटबैंक के भरोसे बैठी हैं....जो मोमता के साथ हुआ....वही उनके साथ भी होगा....
जय श्रीराम 🙏🚩
Best wishes to Uttar Pradesh Chief Minister, Yogi Adityanath Ji on his birthday. His work towards the state’s progress is noteworthy. He has always focused on improving the quality of life for people and ensuring all-round growth. Praying for his long and healthy life.
@myogiadityanath
यूं कोई चाणक्य नहीं कहता...
“हंस रहे हैं... गृह मंत्री जी हंस रहे हैं। पूरी तैयारी बना रखी है आपने। आज चाणक्य अगर आज जिंदा होते तो वो भी चौंक जाते, आपकी कुटिलता की दाद देते।”
महिला आरक्षण और परिसीमन विधायकों पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने अमित शाह को चाणक्य कहकर संबोधित किया था। अब अमित शाह का जो प्लान है वह किसी चाणक्य से कम नहीं है।
पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पांडिचेरी के चुनावों के दौरान, जब महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक पारित नहीं हो पाया था, तब इसे लेकर अनेक प्रकार की चर्चाएँ हुई थीं।
ऐसा बताया जाता है कि उस समय राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन के नेताओं से मुलाकात कर उन्हें अपने पक्ष में कर लिया था। हालाँकि, भाजपा के दोनों हाथों में लड्डू होने के कारण उसने इस मुद्दे पर अधिक गंभीर प्रयास नहीं किए थे।
बारह वर्षों में यह पहली बार था जब भाजपा सरकार के कार्यकाल में कोई महत्वपूर्ण विधेयक गिर गया था। अब ऐसी चर्चाएँ हैं कि क्षेत्रीय दलों की मांगों और सुझावों के अनुरूप कुछ छोटे-मोटे बदलावों के साथ इस विधेयक को पुनः लाने की तैयारी की जा रही है।
कई क्षेत्रीय दलों में फिलहाल विभिन्न प्रकार की राजनीतिक उठापटक को लेकर चर्चाएँ चल रही हैं। टीएमसी, डीएमके, एनसीपी, आप, जेकेएनसी/नेशनल कॉन्फ्रेंस, कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों, एक-दो सांसदों वाले छोटे दलों तथा निर्दलीय सांसदों के बीच भी कई तरह की चर्चाएँ, ऊहापोह और राजनीतिक मंथन जारी है।
संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए लोकसभा में 362 (फिलहाल NDA 298) और राज्यसभा में 164 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता है। ऐसी भी चर्चाएँ हैं कि लोकसभा और राज्यसभा में कुछ सांसद पार्टी व्हिप के विरुद्ध मतदान कर सकते हैं। लोकसभा में इस संबंध में अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष को लेना होता है। एक अति महत्वपूर्ण विधेयक पास कराने के लिए अगर उस निर्णय पर लोकसभा अध्यक्ष सत्ताधारी दल के हितों का ध्यान रखकर निर्णय दे तो यह कोई आश्चर्य का विषय नहीं होगा।
जबकि राज्यसभा में सदस्यता समाप्त होने की स्थिति में संबंधित दलों के लिए राजनीतिक समीकरणों के अनुसार उपचुनाव में पुनः अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल और असम में बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के कारण पार्टी विहिप विरुद्ध मतदान करने वाले सांसदों को भाजपा अपने खेमे से पुनः संसद भेज सकती है।
15 सालों तक एक पागल महिला बंगाल पर शासन कर रही थी
इसकी मानसिक जांच होनी चाहिए
क्योंकि संविधान के अनुसार किसी भी संवैधानिक पद पर कोई पागल व्यक्ति नहीं बैठ सकता
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कुल 13 मामले दर्ज हैं।
सबसे ताज़ा मामला विधायकों के फ़र्ज़ी सिग्नेचर कर विधानसभाध्यक्ष को सौंपना है।
उन्होंने बताया कि TMC बच सकती थी, अगर ममता बनर्जी अभिषेक बनर्जी को पार्टी से बाहर निकाल देतीं। लेकिन उसके बाद अभिषेक के लिए बंगाल में रहना मुश्किल हो जाता।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ़ सड़कों पर इतना गुस्सा है कि जान बचाने के लिए उन्हें बंगाल छोड़कर कहीं और शिफ़्ट होना पड़ता, शायद दूसरे देश भी। लेकिन उनके खिलाफ़ दर्ज़ मामले ऐसे हैं कि उन्हें देश छोड़ने की इजाज़त नहीं मिलती।
ममता बनर्जी भारत की ऐसी पहली मुख्यमंत्री हैं जो CM पद पर रहती हुई खुद दो चुनाव हारी हैं। ये रिकॉर्ड उनके नाम है और शायद लंबे समय तक रहेगा। एक रिकॉर्ड और है।
सत्ता जाने के 29 दिन में पार्टी हाथ से निकल गई, ये रिकॉर्ड भी ममता बनर्जी के पास है। 80 में से 60 विधायकों और क़रीब 20 सांसद मिलकर अपना अलग गुट बना चुके हैं और उन्हें मान्यता भी दे दी गई है। बागी गुट को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का कमरा भी अलॉट हो गया है।
यही हालत कुछ समय पहले महाराष्ट्र की राजनीति मैं देखने को मिली थी जब हिन्दू हृदय सम्राट शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे की हिंदुत्व की विचारधारा को तिलांजलि देते हुए उनके सत्ता भोगी पुत्र ने कांग्रेस ओर NCP से हाथ मिलाकर भाजपा को धोखा देते हुए सरकार बना ली थी
ममता बनर्जी के पास कोर्ट का रास्ता खुला है लेकिन शिवसेना के अनुभव को देखते हुए वहां से भी उम्मीद नहीं दिखती।
कुल मिलाकर अभिषेक जेल जाएंगे, ये लगभग तय है। ममता बनर्जी कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने वाली हैं।