#सतलोक_Vs_पृथ्वीलोक
Satlok is the imperishable world. Where there is no concept of high and low. Because of this, hatred does not arise.
Whereas the whole world is burning in the fire of high and low, big and small on the earth.
@SaintRampalJiM
#सतलोक_Vs_पृथ्वीलोक
that Purna Prabhu lives in the fourth Dhaam i.e. Anami lok. Like, first is Satlok, second Alakh lok, third Agam lok, and fourth is Anami lok. Therefore in this Mantra 19, it has been clarified that KavirDev alone in form of Anami Purush
#सतलोक_Vs_पृथ्वीलोक
सतलोक निरामय लोक है जहाँ वृद्धावस्था व रोग नहीं है।
ज��कि पृथ्वी लोक में इन दोनों स्तिथियों से कोई नहीं बचा है।अधिक जानकारी हेतु Sant Rampalji Mahraj Utube Chanel पर Visit करें।
#सतलोक_Vs_पृथ्वीलोक
सतलोक में जाने के बाद जीवात्मा का जन्म-मरण हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
लेकिन सतभक्ति के अभाव में पृथ्वी के प्राणी 84 लाख योनियों के चक्कर में भटकते रहते हैं।
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#सतलोक_Vs_पृथ्वीलोक
सतलोकनिरामय लोक है जहाँ वृद्धावस्था व रोग नहीं है।
जबकि पृथ्वी लोक में इन दोनों स्तिथियों से कोई नहीं बचा है।
देखें साधना टिवी चैनल रात 7:30 से 8:30 बजे तक।
#सतलोक_Vs_पृथ्वीलोक
काल लोक/पृथ्वी लोक में जन्म-मृत्यु और वृद्धावस्था सबसे बड़े दुख हैं।
जबकि सतलोक में सर्व सुख हैं। न ही जन्म-मृत्यु का दुख, न ही वृद्धावस्था का दुःख।
देखें साधना टिवी चैनल रात 7:30 से 8:30 बजे तक।
#सतलोक_Vs_पृथ्वीलोक
सतलोक में प्रत्येक हंस आत्मा का परमात्मा जैसा नूरी शरीर है। जिसका तेज 16 सूर्यों के समान है।
जबकि काल लोक/पृथ्वी लोक पर सभी का पांच तत्त्व से बना नाशवान शरीर है। जिसमें हजारों तरह की बीमारियां सदैव बनी रहती हैं।
#TruthOfShraadh
श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 9 का श्लोक 25 भी यही कहता है कि जो पितर पूजा (श्राद्ध आदि) करते हैं, जो भूत पूजा (अस्थियाँ उठाकर पूजा कराकर गंगा में बहाना, तेरहवीं, सतरहवीं, महीना, छःमाही, वर्षी आदि-आदि) करते हैं,
Visit करें सतलोक आश्रम यू ट्यूब चैनल पर।
#TruthOfShraadh
परमात्मा कबीर जी समझाते हैं कि हे भोले प्राणी! गरूड़ पुराण का पाठ उसे मृत्यु से पहले सुनाना चाहिए था ताकि वह परमात्मा के विधान को समझकर पाप कर्मों से बचता। पूर्ण गुरू से दीक्षा लेकर अपना मोक्ष करता। जिस कारण से वह न प्रेत बनता, न पितर बनता, न पशु-पक्षी आदि
#TruthOfShraadh
मृत्यु के पश्चात् की गई सर्व क्रियाऐं गति(मोक्ष) कराने के उद्देश्य से की गई थी।उन ज्ञानहीन गुरूओं ने अन्त में कौवा बनवाकर छोड़ा।वह प्रेत शिला पर प्रेत योनि भोग रहा है। पीछे से गुरू और कौवा मौज से भोजन कर रहा है।
अधिक जानकारी हेतु Sant Rampalji Mahraj U Ch v करे
मृत्यु उपरान्त जीव के कल्याण अर्थात् गति कराने के लिए की जाने वाली शास्त्रविरूद्ध क्रियाऐं व्यर्थ हैं।
अधिक जानकारी के लिए
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#TruthOfShraadh
मृत्यु उपरान्त जीव के कल्याण अर्थात् गति कराने के लिए की जाने वाली शास्त्रविरूद्ध क्रियाऐं व्यर्थ हैं।
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#TruthOfShraadh
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मृत्यु के पश्चात् की गई सर्व क्रियाऐं गति(मोक्ष) कराने के उद्देश्य से की गई थी।उन ज्ञानहीन गुरूओं ने अन्त में कौवा बनवाकर छोड़ा।वह प्रेत शिला पर प्रेत योनि भोग रहा है। पीछे से गुरू और कौवा मौज से भोजन कर रहा है।
अधिक जानकारी हेतु Sant Rampalji Mahraj U Ch v कर��
#TruthOfShraadh
परमात्मा कबीर जी समझाते हैं कि हे भोले प्राणी! गरूड़ पुराण का पाठ उसे मृत्यु से पहले सुनाना चाहिए था ताकि वह परमात्मा के विधान को समझकर पाप कर्मों से बचता। पूर्ण गुरू से दीक्षा लेकर अपना मोक्ष करता। जिस कारण से वह न प्रे�� बनता, न पितर बनता, न पशु-पक्षी आदि
#TruthOfShraadh
श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 9 का श्लोक 25 भी यही कहता है कि जो पितर पूजा (श्राद्ध आदि) करते हैं, जो भूत पूजा (अस्थियाँ उठाकर पूजा कराकर गंगा में बहाना, तेरहवीं, सतरहवीं, महीना, छःमाही, वर्षी आदि-आदि) करते हैं,
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#StoryOfAadiGanesha
♻️जानिए गणेश जी से पहले किसकी होती थी पूजा।
गणेश जी की साधना का मन्त्र ॐ गं गणपतये नमः नहीं है। फिर क्या है उनकी साधना का सही मन्त्र?
देखें श्रद्धा चैनल 02:00 pm (IST)
#StoryOfAadiGanesha
गीता अध्याय 9 के श्लोक 25-26 में कहा गया है कि जो जिसकी भक्ति करता है उसी के लोक में चला जाता है।
गणेश जी की भक्ति से ��ूर्ण मुक्ति नहीं है।
देखें साधना टीवी चैनल रात 7:30 से 8:30 बजे तक।
#StoryOfAadiGanesha
पवित्र गीता जी अध्याय 8 के श्लोक 16 व अध्याय 9 के श्लोक 7 के अनुसार ब्रह्म लोक तक के सभी प्राणी और ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी पुनरावृत्ति में हैं। तो फिर गणेश जी जन्म-मरण से कैसे बच सकते हैं।