लेकिन होता भूडोल, बवण्डर उठते हैं,
जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढ़ाती है;
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है
#cockroachjantaparty#sonamwangchuk
किताबों से कभी गुजरो तो यूँ किरदार मिलते हैं,
गए वक्तों की ड्योढ़ी में खड़े कुछ यार मिलते हैं,
जिसे हम दिल का वीराना समझकर छोड़ आये थे,
वहाँ उजड़े हुए शहरों के कुछ आसार मिलते हैं !!
#Gulzar#poetry