फिनलैंड, डेनमार्क और स्वीडन जैसे नास्तिक देश है हैप्पीनेस इंडेक्स में टॉप पर है जबकि दिन रात भगवान का नाम लेने वाला भारत 116वे नंबर पर क्यों है?
खुशहाल प्रार्थना से नहीं!
बल्कि अच्छी व्यवस्था से आती हैं!!!
@premyadav043 सिर्फ आरक्षण खत्म करने से जातीय भेदभाव खत्म नहीं होता, क्योंकि भेदभाव की जड़ सामाजिक सोच और व्यवहार में भी होती है!
समानता तब आएगी जब अवसर और सम्मान दोनों बिना जाति के मिलेंगे!
कुछ लोग कहते हैं कि जातिवाद नहीं होता। कभी एक गाँव से दूसरे गाँव जाकर सिर्फ़ इतना कहकर देखिए कि "मैं दलित हूँ", फिर पता चल जाएगा कि जातिवाद है या नहीं!!
किसी भी देश में किसी भी धर्म की किताब किसी भगवान ने नहीं लिखी बल्कि मनुष्यों ने लिखी। बाद में उन्हें भगवान की देन बताया गया ताकि लोग डर या आस्था के कारण उन पर सवाल न उठाएँ!!
इतिहास में यह दौर भी दर्ज होगा!
जब छात्रों के न्याय की मांग में दलित धरने पर बैठे थे!!
मुस्लिम खाना खिला रहे थे!
सिख पानी पिला रहे थे!
और खुद को सबसे बड़ा देशभक्त कहने वाले खुलकर उनका विरोध कर रहे थे!!