मेट्रो बंद करो।
रास्ते बंद करो।
दुकानें बंद करो।
Internet बंद करो।
खाना बंद करो।
अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए।
बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, ���ोदी जी - पेपर लीक।
द पास्ट, कैन नेवर फाइट द फ्यूचर!!
इस दृश्य के तुरंत बाद, शिक्षामंत्री ने इस्तीफा दे दिया। जिस व्यक्ति को, चार साल पहले ही अक्षमता ���र अकर्मण्यता के लिए हटा देना चाहिए था, उसे हटाने के लिए भारत के युवा को अनशन, प्रदर्शन और खुलेआम गाली गुफ्तार पर उतरना पड़ा।
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और अब भी यह इस्तीफा, सरकार के आत्मनिरीक्षण, मंत्रिपरिषद के कार्यो की मॉनिटरिंग, इवेल्यूएशन और इंडिकेटर्स के आधार पर नही, मजबूरी में हुआ है।
यह नोट करने की बात है।
एंटायर कैबिनेट जडमूर्ख, बकलोल, घमंडी, नालायको और बेईमानो से भरी है। आप कोई भी विभाग उठाकर देख लें। और इनकी मजबूत उपस्थिति का कारण सिर्फ एक है- वफादारी।
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ने���ा के प्रति, पार्टी के प्रति,
आरएसएस के प्रति।
इस सरकार के मंत्रियों को जनता नही, इसके मालिकानों से डर है। और मालिकान को परफॉर्मेंस, एफिशिएंसी, रिजल्ट नही चाहिए।
तो जिस गवर्मेंट के निर्��ाण मे ही मेरिटोक्रेसी बुनियाद नही, उससे परफॉर्मेंस की आशा बेकार है।
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और यह आंदोलन, इस निराशा से उपजी कुंठा का विस्फोट है। यह सूचक भी है, कि जिस तरह का समाज बनाने की कोशिश आरएसएस और उसके हजारों बेनाम संगठन कर रहे थे- वह प्रोजेक्ट स्पेक्टिकुलरली फेल रहा है।
उल्टे, इसने समाज को, इन युवाओ के पीछे लामबंद कर दिया है। जो देश में अंतहीन निरर्थक धार्मिक-जातीय विभाजन और अस्मिता की राजनीति को साफ साफ नकारता है।
और वह युवा, इस मंच पर राहुल गांधी के साथ खड़ा हो गया है।
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यह तस्वीर दर्शनीय है।
एग्जेक्टली वैसी है, जैसी होनी चाहिए।
सेंटर में वे है, जो क्षुब्ध है, पीड़ित हैं, आक्रोशित हैं। राहुल किनारे हैं, हाथ बांधे, उनकी आवाज को सुनते हुए।
बिल्कुल ऐसी ही लीडरशिप चाहिए।
हमे नेता ऐसा चाहिए- जो सुने।
अटेंशन दे, इस देश के बच्चों को प्यार से निहारे।
इस पूरे आंदोलन को, एक बार भी हाईजैक करने की कोशिश राहुल ने नही की। वे जंतर मंतर नही गए, वीडियो शूट न करवाये, बड़बोल बयान न दिए।
मगर अपने राजनीतिक वजूद को चुपचाप, छात्रों के पीछे खड़ा कर दिया।
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देश का अगला दशक, उसके छात्र बनाते है।
जो शिक्षक डॉक्टर, इंजीनियर, इनोवेटर, बिजनेसमैन, सोशल साइंटिस्ट और त��ाम पेशों में जाकर हिंदुस्तान को अगले स्तर पर ले जाने वाले हैं।
नेता का काम तो महज उनकी सुनना, समझना, और उसकी सफलता के लिए- जरूरी सिस्टम रास्ते साफ करना है।आने वाले कुछ दशक, (अगर राहुल की यही तासीर बनी रहे,तो) आधुनिक भारत का स्वर्णयुग हो सकते है।
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और 1990 के मंदिर मस्जिद, मुसलमान, कश्मीर, ��लाला, तलाक, पाकिस्तान, नफरत और ध्वंस की राजनीति, 2026 में कर रही भाजपा, आरएसएस और उनके तमाम गुंडे संगठन - आज के बाद- भारत का पास्ट हैं।
इस तस्वीर में दिख रहे लोग, ठीक इसी क्रम में जैसे कि वे खड़े है-भारत का फ्यूचर हैं। इनका वक्त आ गया है। इन्हें जीतना ही है।
हीन प्रतिगामी शक्तियों को मैदान छोड़ना ही होगा।बिकॉज द पास्ट,
कैन नेवर फाइट द फ्यूचर!!
❤️
हर बार सरकार से बातचीत करने केवल सौरव दास और आशुतोष रंका ही क्यों जाते हैं.
इन दोनों को बातचीत के लिए किसने नियुक्त किया है. यह आपसी सहमति का किया हुआ फैसला है या केवल अभिजीत दीपके का निजी अदेश्य ?
म��रा मानना है बातचीत में Neha Bora को भी शामिल किया जाना चाहिए.
कॉकरोच जनता पार्टी को अपनी कार्यशैली में लोकतांत्रिक तरीके को अपनाना चाहिए. इतना बड़ा आंदोलन केवल तीन लोगों के बीच रहे यह ठीक नही है.
Neha Bora की क्रेडिबिलिटी कॉकरोच जनता पार्टी से ज्यादा है. आंदोलन में Neha Bora आगे है तो बातचीत में भी उसे आगे रखना चाहिए.
आज छात्रों को बहुत बड़ी जीत मिली है।
याद रहे, प्रदर्शन में जिन छात्रों पर घातक हमले हुए - किसी का हाथ टूटा, किसी का पैर, किसी की पसली, पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियार का इस्तेमाल किया गया, तो कई चोट खा कर critical हो गए - इन सबके सीधे ज़ि��्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं।
मांग साफ है, इस हमले के organisers से लेकर implementors तक, सभी की जवाबदेही तय हो और उनपर ऐसी कार्रवाई हो जो छात्रों को दिखे - तब जा कर होगा इंसाफ़।
अमित शाह जी, आपको जवाब तो देना ही पड़ेगा।
आज 10 जनपथ पर नेहा बोरा की प्रेस वार्ता के समय दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अंजलि और दानिश भी राहुल गांधी के साथ थीं।
लेकिन नेहा के बोलते समय दानिश फ्रेम में दिखाई नहीं दे रही थीं तो राहुल गांधी अपनी जगह से हटे और दानिश अली को आगे किया।
इतने बड़े नेता होने के बाद भी छोटे से छोटे कार्यकता का भी कैसे ध्यान रखा जाता है ये कोई राहुल गांधी जी से सीखे।
इस दौरान नेहा ने जमकर राहुल गांधी की तारीफ़ की बोली शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए आज से पहले किसी नेता न हमसे ऐसी फ्रूटफुल चर्चा नहीं की.!
“बैनर नीचे कर लो वरना पूरी उम्र बेरोजगार रह जाओगे” - आदित्यनाथ ।
ये अहंकार की प्रकाष्ठा है ।
युवा क���ी BJP को माफ़ नहीं करेंगे ।
इसीलिए दिनकर जी ने कहा है 👇
जब नाश मनुज पर छाता है,
पहले विवेक मर जाता है ।
The discussion that we had with Rahul Gandhi Sir today on the education system is the most fruitful.
देश में शिक्षा व्यवस्था को takeover पर चर्चा न करके युवाओं की आकांक्षाओं को ख़त्म किया जा रहा है, लेकिन आज जो बातचीत हुई, वह शानदार रही
छात्रों की जो तीन मांग राहुल गांधी जी ने रखी हैं, वो जायज हैं और उनसे कोई समझौता नही�� हो सकता
@neha_aisa जी
लाठीचार्ज का ज़िम्मेदार ~ तड़ीपार तड़ीपार
चंदा चोरों का सरदार ~ तड़ीपार तड़ीपार
पेपर चोरी का सरकार ~ तड़ीपार तड़ीपार
GenZ दिन ब दिन खतरनाक होते जा रहे है, इस सरकार का ग़लत जनरेशन से पाला पड़ गया
सीवान में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर असॉल्ट राइफल से फायरिंग किया!
AK-47 हो या इंसास, जैसे एसॉल्ट राइफल का इस्तेमाल पुलिस, अर्ध सैनिक बलों अथवा सेना द्वारा आतंकवादियों या हमलवार पेशेवर अपराधियों के विरुद्ध किया जाता है, प्रदर्शन कर रहे आम नागरिकों के विरुद्ध नहीं!
देशवासी दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल पर अचंभित हो रहे थे पर बिहार पुलिस ने तो सभी सीमाएं ही लाँघ दी। बिहार पुलिस द्वारा पहले जहानाबाद में फायरिंग की गई थी और अब तो सिवान में असॉल्ट राइफल से फायरिंग हो रही है।
सम्राट सरकार पागल हो चुकी है!
@yadavtejashwi
#NEET #Bihar #RJD
यह नेहा वोरा हैं।
जंतर मं��र पर सबसे लंबा अनशन करने वाली छात्रा।
जिनका कल का भाषण जंतर मंतर पर सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जा रहा है।
आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मिलने के बाद कहा की शिक्षा क्षेत्र में होने वाले सुधारो पर हमारी सबसे अच्छी बातचीत राहुल जी के साथ हुई।
राहुल उन्हें माइक देकर एक तरफ खड़े हैं।
कोई और ऐसा कर सकता है?
शहस्ता परवीन:- बच्चो को क्यो रोका है
दिल्ली पुलिस:- ये प्रोटेस्ट में गए थे
शहस्ता:- प्रोटेस्ट में जाना तो संवैधानिक अधिकार है
दिल्ली पुलिस:- मै...मै...मैडम हम पकरे नही है पूछताछ के लिए बिठाया है
(कैमरे पर हाथ मारते हुए) ये हैलो कैमरा बंद कर 😳
पत्रकार:- हम मीडिया से है
शहस्ता:- आप पुलिस गाडी मे बिठाकर कौन सी पूछताछ कर रहे थे
पीडि�� छात्र:- ये हमे अरेस्ट करने को बोल कर ले जा रहे थे सर का नाम सुधीर सिंह है
दिल्ली पुलिस अब जंतर-मंतर पर आने जाने वाले छात्रो को गिरफ्तार करने पर ऊतारू हो गई है...
वो तो भला हो शहस्ता परवीन जी और मो• अफजल आलम भाई का जिन्होने बच्चो को बचा लिया !!