हर भारतीय को मातृभाषा मेँ पूरी शिक्षा,मातृभाषा में रोजगार,मातृभाषा मेँ न्याय पाने का अधिकार है। मातृभाषा के प्रयोग से जीवन न जी पाना मौलिक अधिकारोँ का हनन है।
हंस और हँस दो अलग शब्द हैँ।
हंस उड गया।
बालक हँस रहा है ।
लेकिन प्रचलन मेँ हँस को हंस लिखा जाता है और यह मान्य भी हो गया है। यदि लिखा हो कि "मन्त्री जी हंस रहेँ हैँ" तो कुछ लोग इस "हंस" का उच्चारण "हँस" ही करेँगे ।
मुख्य समस्या :-
देवनागरी की वैज्ञानिकता का एक मुख्य आधार है कि एक चिह्न का एक ही उच्चारण हो जिससे वह हर बार एक ही प्रकार से पढा जाए।
बिन्दु के प्रयोग के वर्तमान चलन इस सिद्धान्त को तोड रहेँ हैँ।
जैसे कि यदि स्वयं को स्वयम् बोला जाता है तो हैं को हैम् और मैं को मैम् क्योँ नहीँ बोला जाना चाहिए।
हैं , मैं, कहां, वहां, नहीं, हूं, के प्रचलन इतने व्यापक हो गए कि AI ने भी ये शब्द गलतियोँ के साथ ही सीख लिए हैँ।
हैं , मैं, कहां, वहां, नहीं ❌️❌️❌️
हैँ, मैँ, कहाँ, वहाँ, नहीँ ✅️✅️✅️
हंस, सिंह ✅️✅️
बिन्दु या शिरोबिन्दु क्या है?
प्राचीन देवनागरी मेँ बिन्दु का प्रयोग अनुस्वार के लिए किया जाता था जैसे कंस, हंस।
फिर इसका प्रयोग पञ्चमाक्षरोँ ङ्, ञ्, ण् ,न्, म् के लिए भी होने लगा जैसे पञ्च > पंच, सम्भव >संभव, ठण्डा>ठंडा।
पञ्माक्षरो के स्थान शिरोबिन्दु का प्रयोग शुद्ध तो नहीँ पर मान्य है।
- बंद (बन्द) ✅️
- डंडा(डण्डा), कंठ (कण्ठ)✅️
- आरंभ (आरम्भ), ट्रंप (ट्रम्प)✅️
- भयंकर (भयङ्कर) , गंगा (गङ्गा)✅️
- पंच (पञ्च), मंच (मञ्च)✅️
इस प्रयोग के कारण भी भ्रम तो उत्पन्न हुएँ हैँ पर यह मुख्य समस्या नहीँ है ।
लेकिन टाइपराईटर के जमाने मेँ जब रोमन मशीनो मेँ केवल छापे बदलकर उन मशीनो का प्रयोग हिन्दी के लिए हुआ तो कई समस्याएँ आईँ।
उस जमाने मेँ छपाई की समस्या के कारण चन्द्रबिन्दु के स्थान पर भी बिन्दु का प्रयोग होने लगा। लेकिन अब वे समस्याएँ नहीँ है पर ये प्रयोग बहुप्रचलित हो गए हैँ ।
चन्द्रबिन्दु क्या है? :
चन्द्रबिन्दु लगाना यह इंगित करता है कि चन्द्रबिन्दु लगा स्वर नाक से बोला जाए। जैसे अँ ,आँ ,इँ, ईँ ,उँ, इत्यादि नाक से बोले जाने वाले स्वर हैँ। इसी प्रकार स्वर मात्राओँ के साथ भी चन्द्रबिन्दु लगाया जा सकता है। चन्द्रबिन्दु की कोई अपनी स्वतन्त्र ध्वनि नहीँ है , चन्द्रबिन्दु केवल स्वरोँ या स्वर मात्राओँ के साथ लगता है। चन्द्रबिन्दु से दर्शाए जाने वाले अर्थात नाक से बोले जाने वाले स्वर नासिक्य कहे जाते सकते हैँ। स्वर की तरह ही नासिक्य स्वर को भी कितना भी खीचा जा सकता है।
नासिक्य स्वर ध्वनि वाले शब्द:
यहाँ, वहाँ, जहाँ, तहाँ, कहाँ ✅️
नहीँ, कहीँ, वहीँ ✅️
मैँ, हैँ, हूँ, क्यूँ, ✅️
हँस के उच्चारण मेँ ह् के ठीक बाद वाला स्वर अँ है। अँ एक ध्वनि है दो नहीँ।
हँस मेँ ध्वनियाँ ये हैँ
ह् अँ स् अ।
जबकि पक्षी हंस मेँ प्रयोग हुए बिन्दु के लिए अलग ध्वनि है। इसका उच्चारण लगभग हन्स जैसा है ।
हंस के प्रचलित उच्चारण मेँ ध्वनियाँ कुछ ऐसी हैँ -
ह् अ न् स् अ ।
अन्य उदाहरण -
- फंसे (~फन्से)❌️
- फँसे✅️
- पूंछ ❌️
- पशु की पूँछ होती है पूंछ नहीँ, पुंछ एक स्थान का नाम है।
अन्तर तो सरल है लेकिन प्रचलन, आदत और भाषा की शिक्षा के प्रति अरुचि के कारण समाज मेँ यह विषय भी कठिन हो गया है।
फिर भी लगातार चर्चा बनी रहे तो कुछ तो होगा ही।
महामानव यदि 75 का होते ही स्वयं संन्यास ले लेते, तो ऋषितुल्य हो जाते।
यही होता मास्टर स्ट्रोक।
भाजपा एक और दशक तक अजेय हो जाती।
इससे भाजपा मेँ अगली पीढ़ी को स्थान मिलता, जनता को नई सम्भावना दिखाई देती और आक्रोश नहीँ रहता।
अब उस क्रिकेट खिलाड़ी की तरह चिपके रहेँगे, जो केवल पुराने कीर्तिमानोँ के कारण दल मेँ बना हुआ है। जब तक बाहर नहीँ किया जाएगा, संन्यास नहीँ लेगा।
तर्क और आँकडे आवश्यक है पर केवल इनसे समाधान नहीँ होगा।
Reservation exists because a significant chunk of the population supports it, and politicians think that ending it could risk their chances of winning elections. Unless anti-reservation forces start winning elections or ending reservation becomes a major movement, it is not going to end.
Logic alone is not the answer; political mobilization is.
Yes, reservation is a failed policy, but ignorance of this fact is not why reservation exists.
Reservation exists because a significant chunk of the population supports it, and politicians think that ending it could risk their chances of winning elections. Unless anti-reservation forces start winning elections or ending reservation becomes a major movement, it is not going to end.
Logic is not the answer; political mobilization is.
@Scivf4 Still incomplete.
If the diagram was correct we would have eclipses every month, which we dont.
Inclination of lunar orbit is key element missing.
@Narendr30509032@drsureshpant@pahadinaari जी,
बात वही है कि शब्द के मूल से इतिहास नहीँ आता है।
भारत मेँ चीनी मूल के शब्द शायद ही प्रयोग मेँ आते होँ पर चीनी मूल की वस्तुएँ अवश्य प्रयोग मेँ आती हैँ।
कागज या किताब भी विदेशी मूल हैँ तो क्या भारत मेँ कागज या किताब नहीँ होते थे।
आप कह सकते हैँ कि पुस्तक या पत्र शब्द तो मिलते हैँ।
लेकिन कुछ विदेशी शब्द समाज इतना ग्रहण कर लेता है कि मूल शब्द पूर्णतः चलन से बाहर हो जाते हैँ। तलाक भी ऐसा ही शब्द है।
शब्द का मूल इतिहास से आता है, इतिहास शब्द मूल से नहीँ
हंस और हँस दो अलग शब्द हैँ।
हंस उड गया।
बालक हँस रहा है ।
लेकिन प्रचलन मेँ हँस को हंस लिखा जाता है और यह मान्य भी हो गया है। यदि लिखा हो कि "मन्त्री जी हंस रहेँ हैँ" तो कुछ लोग इस "हंस" का उच्चारण "हँस" ही करेँगे ।
मुख्य समस्या :-
देवनागरी की वैज्ञानिकता का एक मुख्य आधार है कि एक चिह्न का एक ही उच्चारण हो जिससे वह हर बार एक ही प्रकार से पढा जाए।
बिन्दु के प्रयोग के वर्तमान चलन इस सिद्धान्त को तोड रहेँ हैँ।
जैसे कि यदि स्वयं को स्वयम् बोला जाता है तो हैं को हैम् और मैं को मैम् क्योँ नहीँ बोला जाना चाहिए।
हैं , मैं, कहां, वहां, नहीं, हूं, के प्रचलन इतने व्यापक हो गए कि AI ने भी ये शब्द गलतियोँ के साथ ही सीख लिए हैँ।
हैं , मैं, कहां, वहां, नहीं ❌️❌️❌️
हैँ, मैँ, कहाँ, वहाँ, नहीँ ✅️✅️✅️
हंस, सिंह ✅️✅️
बिन्दु या शिरोबिन्दु क्या है?
प्राचीन देवनागरी मेँ बिन्दु का प्रयोग अनुस्वार के लिए किया जाता था जैसे कंस, हंस।
फिर इसका प्रयोग पञ्चमाक्षरोँ ङ्, ञ्, ण् ,न्, म् के लिए भी होने लगा जैसे पञ्च > पंच, सम्भव >संभव, ठण्डा>ठंडा।
पञ्माक्षरो के स्थान शिरोबिन्दु का प्रयोग शुद्ध तो नहीँ पर मान्य है।
- बंद (बन्द) ✅️
- डंडा(डण्डा), कंठ (कण्ठ)✅️
- आरंभ (आरम्भ), ट्रंप (ट्रम्प)✅️
- भयंकर (भयङ्कर) , गंगा (गङ्गा)✅️
- पंच (पञ्च), मंच (मञ्च)✅️
इस प्रयोग के कारण भी भ्रम तो उत्पन्न हुएँ हैँ पर यह मुख्य समस्या नहीँ है ।
लेकिन टाइपराईटर के जमाने मेँ जब रोमन मशीनो मेँ केवल छापे बदलकर उन मशीनो का प्रयोग हिन्दी के लिए हुआ तो कई समस्याएँ आईँ।
उस जमाने मेँ छपाई की समस्या के कारण चन्द्रबिन्दु के स्थान पर भी बिन्दु का प्रयोग होने लगा। लेकिन अब वे समस्याएँ नहीँ है पर ये प्रयोग बहुप्रचलित हो गए हैँ ।
चन्द्रबिन्दु क्या है? :
चन्द्रबिन्दु लगाना यह इंगित करता है कि चन्द्रबिन्दु लगा स्वर नाक से बोला जाए। जैसे अँ ,आँ ,इँ, ईँ ,उँ, इत्यादि नाक से बोले जाने वाले स्वर हैँ। इसी प्रकार स्वर मात्राओँ के साथ भी चन्द्रबिन्दु लगाया जा सकता है। चन्द्रबिन्दु की कोई अपनी स्वतन्त्र ध्वनि नहीँ है , चन्द्रबिन्दु केवल स्वरोँ या स्वर मात्राओँ के साथ लगता है। चन्द्रबिन्दु से दर्शाए जाने वाले अर्थात नाक से बोले जाने वाले स्वर नासिक्य कहे जाते सकते हैँ। स्वर की तरह ही नासिक्य स्वर को भी कितना भी खीचा जा सकता है।
नासिक्य स्वर ध्वनि वाले शब्द:
यहाँ, वहाँ, जहाँ, तहाँ, कहाँ ✅️
नहीँ, कहीँ, वहीँ ✅️
मैँ, हैँ, हूँ, क्यूँ, ✅️
हँस के उच्चारण मेँ ह् के ठीक बाद वाला स्वर अँ है। अँ एक ध्वनि है दो नहीँ।
हँस मेँ ध्वनियाँ ये हैँ
ह् अँ स् अ।
जबकि पक्षी हंस मेँ प्रयोग हुए बिन्दु के लिए अलग ध्वनि है। इसका उच्चारण लगभग हन्स जैसा है ।
हंस के प्रचलित उच्चारण मेँ ध्वनियाँ कुछ ऐसी हैँ -
ह् अ न् स् अ ।
अन्य उदाहरण -
- फंसे (~फन्से)❌️
- फँसे✅️
- पूंछ ❌️
- पशु की पूँछ होती है पूंछ नहीँ, पुंछ एक स्थान का नाम है।
अन्तर तो सरल है लेकिन प्रचलन, आदत और भाषा की शिक्षा के प्रति अरुचि के कारण समाज मेँ यह विषय भी कठिन हो गया है।
फिर भी लगातार चर्चा बनी रहे तो कुछ तो होगा ही।
@mktyaggi परिभाषा जैसे दिखने वाले शब्द या शब्द समूह अक्सर अंग्रेजी के किसी प्रयोग का अनुवाद होते है।
यह भी bandit queen के अनुवाद का प्रयास प्रतीत होता है
@sanjeevsanyal Do RSS leaders also refer to these eminent historians when the they make claims about thousands of years of suppression of so called Dalits, where are primary sources?
@RatanSharda55@MisraNityanand Sir,
When are you challanging claims by RSS leaders about thousands of years of suppression of so called dalits Or if you think claims are correct when are presenting proof to support the claims?