कटिहार में जिस बड़ी संख्या में माताएं-बहनें आशीर्वाद देने पहुंचीं, उससे साफ है कि बिहार के मेरे परिवारजनों ने जंगलराज और पंजे वालों को पूरी तरह से नकार दिया है।
SSC फेज़ 13 की परीक्षा में सामने आ रही गड़बड़ियां सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मोदी सरकार के विफल और सड़े हुए सिस्टम का आईना हैं।
400–500 किलोमीटर दूर से परीक्षा देने पहुंचे युवाओं को केंद्र पर जाकर पता चलता है कि उनकी परीक्षा रद्द कर दी गई है। सिस्टम की खामियों के कारण लगातार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से लाखों युवाओं और उनके परिवारों की मेहनत, समय और उम्मीदें बर्बाद हो रही हैं।
पिछले 10 सालों में NEET, UGC-NET, UPPSC, BPSC और बोर्ड परीक्षाओं सहित 80 से ज्यादा पेपर्स में खुलेआम धांधली हुई है। सिर्फ इस साल की धांधली से 85 लाख बच्चों का भविष्य प्रभावित हुआ है। इन्हें रोकने में सरकार नाकाम रही है और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुधार के उसके बड़े-बड़े वादे खोखले साबित हुए हैं।
यह सरकार के निकम्मेपन, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और परीक्षा माफियाओं के गठजोड़ का नतीजा है। युवाओं के सपनों के साथ यह विश्वासघात बंद होना चाहिए।