🚨 MP रीवा में UGC का विरोध किया तो नौकरी गई! अब न्याय के लिए कलेक्ट्रेट के सामने भूख हड़ताल पर बैठे दिलीप शर्मा!
मध्य प्रदेश के रीवा में UGC रेगुलेशन 2026 के विरोध में आवाज उठाने वाले आउटसोर्स कर्मचारी दिलीप शर्मा की नौकरी जाने का मामला बेहद गंभीर सवाल खड़ा करता है।
क्या अब अपने अधिकारों की आवाज उठाने के लिए भी नौकरी गंवानी पड़ेगी?
जिस संविधान ने हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार दिया, क्या उसके रहते किसी कर्मचारी को अपनी बात रखने की कीमत रोज़गार खोकर चुकानी चाहिए?
UGC रेगुलेशन से भविष्य प्रभावित होने की आशंका है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना लोकतंत्र में अपराध कैसे हो सकता है?
आज दिलीप शर्मा कलेक्ट्रेट के सामने भूख हड़ताल पर बैठे हैं। सवाल सिर्फ एक कर्मचारी का नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों का है जो नौकरी जाने के डर से अन्याय के खिलाफ सवर्ण बोलने से पहले सौ बार सोचते हैं। चुप रहते है कही नौकरी न चली जाए
🚨 MP रीवा में UGC का विरोध किया तो नौकरी गई! अब न्याय के लिए कलेक्ट्रेट के सामने भूख हड़ताल पर बैठे दिलीप शर्मा!
मध्य प्रदेश के रीवा में UGC रेगुलेशन 2026 के विरोध में आवाज उठाने वाले आउटसोर्स कर्मचारी दिलीप शर्मा की नौकरी जाने का मामला बेहद गंभीर सवाल खड़ा करता है।
क्या अब अपने अधिकारों की आवाज उठाने के लिए भी नौकरी गंवानी पड़ेगी?
जिस संविधान ने हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार दिया, क्या उसके रहते किसी कर्मचारी को अपनी बात रखने की कीमत रोज़गार खोकर चुकानी चाहिए?
UGC रेगुलेशन से भविष्य प्रभावित होने की आशंका है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना लोकतंत्र में अपराध कैसे हो सकता है?
आज दिलीप शर्मा कलेक्ट्रेट के सामने भूख हड़ताल पर बैठे हैं। सवाल सिर्फ एक कर्मचारी का नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों का है जो नौकरी जाने के डर से अन्याय के खिलाफ सवर्ण बोलने से पहले सौ बार सोचते हैं। चुप रहते है कही नौकरी न चली जाए
सामान्य वर्ग और मेरिट के खिलाफ खुद भाजपा सरकार खड़ी हो चुकी है!
अब वोट देते समय ये ज़रूर ध्यान रखें कि महज वोटबैंक के चक्कर में सारा डेटा और सच साइड में रखकर कौन जातिवाद करने चला है!
#BJPAgainstGC
यदि @narendramodi अपनी घटिया जातिवादी नीतियों के चक्कर में इतना नहीं गिरते, तो लोग कई बातों को इग्नोर करते रहते। परंतु, दुष्कर्म जैसे अपराधों में मेडिकल की अनिवार्यता समाप्त कर के, सवर्णों के विरोध में 'मोदी एक्ट' जैसा एक हथियार दे दिया, जिसमें ना तर्क है, ना तथ्य।
कोई नेता जब दुष्कर्म में जाति ढूँढ रहा हो, तो समझिए कि उसे महिला सुरक्षा की चिंता है या 'दलित महिला वोट' की? यह समाचार पढ़ कर उल्टी आ रही है कि इस घृणित जातिवादी सोच वाले व्यक्ति को देश चलाने का कार्य मिला हुआ है।
‼️𝗦𝘁𝗮𝘁𝗲 𝗼𝗳 𝗚𝗲𝗻𝗲𝗿𝗮𝗹 𝗖𝗮𝘁𝗲𝗴𝗼𝗿𝘆 𝗶𝗻 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 - 30% 𝗼𝗳 𝗽𝗼𝗽𝘂𝗹𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗯𝘂𝘁 𝘇𝗲𝗿𝗼 𝘄𝗲𝗹𝗳𝗮𝗿𝗲 𝗯𝘂𝗱𝗴𝗲𝘁‼️
𝗧𝗛𝗘 𝗜𝗡𝗝𝗨𝗦𝗧𝗜𝗖𝗘 𝗧𝗢 𝗚𝗘𝗡𝗘𝗥𝗔𝗟 𝗖𝗔𝗧𝗘𝗚𝗢𝗥𝗬 𝗖𝗔𝗡𝗡𝗢𝗧 𝗕𝗘 𝗜𝗚𝗡𝗢𝗥𝗘𝗗 𝗔𝗡𝗬 𝗟𝗢𝗡𝗚𝗘𝗥!
India’s Scheduled Castes (SCs) constitute 16.6% of the population and Scheduled Tribes (STs) another 8.6% - a combined 25.2%, according to the 2011 Census.
According to all the surveys/studies conducted by government departments/ ministries including NHFS, NSS, UDISE since 1990s till date, the General Category, constitutes 29–31% of India’s population - a larger share than SCs and STs combined.
Yet look at the disparity in dedicated welfare support.
𝗙𝗼𝗿 2026–27, 𝘁𝗵𝗲 𝗰𝗼𝗺𝗯𝗶𝗻𝗲𝗱 𝘄𝗲𝗹𝗳𝗮𝗿𝗲 𝗮𝗹𝗹𝗼𝗰𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻𝘀 𝗳𝗼𝗿 𝗦𝗖𝘀 𝗮𝗻𝗱 𝗦𝗧𝘀 𝗯𝘆 𝗖𝗲𝗻𝘁𝗿𝗮𝗹 𝗮𝗻𝗱 𝗦𝘁𝗮𝘁𝗲 𝗴𝗼𝘃𝗲𝗿𝗻𝗺𝗲𝗻𝘁𝘀 𝗮𝗿𝗲 𝗲𝘀𝘁𝗶𝗺𝗮𝘁𝗲𝗱 𝗮𝘁 ₹6.5–7.5 𝗹𝗮𝗸𝗵 𝗰𝗿𝗼𝗿𝗲, 𝗮𝗽𝗮𝗿𝘁 𝗳𝗿𝗼𝗺 𝗿𝗲𝘀𝗲𝗿𝘃𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗯𝗲𝗻𝗲𝗳𝗶𝘁𝘀 .
Where is the comparable dedicated welfare budget for the General Category?
Where are the dedicated scholarships, coaching assistance, hostel facilities and financial support for economically disadvantaged General Category students?
The consequences are alarming!
According to the IIM Udaipur Higher Education Report, between 2020–21 and 2023–24:
• Total higher-education enrolment increased by approximately 37 lakh, from 4.13 crore to 4.50 crore.
• General Category enrolment fell by 11 lakh, from 1.83 crore to 1.71 crore.
• General Category enrolment declined in absolute numbers in 21 of 36 States and Union Territories.
While overall higher-education enrolment expanded, General Category enrolment moved in the opposite direction.
This demands urgent investigation and policy action.
Our demand is unequivocal:
1.₹7 lakh crore annually for General Category welfare.
2.Dedicated scholarships and financial assistance for economically disadvantaged students.
3.Coaching, hostel and higher-education support.
4.Transparent Central and State budget allocations.
5.Annual increases in funding in line with welfare allocations for other social groups.
𝗜𝗳 25.2% 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗽𝗼𝗽𝘂𝗹𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗿𝗲𝗽𝗿𝗲𝘀𝗲𝗻𝘁𝗲𝗱 𝗯𝘆 𝗦𝗖𝘀 𝗮𝗻𝗱 𝗦𝗧𝘀 𝗿𝗲𝗰𝗲𝗶𝘃𝗲𝘀 𝗱𝗲𝗱𝗶𝗰𝗮𝘁𝗲𝗱 𝘄𝗲𝗹𝗳𝗮𝗿𝗲 𝗮𝗹𝗹𝗼𝗰𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻𝘀 𝗿𝘂𝗻𝗻𝗶𝗻𝗴 𝗶𝗻𝘁𝗼 𝗹𝗮𝗸𝗵𝘀 𝗼𝗳 𝗰𝗿𝗼𝗿𝗲𝘀, 𝘄𝗵𝘆 𝘀𝗵𝗼𝘂𝗹𝗱 𝗮 𝗚𝗲𝗻𝗲𝗿𝗮𝗹 𝗖𝗮𝘁𝗲𝗴𝗼𝗿𝘆 𝗽𝗼𝗽𝘂𝗹𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗲𝘀𝘁𝗶𝗺𝗮𝘁𝗲𝗱 𝗮𝘁 29–31% 𝗵𝗮𝘃𝗲 𝗻𝗼 𝗰𝗼𝗺𝗽𝗮𝗿𝗮𝗯𝗹𝗲 𝗱𝗲𝗱𝗶𝗰𝗮𝘁𝗲𝗱 𝘄𝗲𝗹𝗳𝗮𝗿𝗲 𝗳𝗿𝗮𝗺𝗲𝘄𝗼𝗿𝗸?
₹7 𝗟𝗔𝗞𝗛 𝗖𝗥𝗢𝗥𝗘 𝗘𝗩𝗘𝗥𝗬 𝗬𝗘𝗔𝗥 𝗙𝗢𝗥 𝗚𝗘𝗡𝗘𝗥𝗔𝗟 𝗖𝗔𝗧𝗘𝗚𝗢𝗥𝗬 𝗪𝗘𝗟𝗙𝗔𝗥𝗘 - 𝗜𝘁 𝗶𝘀 𝘁𝗶𝗺𝗲 𝗳𝗼𝗿 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗲𝗻𝘁𝗿𝗮𝗹 𝗮𝗻𝗱 𝗦𝘁𝗮𝘁𝗲 𝗴𝗼𝘃𝗲𝗿𝗻𝗺𝗲𝗻𝘁𝘀 𝘁𝗼 𝗮𝗱𝗱𝗿𝗲𝘀𝘀 𝘁𝗵𝗶𝘀 𝗴𝗹𝗮𝗿𝗶𝗻𝗴 𝗽𝗼𝗹𝗶𝗰𝘆 𝗴𝗮𝗽.
BREAKING: The Karnataka High Court strikes down the state’s 56% reservation law, which increased the SC quota from 15% to 17% and the ST quota from 3% to 7%.
The judiciary is literally saving this country!
आदरणीय प्रधानमंत्री @narendramodi
जी !! समय अभी भी शेष है। संभावनाएं अभी भी जिंदा हैं। माफी मांग लीजिए। अठहत्तर साल अनदेखी और अपमान के कम नहीं होते। सवर्ण समाज की मांगों पर गौर कर लीजिए। @ajeetbharti जी और डाॅक्टर @neha_laldas जी जो कह रही हैं उसे ध्यान पूर्वक सुन लीजिए।
Request everyone to go through the MP highcourt judgement in 73% reservation case.
And see how our senior counsels (GC side) annihilated the govt side's arguments & manipulated reports with hard data and facts👇😂😂
“शिक्षा समाज को बदलने और शोषित वर्ग के उत्थान का सबसे शक्तिशाली हथियार है।”
ये बाबा साहेब ने कहा था । इस बच्ची को स्कूल ज़रूर जाना चाहिए । शिक्षा और संस्कार दोनों मिलेंगे ।
बता दें कि ये 100 करोड़ रुपये OBC साइड के वकीलों पर खर्च हुए हैं!
सामान्य वर्ग के खिलाफ सरकार खुद लड़ रही है- ये सब आंखें खोलकर देख लें!
और ये भी देख लें कि भाजपा के मुख्यमंत्री और कांग्रेस, दोनों सामान्य वर्ग के खिलाफ, एकसाथ खड़े हैं!
अजीत भारती सही कह रहे हैं। यह कोई एक दिन की बात नहीं है। 2015 से लगातार चल रहा है।
IIM उदयपुर की स्टडी के अनुसार:
2020-21 से 2023-24 के बीच जनरल कैटेगरी के 37 लाख बच्चों का एन्ट्री गिर गया।
SC/ST/OBC का शेयर 61% पार कर गया। जनरल की सीटें अब सिर्फ 38-39% रह गई हैं, जिसमें सवर्ण, मुस्लिम और अन्य सब शामिल हैं।
प्रतिशत ही नहीं, अब्सोल्यूट संख्या भी गिर रही है।
सवाल ये है: सवर्णों का टैलेंट खत्म हो गया है, या अलग-अलग स्कीम्स और रिजर्वेशन बढ़ा-बढ़ाकर सिस्टम ही ऐसा बना दिया गया है कि जनरल कैटेगरी के बच्चे सिस्टम से बाहर हो रहे हैं?
38% में सबको ठूंस दिया गया है। इस पर चुप रहना मतलब अपनी ही पीढ़ी को धोखा देना।
न मोदी जी राष्ट्र हैं, न योगी जी राष्ट्र हैं। राष्ट्र हम सब हैं। और जब टैलेंट पाइपलाइन ही सूखने लगे, तो बोलना जरूरी है।
SHOCKING 🚨 Imran Khan is a foreign citizen. He took part in illegal protest against Indian Govt 🤯
BJP leader Kirit Somaiya demands his immediate deportation 🔥
Marathi actress Ketaki Chitale was arrested in 2022 for sharing a poem on social media criticizing Sharad Pawar.
1) Over 40 days in jail
2) 22 FIRs
3) Scrapped Sec 66A of IT Act 2000 was applied to her.
This is what real DICTATORSHIP looks like
Ketaki Chitale was arrested in 2022 for sharing a poem allegedly criticizing Sharad Pawar.
She spent over 40 days in jail & had 22 FIRs filed against her.
Remember her?