नरेंद्र मोदी हर हाल में जवाहरलाल नेहरू से बड़े हैं। नेहरू 35 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री थे, वो भी गाँधी द्वारा थोपे हुए। मोदी 150 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री हैं, तीन-तीन बार चुने हुए।
नेहरू को बनी-बनाई कांग्रेस पार्टी मिली, जिसकी 15 समितियों में से एक ने भी उनका अनुमोदन नहीं किया फिर भी उन्हें PM पद दे दिया गया। म���दी को एक ऐसी पार्टी मिली जो लगातार 2 चुनाव हारकर 10 वर्ष से विपक्ष में बैठी हुई थी। नेहरू चंद दिन जेल में रहे तो पिता मोतीलाल ने उन्हें सारे तिकड़म करके निकलवाया। मोदी को UPA काल में सरकारी एजेंसियों ने लगातार प्रताड़ित किया। नेहरू रईस खानदान से थे और नेपोटिज्म का उ��्पाद थे क्योंकि उनके पिता भी कांग्रेस अध्यक्ष थे। मोदी की माँ ने दूसरों के घरों में बर्तन माँजा, स्वयं मोदी ने पिता के साथ चाय बेची।
हर तथ्य चीख-चीखकर यही कहता है कि नेहरू से मोदी कई गुना बड़े हैं। नेहरू ने तिब्बत से लेकर कश्मीर और लद्दाख तक पर एक के बाद एक करके ब्लंडर किए, मोदी ने दुश्मन को घर में घुसकर मारा। नेहरू ने देश को चीन से युद्ध में हार की तरफ़ धकेल दिया, मोदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए ��ाकिस्तान के परमाणु संसाधनों पर वार किया। नेहरू की अगली 3 पीढियाँ ग़रीबी हटाने के नाम पर चुनाव लड़ती रही, मोदी ने 27 करोड़ लोगों को ग़रीबी से बाहर निकालकर दिखाया। एम्स के लिए राजकुमारी अमृता कौर को नेहरू से लड़ना पड़ा और अपनी ज़मीन दान में देनी पड़ी, मोदी ने कोविड-19 जैसी महामारी में दो-दो वै��्सीन बनवा दिए।
नेहरू बौने हैं मोदी के सामने। मोदी ने दुनियाभर में प्रवासी भारतीयों के भीतर स्वदेश को लेकर एक उत्साह का सृजन किया, नेहरू ने भारत को विदेश में सँपेरों का देश दिखाया।
Ma'am jab tak Alakh Sir and Divyakirti Sir jawab na de de tab tak rukengi nhi.
Bring the impact players into the debate.
#amitkilhor#kilhor#anjanaomkashyap
VIP culture पूर्ण रूप से बंद होना चाहिए...
नेता जनता की सुरक्षा का वादा करके चुनाव जीत जाते है
जीत कर बड़े बड़े काफिले अपनी सुरक्षा में लगा लेते है
यही है अमृत काल 😡😡
बीजेपी के एक मुख्यमंत्री अपने कैबिनेट के एक कद्दावर मंत्री से छुटकारा पाना चाहते हैं।मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नेतृत्व को सुझाव दिया है कि मंत्री जी को
दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में शामिल कर लिया जाए।मतलब प्रदेश सरकार से हटाकर केंद्रीय संगठन में ले लिया जाए।
मुख्यमंत्री का कहना है कि मंत्री की नजर फ़ाइलो पर कम,मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ज़���यादा लगी रहती है।
मंत्री जी भी निश्चिंत है।उन्हें पता है कि सरकार से बाहर होंगे तो संगठन में बड़ी ज़िम्मेदारी मिलेगी।
मंत्री भी चाहते हैं कि एक बार मुख्यमंत्री के चुंगल से निकलकर और दिल्ली में बैठकर मुख्यमंत्री से दो दो हाथ किया जाए।
केंद्रीय नेतृत्व भी कम कलाकार नहीं है।मुख्यमंत्री जिस मंत्री से छुटकारा पाना चाहते हैं,उसी मंत्री को मुख्यमंत्री के गले में लटका हुआ केंद्रीय नेतृत्व दे���ना चाहता है।
मुख्यमंत्री त्रस्त है,मंत्री मस्त हैं।
कितनी अजीब बात है न...
महाराष्ट्र में सुबह 5 बजे शपथ दिला दी जाती है और बहुमत बाद में साबित करने का बोला जाता है
लेकिन तमिलनाडु में पहले बहुमत साबित करो शपथ बाद में दिलाएंगे