*🙏 एक बेटी की तलाश में मदद की अपील*
🙏 मेरी बेटी तुष्या की तलाश में मदद की अपील
मेरी 16 वर्षीय बेटी तुष्या सिन्हा 10 अगस्त 2026 को लखनऊ स्थित घर से लापता हो गई है। इस संबंध में 11 अगस्त को FIR दर्ज कराई गई है, लेकिन आज 10 दिन बीत जाने के बाद भी मेरी बेटी का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
एक माँ के लिए इससे बड़ी चिंता और पीड़ा शायद कुछ नहीं हो सकती। मैं हर पल अपनी बेटी की सुरक्षित वापसी की प्रतीक्षा कर रही हूँ।
इस समय मेरी एक ही प्रार्थना है कि तुष्या की तलाश में हर संभव मदद मिले और वह सुरक्षित अपने घर वापस लौट आए।
यदि किसी को तुष्या के बारे में कोई जानकारी, सुराग या ऐसी कोई भी बात मालूम हो जो उसकी तलाश में सहायक हो सकती है, तो कृपया तुरंत इस नंबर पर सूचित करें:
📞 +91 94738 00438
🙏 कृपया इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ।
आपकी एक छोटी-सी सूचना मेरे लिए मेरी बेटी को वापस पाने की बहुत बड़ी उम्मीद बन सकती है।
मेरी बेटी तुष्या को सुरक्षित घर लौटाने में मेरी मदद करें। 🙏
पोस्ट देख रहे हिंदुओं से बस यही कहना है कि ज्यादा से ज्यादा @Uppolice को मेंशन कर देना |
इसने क्या किया है यह बताने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि फोटो ही पर्याप्त है |
@mathurapolice आपसे निवेदन है कि इस मामले को ढीला ना छोड़ा जाए |
आरक्षण हटाओ आंदोलन सिर्फ पिछले दो तीन महीने की घटनाओं पर आधारित विरोध नहीं है।
इसको मजबूती ख़ाली आज नहीं बल्कि SC ST कानून के दुरुपयोग, जातीय जनगणना के नाम पर देश में आरक्षण और आगे बढ़ने का भय, प्राइवेट सेक्टर मे आरक्षण की माँग, UGC के नए नियम और आरक्षण के कारण जनरल वर्ग में अपने भविष्य के प्रति संशय आदि सब कारक बने है जो लंबे समय में जनरल वर्ग में अंदर अंदर आक्रोश का कारण बन रहे है।
वर्तमान समय में आरक्षण खत्म हो जायेगा इसकी कोई संभावना नहीं है क्योंकि इसकी माँग करने वाले भी बड़ी संख्या में खड़े हो जाएँगे, पर एक स्वस्थ व्यवस्था में आरक्षण में सुधार हो इस पर विमर्श होने में कोई बुराई नहीं है-
- आरक्षण की सीमा किसी भी सूरत में नहीं बढ़े
- जिसको एक बार मिल चुका हो उसके बजाय दूसरे जरूरत मंद को मिले।
- प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण आते ही FDI आदि ग़ायब हो जाएगा, तो इस सेक्टर में आरक्षण का जिक्र भी होना देश हित में नहीं।
- देश में एक तय समय रखकर आरक्षण के ज़रूरतमंदों तक मदद पहुंचाई जाये, अनंत काल तक ये देश हित में नहीं है।
नैतिक रूप से आरक्षण में सुधार को हृदय से समर्थन है क्योंकि ये राजनीतिक विचारधारा से भी आगे देश हित में होना चाहिए।
लेकिन राजनैतिक रूप से ये मुद्दा सबके लिए अछूत रहेगा, कोई भी पार्टी ना इस आंदोलन का समर्थन करेगी और ना कोई आरक्षण खत्म करने का वादा।
भाजपा के लिए ऐसे मुद्दों पर दोनों तरफ़ से नुक़सान है, बेहद सावधानी से भविष्य का रास्ता निकालिए।
पहले चुनौती दी जाती थी कि केवल सोशल मीडिया पर लिखने से कुछ नहीं होता है, सड़क पर उतरकर दिखाओ। सड़क पर उतरने के बाद कहा जा रहा है कि तुम्हारी माँगें मानना संभव ही नहीं है।
जंतर-मंतर पर जो भी आए इस बार, वे सभी आम लोग हैं। पढ़े-लिखे हैं। जिस अजीत भारती को तुम गाली देते हो, वो सैनिक स्कूल के कड़े अनुशासन वाली जीवनशैली से निकला व्यक्ति है, किरोड़ीमल कॉलेज में अंग्रेजी का टॉपर है और कई पुस्तकों का लेखक भी। एक निर्धन किसान व पशुपालक का बेटा है, गाँव से निकला हुआ। ख़ैर, ये आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष का है ही नहीं।
एक कुतर्क दिया जा रहा है कि फलाँ पार्टी का इससे क्या लेना-देना जो इसके ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हो। फिर तुम्हारी समझ में भूल है। ये आंदोलन किसी पार्टी के ख़िलाफ़ नहीं है, व्यवस्था के ख़िलाफ़ है। वो व्यवस्था, जिसे सिर्फ़ इसीलिए सही ठहराया जाता है क्योंकि कोई भी राजनीतिक दल उसके विरुद्ध नहीं जाएगा। फिर तो और भी अच्छा है। ये आंदोलन ग़ैर-राजनीतिक है, यानी समाज का है। राजनीति नहीं है, ये तो अच्छी बात है। वरना, कबका तुम इसे कांग्रेस या लेफ्ट प्रायोजित बता देते। अच्छा है न, राजनैतिक नहीं है।
फिर कुतर्क दिया जाता है कि आरक्षण हट ही नहीं सकता। ये तो तानाशाही घोषणा है। मत हटाओ, आओ और बहस तो करो। लोकतंत्र में एक स्वस्थ चर्चा तो करो। अपनी एकतरफ़ा तानाशाही घोषणा के पक्ष में एकाध तर्क तो दो। तर्क रह-सहकर एक ही है - "त्याग करो, वरना गृहयुद्ध होगा। बर्दाश्त करते जाओ, वरना सामने वाला पक्ष भड़क जाएगा।" जब अपनी बात आती है तो कोई भी अपनी ही सोचता है, क्योंकि सवाल तब स्वयं के अस्तित्व का और भविष्य की पीढ़ियों की रक्षा का बन जाता है। फिर आदमी ये नहीं सोच पाता है कि उसके विरोध से किसको फ़ायदा होगा और किसका होगा नुक़सान। वो लड़ता है ताकि जिस व्यवस्था ने उसे दोयम दर्जे का नागरिक बनाकर रख दिया है वो व्यवस्था उसका सम्मान करे, उसके योगदानों को प्रतिष्ठा दे।
एक और कुतर्क ये है के यह सब चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में चुनाव तो हैं, लेकिन 6 महीने बाद। चुनाव को प्रभावित करना होता तो ये लोग लखनऊ में जुटते। ये राष्ट्रीय राजधानी में हो रहा है और लोकसभा चुनाव पूरे 3 साल बाद है। चुनाव का कुछ लेना-देना है ही नहीं।
जो लोग हिंदुत्व की बातें करते हैं, देखो तो सही। यहाँ जंतर-मंतर पर हिन्दू जुटे हैं। श्रद्धाभाव से हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं। 'जय श्री राम' के नारे भी लगे हैं। सब सच्चे हिन्दू हैं, सबके घरों में पूजा-पाठ प्रतिदिन होता है। इनके बाप-दादाओं ने ही मंदिरों को संरक्षित रखा है। हिंदुत्व के लिए इनका योगदान स्वीकार करो। सम्मान दो। इनकी माँगों को केवल इसीलिए ख़ारिज मत करो क्योंकि ये किसी पार्टी के ख़िलाफ़ जा रहा तुम्हारी नज़र में।
इसमें कोई शक नहीं है कि आरक्षण पर चर्चा होनी चाहिए। किसी विषय-वस्तु पर चर्चा भी न होने देना उसका पैगम्बरीकरण है। भारत में किसी भी व्यक्ति या विषय का पैगंबीकरण स्वीकार्य नहीं हो सकता।
जो लोग आरक्षण हटाने की माँग लेकर जंतर-मंतर पर जुटे हैं, उन्हें सुनिए। सुनने का साहस होना चाहिए। उन्हें ख़ारिज कर देने या उनका मज़ाक़ बना देने से किसी भी प्रकार के लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होगी, ये तो अबतक सत्ता-प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों के मस्तिष्क में भी स्पष्ट हो गया होगा। अगर नहीं हुआ है, तो फिर भगवान ही मालिक है।
किसी को आरक्षण मिल रहा है तो वो उसका अधिकारी है, चलो मान लिया। लेकिन, सबसे बड़ा व गंभीर प्रश्न यह है कि जिन्हें आरक्षण नहीं मिल रहा उन्होंने कौन सी ग़लती की है? मूल भेद अमीर-ग़रीब का है। हर देश व काल में यही सबसे बड़ी भेद रहा है। राजा और रंक से बड़ा भेद कोई नहीं है। धन ही समाज में सम्मान एवं प्रतिष्ठा दिलाता है। जिसके पास संपत्ति है, उसी की धाक होती है। वही समाज के झगड़ों का भी निपटारा करता है क्योंकि उसका कहा कोई नहीं टालता। अनंतकाल से, पृथ्वी के हर हिस्से में - धनवान ही समाज को नचाता है। ऐसे में जाति, मजहब या वर्ग के आधार पर आरक्षण कबतक जारी रहे, उसकी व्यवस्था कैसी रहे और ये व्यवस्था संविधान निर्माताओं की सोच से वो मेल कैसे खाए - इसपर बहस होनी चाहिए, इसकी बृहद समीक्षा होनी चाहिए, इसपर पुनर्विचार होना चाहिए।
बहस से भागने का अर्थ है कि आप लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते। गृहयुद्ध की धमकियाँ आती हैं, लेकिन अन्याय से बेहतर कुरुक्षेत्र में महाभारत का हो जाना ही होता है। धरा की लाली के बाद ही युधिष्ठिर-राज्य स्थापित हो पाया। अगर अमेरिका से आंबेडकर की तस्वीर लहराते हुए भारत-भूमि पर उतरकर कोई सनकी देश के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले सकता है, फिर आरक्षण पर भी बहस होनी ही चाहिए।
सरकार ने किसानों से बात की, किसान आंदोलन पर क़दम वापस खींचे। प्रधानमंत्री ने TV पर आकर तीनों कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा की। CJP के प्रतिनिधियों से सरकार के दो-दो शक्तिशाली मंत्रियों ने बातचीत की, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ और प्रधानमंत्री को कई बार इंस्टाग्राम पर आकर सफाई देनी पड़ी। फिर, जंतर-मंतर पर आज जुटी भीड़ अपराधी तो नहीं है कि आप उनकी नहीं सुनेंगे?
अगर आरक्षण सही है तो सबको दीजिए, ग़लत है तो किसी को नहीं। अगर 'अफ़र्मेटिव एक्शन' पर चलना ही है तो हर आरक्षित व्यक्ति के पास प्रमाण हो कि उसके साथ जातिगत भेदभाव हुआ है। अगर किसी ब्राह्मण के साथ कहीं जातिगत भेदभाव हो गया, तो उसे भी आरक्षित की श्रेणी में डाल दीजिए।
देश ने देख लिया है कि भीड़तंत्र अराजकता के जरिए सरकार से अपनी बात मनवा ले रहा है। अभी तक ग़ैर-आरक्षित वर्ग ने ये तरीका नहीं आज़माया है। ये उनका बड़प्पन है।
UGC मुद्दे पर प्रदर्शन, जंतर-मंतर पहुंचे प्रदर्शनकारियों को किया गया डिटेन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर UGC और SC-ST से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, वे जाति आधारित आरक्षण और UGC के मुद्दे पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के साथ मिलकर कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
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#WATCH | Delhi: On the Jantar Mantar protest against caste-based reservation, YouTuber Ajeet Bharti says, "Our biggest demand is that the government should come up with a white paper stating that the reservations you've given to people for 80 years... I come from Bihar. Research how dire the situation of the Musahar community is. Their children aren't getting reservations. Why? Because those caste groups don't even have leaders... The second demand is quota within quota, on which the government has also said that we will not implement the creamy layer in it. Why will you not implement it? It is so absurd that the government is bowing down to those few Dalit leaders who only talk about their caste group... The third demand is minimum marks. You cannot sell the dream of a developed India by compromising on merit. If 50% of the deserving youth or boys and girls who are studying will not get admission in the IITs, IIMs, or higher education, your efficiency has reduced by 50% right there... Then the Economically Weaker Section (EWS) should be made a part of the Scheduled Castes (SC). The class whose definition says economically weaker, you are neither giving them a facility in buying the form, nor are you waiving their hostel fee, nor is their course fee being waived; what will you achieve by merely recognising it?... At least indicate that we are going to have a sit-down talk about this..."
नरेंद्र मोदी जी अपने आज दिखा दिया आप वाकई सवर्ण विरोधी हो।
आज पूरा दिन प्रसाशन ने ज्यादती की लेकिन हम झुकेंगे नहीं।
अभी लड़ाई बाकी है। मुझे काफी चोटें आई है।
जंतर-मंतर पर गरमाया माहौल, UGC-आरक्षण के खिलाफ जुटे सवर्ण समाज के लोगों को RAF ने हिरासत में लिया
दिल्ली के जंतर-मंतर पर यूजीसी और जातिगत आरक्षण को लेकर प्रदर्शन कर रहे सवर्ण समाज के लोगों पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने धरना स्थल से हटाना शुरू कर दिया है. जानकारी के मुताबिक पुलिसका कहना है कि प्रदर्शनकारियों के पास प्रदर्शन की अनुमति नहीं है.
पूरी ख़बर: https://t.co/yqLLVIDSFA
#JantarMantar #DelhiProtest #UGC #Reservation #ATCard #AajTakSocial
तीन बजे दोपहर से लगातार आठ बजे तक जंतर मंतर पर बोलता रहा। दो घंटे के गैप के बाद, साढ़े चार घंटे का लाइव किया। 362 लोगों के प्रश्नों का लाइव में उत्तर दिया। 13000 कमेंट आए थे।
अब बारह घंटे में साढ़े नौ घंटे आरक्षण पर बोलने के पश्चात सोने जा रहा हूँ। आशा है कि सत्ताधीशों की भी नींद कल सुबह खुल जाए।
शुभ रात्रि! (वैसे तो अब ब्रह्म मुहूर्त होने वाला है।)
आरक्षण के मुद्दे पर जंतर मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे। अगर कॉकरोच जनता पार्टी को एक महीने तक प्रदर्शन करने की छूट दी गई, तो इन प्रदर्शनकारियों को एक ही दिन में पुलिस क्यों हटा रही है ?
जब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण है तब तक इन्हें जबरन नहीं हटाया जाना चाहिए।
जंतर मंतर तो खाली करा लिया जाएगा लेकिन बिना किसी रिव्यू के अंधाधुंध दिए जा रहे आरक्षण को लेकर जो विरोध लोगों के मन में भर चुका है वो मन से ख़ाली कैसे होगा?
लेकिन पता है कि कोई पार्टी इसपर चर्चा तक को तैयार नहीं होगी। लिख के ले लीजिए।
🚨🚨Live Update from jantar mantar
Swami Anand Swaroop ji gave a clear message from the protest:
“In our organisation, every person is a leader.”
We must not rely on the media.
We have to take this movement to the entire country ourselves.
Repost this as much as possible.