16 साल पहले अमित शाह को अपना घर गुजरात छोड़कर जाना पड़ा था क्यों?
क्योकि दिल्ली मे दो माँ बेटे बैठे थे जो फर्जी जाँचे खोलकर उन्हें घेर रहे थे।
आज वही अमित शाह दिल्ली मे खूटा गाड़कर बैठे है और माँ बेटे दिल्ली की सड़को पर गृहयुद्ध की भीख मांग रहे है।
माँ बेटे जेल कब जाएंगे ये भी अमित शाह ही तय करेंगे, ये वक्त का फेर है कब कैसे पलट जाए कोई नहीं जानता।
ज़ब अमित शाह जेल गए थे तो सोनिया गाँधी के नौकर अहमद पटेल ने कहा था कि शाह का ग्रन्थ अब समाप्त हुआ, लेकिन समय ऐसा पलटा कि अमित शाह गुजरात तो क्या भारत के सबसे लम्बे कार्यकाल वाले गृहमंत्री बन गए।
बहुत लोग शिकायत करते है कि अमित शाह सीधा एक्शन नहीं लेते लेकिन मैं गलत नहीं कहूंगा, सीधे एक्शन सीरिया मे बशर अल असद ने लिए थे, पाकिस्तान मे सेना ने लिए थे, बांग्लादेश मे हसीना ने लिए थे।
ये सीधे एक्शन ही तो है जिनकी बाहर बैठा कोई प्रतीक्षा कर रहा है, गुजरात मे जो कड़वे अनुभव हुए है वे दिल्ली मे काम आ रहे है।
अमित शाह से प्रार्थना है कि 2029 और राहुल गाँधी की मदद से जीत लीजिये और कांग्रेस यदि 50 सीट पर सिमट जाए तो उसके बाद नेशनल हेराल्ड केस मे इसे अब अंदर कर दीजिये।
अब ये बंदा और इसकी आवारापंती बेशर्मी बर्दाश्त के बाहर हो रही है।
इस मुद्दे पर ज्यादा लिखने को कुछ नहीं है मगर अच्छा लगा ज़ब तड़ीपार करने वाला आप ही के नाम को रो रहा हो।
सफलता का चेहरा कैसा होता है ये जानना हो तो अमित शाह ही गूगल करना पड़ेगा।
कांग्रेस के लिए अच्छी और बुरी खबर दोनों है।
पहले, अच्छी खबर यह है कि असम (सिलचर नगर निगम) में EVM की बजाय बैलेट पेपर से चुनाव हुए।
दूसरी, बुरी खबर यह है कि कांग्रेस बैलेट पेपर के चुनाव में भी हार गई और निर्दलीयों से भी पीछे तीसरे नंबर पर रही।
भाजपा-एनडीए को प्रचण्ड बहुमत के साथ 42 में से 34 सीटें, निर्दलीयों को 6 और कांग्रेस को सिर्फ 2 सीटें मिलीं।
कांग्रेसियों...EVM हो या बैलेट, आपका भाग्य नहीं बदलने वाला।
इन्होंने कायर राहुल गांधी को साफ़ तौर पर समझा दिया है कि 'वोट की चोरी' क्या होती है!
गांधी खानदान का एक ही काम है :- अगर सत्ता मिल जाए तो देश बेच दो; और सत्ता पाने के लिए फिर से देश बेच दो।
भाजपा समर्थक होने का सबसे बड़ा गर्व यही है। 🇮🇳
हमें अंधभक्त कह लो,
संघी कह लो,
मोदी भक्त कह लो।
जो कहना है, कह लो।
लेकिन एक तमगा कभी नहीं लगा सकते...
देशद्रोही।
🇮🇳🚩
CEO गूगल - सुंदर पिचाई - ब्राह्मण
CEO माइक्रोसॉफ्ट - सत्या नडेला - ब्राह्मण
CEO यूट्यूब - नील मोहन - ब्राह्मण
CEO एडोब - शांतनु नारायण - ब्राह्मण
CEO आईबीएम - अरविंद कृष्णन - ब्राह्मण
CEO मोटोरौला मोबि - संजय झा - ब्राह्मण
CEO अल्बर्ट्सन - विवेक शंकरण - ब्राह्मण
ये सभी CEO जनरल कैटेगरी के हैं।
ये वो महान प्रतिभाएं हैं जिन्हें अमेरिका ने अपना लिया और भारत ने आरक्षण की बदौलत खो दिया..
भाजपा के अलावा एक भी पार्टी ने स्मिथ मछार की तारीफ नहीं की....
सिर्फ इसलिए क्योंकि वो हनुमान चालीसा पढ़ने वाला एक हिंदू है जिसने यहूदियों की जान बचाई....
#इस देश में हिंदुओं को अब संभलने की जरूरत है.....
बहुत ही ज्ञानवर्धक और रोचक वीडियो…
इस वीडियो में भारतीय कागजी मुद्रा के पुराने से लेकर वर्तमान स्वरूप तक के सफर को बेहद दिलचस्प और सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया है। यह वीडियो न केवल हमारी मुद्रा में समय के साथ आए बदलावों को समझने का अवसर देता है, बल्कि भारत के आर्थिक और ऐतिहासिक विकास की झलक भी दिखाता है।
आप भी इस वीडियो को जरूर देखें और अपने बच्चों को भी दिखाएं, ताकि वे हमारी भारतीय मुद्रा के इतिहास, उसके बदलते स्वरूप और उसके विकास को रोचक तरीके से समझ सकें।
एक और बात बताऊँ आपको हैरानी नहीं होनी चाहिए,
ये जो आज चारों तरफ़ हेट फ़ैलाया जा रहा है, जो इधर उधर के ड्रामे शुरू किए गए हैं ये सब अचानक से नहीं हो गया है पिछले साल नवम्बर के आस पास मेरे एक पत्रकार मित्र ने बताया था कि बहुत बड़ी टीम काम कर रही है गुप्त रूप से जो खोज रही है अलग अलग मुद्दे और फिर देखना “पोल खोल होगी”
मैंने कहा लेकिन कोई पोल है ही नहीं जो खोली जा सके तो क्या ही करेंगें।
उन्होंने बताया कि नहीं रहेगा तो कभी न कभी कुछ न कुछ मौक़ा मिलेगा ज़रूर और उसी के बाद सब ऐसा लहर बना देंगें कि PR और स्टारडम सब फुस्स हो जाएगा।
मैंने साफ़ बताया देखिये कल को बहुत नफ़रत फैला देंगें तो वो ख़ुद ही सबका आवागमन बन्द कर देंगें और अकेले अंदर बैठकर भजन करेंगें अपने शिष्यों के साथ फिर कोई क्या कर लेगा! वो पहले जैसे थे वैसे ही बैठे रहेंगें क्या बदल जायेगा भला।
उन्होंने बताया कि बहुतों की दुकान बंद हो गयी इनके मीठी मीठी बातों के चक्कर में। लोग तंत्र मंत्र से थोड़ा कटने लगे, बहुत सारी मंदिरों से लेकर बहुत सारे अलग अलग जगह पर दिक़्क़त होती चली गयी सो सब इकट्ठे हो जाएंगें एक दिन और फिर सब खेल करेंगें देख लेना।
वैसे उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि BJP ने प्लांट किया है इन्हें, फिर कहा था कि सब PR का खेल है और बाबा प्रसिद्ध हो गए।
अब जाकर मुझे सब समझ आ रहा है... और सारी बातें उनकी झूट भी निकलती चली गईं... एक एक करके.. जैसे।
–ये BJP द्वारा बैठाए गए हैं... ये बात झूठ निकली एकदम से क्योंकि तनिक भी समझ नहीं है सबको। वो पहले से वृंदावन में थे और पहले से ही लोगों को राह दिखाते थे अपने आस पास। राजनैतिक बात कभी करते ही नहीं हैं।
–वो न तो पैसा माँगते हैं किसी से और न ही कोई मुहिम चलाते हैं। न ही अपना वृंदावन छोड़कर कहीं देश में घूम रहे हैं तो उन पर उँगली क्या ही उठेगी।
–रही बात PR की तो उनकी वाणी में वो जादू है और उनकी बातें इतना सरल हैं कि हर कोई अपने आप जुड़ता चला गया। करोड़ों लोगों को उन्होंने सत्मार्ग पर ला दिया, ये आपको ग़लत लग रहा है तो आप मूर्ख हैं।
– प्रचार करने के लिये किसी को बुलाते तो अच्छे से प्रचार करवाते। कोई आता है दर्शन करने या एकांतिक वार्तालाप में शामिल होने तो एक छोटी सी वीडियो डाल दी जाती है बस। न कि दस बार अलग अलग अपलोड करें।दस जगह पैसे देकर चलवाया जाए। अरे उन्हें ये सब करने की कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।
मुझे आश्रम के प्रत्येक व्यक्ति का तो कुछ नहीं पता लेकिन महाराज जी आज भी प्यारे हैं, सच्चे हैं और सही मायने में सन्त की तरह ही व्यवहार रखते हैं।
जिसको जो सोचना है सोचे, पर ये सच है कि नेगेटिव एनर्जी वाले लोग जानबूझकर व्यूज के चक्कर में गाली दे रहे हैं और उनके ख़िलाफ़ ख़बरें चलवा रहे हैं।
राधे राधे🙏
मेरी माँ की 2 महीने पहले मौत हो गई, मैं उन्हें नागपुर में हॉस्पिटल में लेकर था, यहाँ मेरे प्लॉट पर जाने के लिए दी गई सड़क को ही भू माफिया बेच दे रहे हैं…….और फफक-फफक कर रो पड़ा ये फौजी।
प्रीतम द्विवेदी सेना में हैं। लोन लेकर प्लॉट लिया। प्लॉट के लिए जो सड़क दी गई थी भू माफिया अब उसी की प्लॉटिंग कर रहे हैं।
भारत माँ का ये सेवक अपनी माँ की दवा करवा रहे थे, तब ये पाप किया गया। मामला MP के रीवा का। इन्हें न्याय कौन दिलवाएगा?
सरकार मुगलों का मदरसा और अंग्रेजों का कॉन्वेंट मांटेसरी क्यों नहीं बंद कर रही है?
सरकार पूरे देश में 10 वीं तक समान शिक्षा (एक देश-एक शिक्षा बोर्ड-एक पाठ्यक्रम) क्यों नहीं लागू कर रही है?
@PMOIndia@HMOIndia
@duttsanjay अब भारत मुखर होकर जवाब देता है। यदि आपको कहीं और शांति दिखती है तो वहां चले जाओ। यह हिन्दुओं का देश है जो गांधी से पहले महावीर, बुद्ध, अशोक के समय से ही शांति अहिंसा और वसुधैव कुटम्बकम में विश्वास रखते हैं।
जिस इंसान ने सिर्फ़ स्कूल-कॉलेज नहीं, बल्कि शिक्षा का एक पूरा शहर बसा दिया हो.
जिसने आदिवासी, गरीब और वंचित बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए अपने दिन-रात एक कर दिए हों. ऐसे विराट व्यक्तित्व को मेरा नमन 🙏🏻
आपने उन बच्चों की आँखों में सपने जगाए हैं, जिनके लिए कभी बड़ा सपना देखना भी शायद एक सपना ही था. आपने उन्हें केवल किताबें और शिक्षा नहीं दी, बल्कि यह विश्वास दिया कि हालात चाहे कितने भी साधारण क्यों न हों, हौसले और शिक्षा के दम पर आसमान छुआ जा सकता है.
किसी एक बच्चे का भविष्य बदलना पुण्य है, लेकिन हजारों बच्चों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का रास्ता देना एक तपस्या है.
आपकी इस तपस्या, त्याग, सेवाभाव और शिक्षा के प्रति समर्पण को मेरा हृदय की गहराइयों से नमन.
आप केवल शिक्षण संस्थान नहीं बनाते, आप भविष्य बनाते हैं… वे पीढ़ियाँ बनाते हैं… जो हमें एक सशक्त राष्ट्र के रुप में दुनिया में पहचान देती है.
यहाँ से निकले हुए बच्चे विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करेंगे , मेरी ढेरों शुभकामनाएँ ☺️🙏🏻💐💐 @achyuta_samanta
यूक्रेन ने कहा है कि उनके पास शांति के कई प्रस्ताव हैं… लेकिन PM मोदी का प्रस्ताव सबसे बेहतर और व्यापक है..
सोचिए रूस से युद्ध लड़ रहा यूक्रेन भारत के प्रस्ताव को सबसे बेहतर बता रहा है, जबकि रूस के राष्ट्रपति पुतिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांति प्रयासों की तारीफ़ कर चुके हैं।
जिस युद्ध ने दुनिया की बड़ी ताकतों को वर्षों से उलझा रखा है, उसमें रूस और यूक्रेन दोनों भारत की बात को महत्व दे रहे हैं..
मोदी की विदेश नीति की यही सबसे बड़ी ताकत है..भारत ने किसी एक खेमे का हिस्सा बनने के बजाय सभी पक्षों से संवाद बनाए रखा। रूस हो, यूक्रेन हो, अमेरिका हो या यूरोप भारत ने अपने लिए बातचीत के दरवाज़े खुले रखे..
और अब उसका असर दिखाई दे रहा है..
मोदी सिर्फ भारत के हितों की आवाज़ नहीं बन रहे, बल्कि मुश्किल अंतरराष्ट्रीय संकटों में शांति और समाधान की आवाज़ के तौर पर भी उभर रहे हैं..और यह स्पष्ट तौर पर भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत का संकेत है 👍🏻
दुनियाँ “सलाम”
कर रही है लेकिन @RahulGandhi को क्या हो गया,
कैप्टन स्मित तो “भारत”
का है उसे “भाजपा” का क्यूँ समझ रहे हो,
आपकी लड़ाई भाजपा से है “भारत”
से मत लड़ो. #CaptainSmitMachchhar
आज लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में आयोजित “अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद–द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि महासम्मेलन एवं भारतीय सनातन गौरव सम्मान समारोह” में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिभाग कर उपस्थित जनों को संबोधित किया।
🚩🙏
@RSSorg@VHPDigital@PMOIndia@BJP4UP
जो लोग उड़ते विमान में हुए आतंकी हमले को भी “फर्जी ड्रामा” बताकर खारिज कर दें,
उनसे EVM, चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार पर भरोसे की उम्मीद रखना भी कमाल का व्यंग्य है! 😏
कभी-कभी सचमुच लगता है कि यह अभागा देश
इतनी ऊँची कोटि की क्रांतिकारी राजनीति के योग्य ही नहीं है! 😂
देखिए, अरविंद केजरीवाल जी को ही ले लीजिए।
दुनिया के सबसे ईमानदार, सबसे पारदर्शी और सबसे त्यागी नेता!
कभी कहते थे, बड़ी गाड़ी नहीं चाहिए, बंगला नहीं चाहिए,
AC दफ्तर नहीं चाहिए, जनता के बीच बस-मेट्रो से जाएंगे।
फिर जनता ने शायद गलत समझ लिया।
क्योंकि आज अगर छोटी दूरी के लिए हेलिकॉप्टर और चॉपर दिखाई दें,
तो भाईसाहब को ऑटो में बैठाकर लाल बत्ती पर रोकना
देश की प्रगति के साथ अन्याय होगा! 😂
आखिर प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले नेता
ट्रैफिक सिग्नल पर गोलगप्पे खाते हुए राष्ट्र निर्माण थोड़े करेंगे!
और दिल्ली का शीशमहल?
अरे भाई, क्रांति के लिए शांत वातावरण चाहिए।
24 घंटे AC, आरामदायक बंगला और सुकून भरा माहौल न मिले,
तो इतनी बड़ी-बड़ी क्रांतिकारी योजनाएँ आखिर बनेंगी कहाँ?
चाँदनी चौक के जाम में बैठकर?
फिर आते हैं शिक्षा-क्रांति के महान रणनीतिकार मनीष सिसोदिया जी।
जब न्यायालय में पत्नी की बीमारी के आधार पर बाहर रहने की आवश्यकता बताई गई,
तो परिवार सर्वोपरि था।
लेकिन राजनीति में लौटते ही देश और संगठन की पुकार इतनी प्रबल हो गई
कि चंडीगढ़ भी दिल्ली से ज्यादा जरूरी लगने लगा!
और अब यदि सरकारी बंगले की सुविधा उपलब्ध हो गई,
तो इसमें आश्चर्य कैसा?
मंत्री ने बंगला समर्पित किया,
नेता ने क्रांति समर्पित की,
कार्यकर्ता ने संगठन समर्पित किया...
बस जनता ने अपना विवेक समर्पित कर दिया! 🤣
यही तो आप मॉडल की सबसे अद्भुत विशेषता है।
कल तक सादगी का उपदेश,
आज सुविधा का औचित्य।
कल तक वीआईपी संस्कृति पर भाषण,
आज सुविधा मिलते ही उसका दार्शनिक विश्लेषण।
कल तक जनता को त्याग सिखाना,
आज खुद त्याग की ऐसी नई परिभाषा गढ़ना
जिसमें बंगला, सुरक्षा, काफिला और आराम सब शामिल हों!
कमाल है!
आम आदमी की राजनीति में आम आदमी ही सबसे ज्यादा आम समझ लिया गया।
जनता से कहा गया था:
“हम व्यवस्था बदलेंगे।”
व्यवस्था बदली या नहीं, यह तो जनता तय करेगी।
लेकिन इतना जरूर दिखा कि
सादगी की परिभाषा, त्याग का अर्थ और ईमानदारी का पैमाना
हर सुविधा के साथ थोड़ा-थोड़ा अपडेट होता गया। 😏