लाखों दर्शकों से कहता हूँ, जाकर कोई फैक्ट-चेक करे। 1896 के कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम् गाया गया, जिसकी अध्यक्षता मुस्लिम नेता रहमतुल्लाह अहमद सयानी ने की।
वहाँ से लेकर 1923 तक कभी कोई आपत्ति नहीं हुई। 1923 के अधिवेशन में तो उस समय मोहम्मद अली जौहर ने उसकी अध्यक्षता की थी उन्होंने आपत्ति की फिर भी पूरा गाया। झूठ बोलते हैं ये लोग।
मैं पूछना चाहता हूँ, 1896 से 1937 तक हर बार कांग्रेस पूरा गा रही थी, तो 1937 में क्या हुआ जो काट दिया?
मुस्लिम लीग और जिन्ना ने कहा कि आपको यह वंदे मातरम् काटना पड़ेगा, आप एक के बाद एक सरेंडर कर रहे थे। 1905 में बंग-भंग के बाद उस समय सारे हिंदू-मुसलमान एक होकर वंदे मातरम् गाते थे, मगर ये कट्टरपंथियों के आगे झुक गए।
1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र माँग लिया। फिर उनकी हिम्मत और बढ़ी।
फिर 1920 में इन्होंने कहा,
टर्की का खलीफा हट गया है, तो अब हम टर्की के खलीफा के लिए आंदोलन करेंगे और महात्मा गांधी ने अली का समर्थन किया।
उनकी हिम्मत और बढ़ गई। उसके बाद जिन्ना ने कहा, मैं महात्मा गांधी को महात्मा नहीं बोलूँगा। इसलिए हर फिल्म में मिस्टर गांधी बोलता है।
फिर उसने कहा, मैं वंदे मातरम् नहीं गाऊँगा और मैं इनको बताना चाहता हूँ, कोई दर्शक जाकर चेक करे।
6 अप्रैल 1938 को नेहरू को जिन्ना ने एक लेटर लिखा और Selected Works of Jawaharlal Nehru, Series One, Volume 22, Page Number 230 से 239 में लिखा है। क्या शर्मनाक लेटर लिखा है। लिखते हैं, हमने वंदे मातरम् हटा दिया है। पॉइंट नंबर नौ पर। फिर उसके बाद लिखते हैं, पॉइंट नंबर 12 पर, अगर आपको तिरंगे से आपत्ति है, तो हम मुस्लिम लीग के भी झंडे को बराबर सम्मान देने को तैयार हैं। और पॉइंट नंबर सात पर लिखते हैं, मुसलमानों को सरेआम गोहत्या करने का अधिकार होगा। क्या गजब का सरेंडर किया नेहरू ने।
इस सूअर समद कुरैशी हिंदू लड़कियों को फंसाने के लिए 30–40 हजार रुपये तक लेता था। बजरंग दल ने उसे पकड़ा है।
हिंदू समाज को अपनी बेटियों और बहनों को जागरूक करना होगा। इन दरिंदो से सतर्क रहें, जागरूक रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत परिवार को दे
अगर वंदे मातरम् में देवी का नाम आने से उसे गाना मुस्लिमों की आस्था के खिलाफ है…
तो क्या उस देवी का नाम हटवा देना हिंदुओं की आस्था के खिलाफ नहीं है?
ये किस तरह का Secularism?
कल कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति ने एक आश्चर्यजनक और देशविरोधी फैसला लिया है। उन्होंने अपनी पार्टी के 1937 के Resolution को फॉलो करते हुए महान वंदे मातरम् गीत के दो ही छंद गाने का फैसला लिया है।
मैं पूरे देश को याद दिलाना चाहता हूं, 1937 में कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम् के दो टुकड़े कर देश के विभाजन की नींव डाली थी और वहीं से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को ताकत मिली थी। अंततोगत्वा देश का विभाजन हुआ और पाकिस्तान का जन्म हुआ।
आज जब उस ऐतिहासिक गलती को वंदे मातरम् गीत के प्राकट्य के 150वें साल में सुधार कर बंकिम बाबू की इस अमर कृति को पूरा गीत गाकर राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया है, और सभी सरकारी कार्यक्रमों में इसे पूर्ण रूप से गाने का निर्णय किया गया है और इस निर्णय को कानूनी जामा भी पहनाया गया है।
इसी की अवहेलना करने का निर्णय कांग्रेस ने कल किया है। कांग्रेस का यह निर्णय केवल और केवल इनकी घोर तुष्टिकरण की नीति की पुष्टि करता है। वोट बैंक के लिए इन्होंने न सिर्फ बंकिम बाबू की इस अमर कृति का अपमान किया, बल्कि उन लाखों शहीदों का भी अपमान किया, जो वंदे मातरम् का नारा लगाते हुए देश की आजादी के लिए फांसी पर चढ़ गए।
आज कांग्रेस पार्टी 1937 के अपनी पार्टी के Resolution को मान रही है और पार्लियामेंट के एक्ट को नकार रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी फिर एक बार तुष्टिकरण की राजनीति को पुरजोर तरीके से आगे बढ़ा रही है।
गृहमंत्री श्री @AmitShah
*मोदी जी से अनुरोध है*
*नेहरू का शांतिवन मेमोरियल*
*52 एकड़ में बना है*
*इंदिरा गांधी का शक्ति स्थल*
*45 एकड़ में बना है*
*राजीव गांधी का वीर भूमि*
*15 एकड़ में बना है*
*इन सबको तुरंत तोड़कर*
*अस्पताल और सरकारी स्कूल बनवाने की कृपा करें*
@epanchjanya हो सकता है ये पेपर लीक जानबूझ
कर किया गया हो।
ताकि छात्रों को भड़का कर देश जलाया
जा सके। इस साजिश की पूरी जांच
होनी चाहिए । बेशक NIA को भी
लगाया जाय जांच में।
झारखंड पीजीटी भर्ती परीक्षा में 300 में से 299.175 नंबर लाने वाले एक उम्मीदवार का फिर भी सिलेक्शन नहीं हुआ।
झारखंड सरकार ये बताए कि अगर 299.175 नंबर काफी नहीं हैं, तो सिलेक्शन के लिए क्या करना होगा?
कॉकरोचों के धरने में शामिल इन दो महिलाओं से मिलिए।मिलिए
1. "नाम रहेगा अल्ला का" बोलने वाली नंदिता नारायण w/o रशीद अंसारी
2. गार्गी रावत, एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार w/o यूसुफ अंसारी।
दोनों हामिद अंसारी के रिश्तेदार।
नाम हिंदू ही रखा है ताकि भ्रम बना रहे।
प्रिय भारतवासियों,
आपकी इतिहास की किताबों में वर्षों तक मुगल शासकों का महिमामंडन किया गया था।
जब धर्मेंद्र प्रधान ने NCERT की पुस्तकों से उन विदेशी आक्रमणकारियों का महिमामंडन करने वाले हिस्सों को हटाया, तब से ही विदेशों में बैठी ताकतवर लॉबी लगातार उन्हें निशाना बना रही थी।
इसलिए धर्मेंद्र प्रधान के योगदान को कभी मत भूलिए।
: रेनी लेन, अमेरिकी लेखक