वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र के होनहार युवा सागर मेनारिया (मेनार), कुलदीप सिंह राठौड़ (खेरोदा), चिराग जणवा (अमरपुरा, भींडर) एवं पुष्कर गाडरी (करणपुर) द्वारा भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर पूरे क्षेत्र के लिए गर्व, सम्मान और प्रेरणा का विषय है
जननायक, युवाओं की आवाज़ और देश के करोड़ों लोगों की उम्मीद, नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
#HappyBirthdayRahulGandhi@RahulGandhi
कोटा, आप कमाल थे।
यकीन मानिए, कल हमने मिलकर इतिहास की शुरुआत की।
हज़ारों छात्र मैदान में थे, लाखों लोगों ने ऑनलाइन देखा - और देश को पहली बार खुलकर पता चला कि शिक्षा के नाम पर कितनी बड़ी वसूली चल रही है।
लेकिन यह तो सिर्फ़ शुरुआत है। कोटा में जो लौ जली है, उसे अब पूरे देश में बदलाव की मशाल बनाना है। और इस सफ़र में आपकी जगह तय है।
अपने सुझाव भेजिए। Petition पर अभी Sign कीजिए।
#ChhatronKiGoonj
आज कोटा की ऐतिहासिक धरती से युवाओं का भविष्य बचाने के लिए #छात्रों_की_गूंज महारैली के रूप में एक नई क्रांति की शुरुआत हुई है।
तमाम अड़चनों के बावजूद उमड़े हज़ारों छात्रों, युवाओं और अभिभावकों के बीच हमारे नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi ने शिक्षा व्यवस्था की कमियों, पेपर लीक और व्यवस्थागत विफलताओं पर खुलकर संवाद किया।
यह कोई राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि उन लाखों नौजवानों की बुलंद आवाज़ थी जो सरकारी सिस्टम की मार झेल रहे हैं। राहुल गांधी जी ने युवाओं को भरोसा दिलाया है कि उनके हक की यह लड़ाई अब थमने वाली नहीं है।
कोटा में प्रशासन द्वारा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi के कार्यक्रम के होर्डिंग हटाए जा रहे हैं। भाजपा के कार्यक्रमों के जब होर्डिंग लगते हैं तब यह प्रशासन पूरा सहयोग देता है। कांग्रेस के कार्यक्रम के होर्डिंग हटाना घबराई हुई भाजपा का राजनीतिक षड्यंत्र है।
पहले कोचिंग संस्थानों को धमकियाँ, फिर छात्रों पर दबाव, और अब होर्डिंग हटाना, भाजपा इतनी भयभीत क्यों है?
छात्रों की आवाज़ होर्डिंग हटाने से नहीं दबेगी। इस तानाशाही के कारण ही कल 17 जून को कोटा में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
देश के हर युवा से मेरी एक बात - आज इस देश में मेहनत का फल नहीं, सपने देखने की सज़ा मिलती है।
हर पेपर लीक, हर रद्द परीक्षा, हर अधूरी भर्ती - सिर्फ़ सिस्टम की विफलता नहीं, लाखों सपनों पर प्रहार है।
मैं जानता हूँ आप थक चुके हैं। ग़ुस्से में हैं। पर याद रखिए - जब सरकार सुनने को तैयार न हो, तब आवाज़ ऊँची करनी पड़ती है।
इसलिए मैं आप सबको बुला रहा हूँ - 17 जून, कोटा। छात्रों की गूंज।
आइए, मिलकर एक ऐसी हुंकार बनें जिसे अनसुना करना नामुमकिन हो। कोटा से शुरुआत - फिर देश के हर कोने तक।
ये आपके भविष्य की लड़ाई है। और मैं आपके साथ हूँ।
🗓️ 17 जून | छात्रों की गूंज | कोटा महारैली
#ChhatronKiGoonj
सुश्री मीनाक्षी नटराजन जी के राज्यसभा नामांकन को ग़लत तरीक़े से रद्द किए जाने के विरोध में जंतर मंतर नई दिल्ली में आयोजित “सत्याग्रह” में देश के विभिन्न राज्यों से आए सर्वोदय विचार के साथियों के साथ संघर्ष में हिस्सेदारी की !
मीनाक्षी दीदी का नामांकन रद्द होना यह बताता है कि भारत में संसदीय लोकतंत्र अब समाप्त हो चुका है !
भाजपा मोदी क़ब्ज़े की राजनीति कर रहे हैं !
भारत की आज़ादी का नया दौर शुरू होने वाला है !
पहले अंग्रेजों से लड़े थे अब संघियों से लड़ कर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करेंगे !
महिला शिक्षा में देश की अग्रणी और सबसे पुरानी संस्था “वनस्थली विद्यापीठ” में छत्तीसगढ़ के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री दीपक बैज जी के साथ निरीक्षण करने का अवसर मिला !
महात्मा गाँधी के सिद्धांतों ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भर समाज ख़ासकर महिलाओं के लिए समर्पित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है !
25 सितंबर के घटनाक्रम को लेकर किए गए दुष्प्रचार के संबंध में:
आज मुझे सब कुछ मिल गया, मैं अति संतुष्ट पॉलिटिशियन हूँ देश का। अब मैं पद के पीछे नहीं हूँ। कोई पद ज़बरदस्ती आकर मुझपर पड़ जाए तो अलग बात है देखो। मैं कोई पद के लिए नहीं हूँ कि पद के लिए मैं ये करूँ, वो करूँ, कुछ नहीं करना मुझे।
तीन-तीन बार मुख्यमंत्री कम नहीं होता देखो। ये तो हमारे नेता लोग समझ नहीं पा रहे हैं मेरी भावनाओं को। मैंने कहा लाइन मेरे से बड़ी खींचो तुम। मेरी लाइन तुम मिटाओ मत, मेरे से बड़ी लाइन खींचो। कौन मुख्यमंत्री बनेगा, नहीं बनेगा, किसी को नहीं मालूम। हम चाहते हैं कि सब मिलकर चलते रहो, चलते रहो। अभी संकट जो मैं कह रहा हूँ देश संकट में है, तो क्यों नहीं तुम आगे आ-आकर के हम सब मिलकर देश की रक्षा करें? कांग्रेस का औरा जो राजस्थान में है, हिंदुस्तान में वो हमें महसूस है, दिल्ली में रैली होती है सबसे अधिक लोग राजस्थान से जाते हैं। हाईकमान इस बात को जानता है। 20-25 साल से मैं देख रहा हूँ। इसलिए कृपा करके सब मतभेद भूलो, सब एक हो जाओ।
और इस मीडिया वालों को, मेजर क्या वो मीडिया जो मुख्य मीडिया है वो मीडिया जो आपका क्या कहलाता है, गोदी मीडिया। अब गोदी मीडिया का गोदी हटे ये उन मीडिया वालों से चाहिए कि अब गोदी हटवा दें वो अपना। वो तब हटवा पाएँगे जब ईमानदारी के साथ में सामाजिक सरोकार रखेंगे, देश हित में बात करेंगे, और सरकार के दबाव में नहीं आएँगे तो जाकर के ये तमगा गोदी मीडिया का हटेगा।
और सोशल मीडिया में मैं कहना चाहूँगा कृपा करके आप सच्चाई पे चलो, और आप सचिन पायलट को नुकसान मत करो। बहुत नुकसान कर चुके हो, बहुत नुकसान कर चुके हो। इतना नुकसान कर दिया आप कल्पना नहीं कर सकते, मैं बराबर सुनता रहता हूँ उनको। अब मैं कहता हूँ अब किसको जाके मैं कहूँ? किसको जाके कहूँ? कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता है और कमेंट कर देते हैं हम लोगों पर।
कुछ एबीसीडी पता नहीं उनको, और रिवोल्ट हो गया, रिवोल्ट हो गया। अरे, रिवोल्ट कैसे हो गया? अगर 100 लोगों ने कहा कि हमने साथ दिया हाईकमान का, सरकार हमने बचाई है। हम में से किसी को भी बना देते मुख्यमंत्री, क्या गलत कहा उन्होंने? क्या गलत कहा उन्होंने? और उसको रिवोल्ट बता रहे हैं वो हाईकमान के खिलाफ है, पर मैंने माफी माँगी सोनिया गांधी से फिर भी, मैं उस वक्त विधायक दल का नेता था।
मैं नेता था विधायक दल का, मुझे तीन बार बिना माँगे हुए सोनिया गांधी ने मुझे मुख्यमंत्री पद दिया। 1998 के अंदर, 2008 में सेकंड टाइम मुख्यमंत्री बनाया मुझे सोनिया जी ने, थर्ड टाइम तो मैं 21 पे आया हुआ था। 2013 में मैं 21 पे आया हुआ था, तभी तीसरी बार राहुल गांधी जी ने, सोनिया जी ने, प्रियंका जी ने मिलकर मुख्यमंत्री बनाया।
मैं कांग्रेस प्रेसिडेंट बन रहा था, मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मैं पढ़ा-लिखा भी हूँ। ये क्यों भ्रम है मीडिया वालों को? और अनपढ़ आदमी होता तो फिर भी कह देते वो। अनपढ़ कामराज जी थे, तब भी कांग्रेस प्रेसिडेंट थे देश के। मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मुझे पता है कांग्रेस प्रेसिडेंट का पद जहाँ गांधी जी अध्यक्ष रहे हों, पंडित नेहरू रहे हों, मोतीलाल नेहरू रहे हों, कौन नहीं रहा? सरदार पटेल रहे हों, उस कांग्रेस प्रेसिडेंट मुझे बना रही हैं सोनिया गांधी और कांग्रेस, तो मैं मना करूँगा? मैं मना करूँगा?
वो तो स्थिति ऐसी बना दी, वो भी एक कॉन्सपिरेसी थी मेरे ख्याल से। मुझे लगता है वो एक बड़ी कॉन्सपिरेसी हुई। अचानक ही ऑब्ज़र्वर आ गए, अचानक ही तमाशा हो गया, बदनाम मैं हो गया।
हिंदुस्तान में लोग समझते हैं अशोक गहलोत जो है, उसको मुख्यमंत्री रहना था, कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना था, इसलिए रिवोल्ट हुआ। मुझसे कितने नज़दीक आदमी भी देश में हैं, कितने नज़दीक मेरा खुद का मिलने वाला हो, उसके दिमाग में यही बात है कि भाई, अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री रहना था इसलिए रिवोल्ट करवा दिया। अब मैं उनको कैसे समझाऊँ? आज मैं समझा रहा हूँ आपको। अब भी कुछ भला मेरा हो जाए तो आप लोग भला करना, जो मैं बता रहा हूँ आपको। पूरा मुल्क जानता है कि मुझे मुख्यमंत्री रहना था मैंने रिवोल्ट करवा दिया, और वही मैं मीडिया की बात करूँगा।
जिस मीडिया ने बातें फैलाई थी, मैं चुप रहा, और चुप भी मैं इसलिए रहा मुझे सोनिया जी को बताना था कि चाहे ये पायलट के खिलाफ रिवोल्ट था या क्या था, मुझे मतलब नहीं है। आज मैं आया हूँ सिर्फ इसलिए कि मैंने जो है, मैं नेता था विधायक दल का। ऑब्ज़र्वर आए हुए थे एआईसीसी के, एआईसीसी ऑब्ज़र्वर के मायने होते हैं। चाहे वो खड़गे साहब थे चाहे अजय माकन जी थे, और मैं प्रस्ताव पास नहीं करवा पाया।
हालाँकि, मैंने रात को कहा था कि आप अभी इस मीटिंग को बंद करते हैं, कल वापस मीटिंग बुलाकर के अपन बात करेंगे। वो स्थिति बनी नहीं हमारी, इसलिए वो इसलिए जो है, वो नहीं हो पाया प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। मैंने जाके सॉरी फील किया मैडम के सामने कि मैं विधायक दल का नेता था। मुझे सब कुछ पार्टी ने दिया है, उसके बाद में भी ये स्थिति बन गई तो मैं माफ़ी चाहता हूँ। ये बात थी।
आज बामनवास विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ मोहनपुर गांव में शोषितों, वंचितों और महिलाओं की शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले महात्मा ज्योतिबा फुले जी एवं माता सावित्रीबाई फुले जी की मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में भाग लिया।
महान समाज सुधारकों के विचार और आदर्श आज भी हमारे मार्गदर्शक हैं।
पंचायत चुनाव तथा अब OTS पर बनने वाले पुल को लेकर कोर्ट के फैसले संबंधी सवाल का जवाब :
अब उसके बारे में क्या कमेंट करें। सरकार को समझ में आ नहीं रहा है। सरकारें बदली कई बार हैं, हम आए हैं वापस सरकार के अंदर। दो बार वसुंधरा जी थीं, वापस हम लोग आए। पहले भैरोंसिंह शेखावत थे तब भी हमने सरकार बनाई। भारी बहुमत से बनाई, उस वक्त 156 लोग आए कांग्रेस के और 32 पर रह गई भैरोंसिंह जी की सरकार। तब भी हमने तीनों सरकारों के वक्त में कोई उनके फैसले नहीं बदले। रिव्यू किया होगा छह महीने के लिए, समाप्त कर दिया।
और इस सरकार ने बड़े-बड़े प्रोजेक्ट रोक रखे हैं। बल्कि उद्घाटन भी नहीं कर रहे हैं। मुझे तो आश्चर्य होता है मैंने खुद ने मुख्यमंत्री जी से अभी मेरी चर्चा हुई, टेलीफोन पर बातचीत हुई थी बर्थडे पर। मैंने उनको रिक्वेस्ट की, जोधपुर का उदाहरण दिया। मैंने कहा छह प्रोजेक्ट बने पड़े हैं वहां पर। आप खुद जाइए, जाकर उद्घाटन कर दीजिए उनका। क्यों नहीं कर रहे हैं? अस्पतालों की बिल्डिंग बनी पड़ी है वहां पर। स्पोर्ट्स का इंस्टीट्यूट खड़ा है, न कोच है ना इक्विपमेंट है। अस्पताल की बिल्डिंग शानदार बन गई है। वहां ना इक्विपमेंट है ना डॉक्टर हैं। लाइब्रेरी की बिल्डिंग पड़ी हुई है, ना बुक्स ला रहे हैं वहां पर ना शिफ्ट कर रहे हैं। तो चारों ओर जो है ये समझ के परे है कि सरकार में हो क्या गया है।
इस सरकार को कौन चला रहा है, ये समझ के परे है हमारे तो। सरकार चला कौन रहा है? बीजेपी चला रही है? इनकी पार्टी चला रही है? गाइड कौन कर रहा है मुख्यमंत्री जी को? या आरएसएस चला रही है राजस्थान की? या फिर जो लोगों में कहावत बन गई है कि साहब दिल्ली से आता है मैसेज तब फैसले होते हैं। फैसले दिल्ली में होते हैं और इम्पलिमेंट भी फिर ये पूरा कर नहीं पाते स्टेट गवर्नमेंट। ये भी शिकायतें इनकी हैं।
मुख्यमंत्री जी लकी हैं जिंदगी के अंदर, पहली बार एमएलए बनके आप मुख्यमंत्री बन गए। हमारी शुभकामनाएं उनके साथ में हैं। बार-बार मैं कहता हूं। वो शुभकामनाएं तो स्वीकार करते नहीं हैं और मैं शिकायत करता हूं उस पर वो आलोचना करते रहते हैं। दोनों साथ-साथ करो। हमारी शुभकामनाएं भी लो, हमारे सुझाव भी लो और उनको स्वीकार भी करो और साथ में अगर हमने कोई गलत बात कही है उनको, उसकी आलोचना वापस करो, हमें कोई ऐतराज नहीं है। पर यहां तो एकतरफा मामला चल रहा है।
तकलीफ राजस्थान वासियों को है। किसी भी गांव में चले जाओ, मेरा चैलेंज मैं देता हूं सबको, मैंने मीडिया वालों को भी कहा आप जाइए, हम आपका इंतजाम करेंगे जाने का। राजस्थान के करीब-करीब सभी गांव में आपको एक सी बातें मिलेंगी जो अभी आप सुन रहे थे बाहर जो गांव का आदमी आया हुआ था बाप, फलोदी का वो क्या-क्या बोल रहा था। आप चाहो तो चला सकते हो उसको मीडिया के अंदर, मालूम पड़ जाए पब्लिक को। एक अचानक आ गया लड़का गांव का अभी, पांच-छह लोग आए थे। ठेठ फलोदी जो बॉर्डर पर है हमारे, जहां अकाल सूखे तो सदियों से पड़ते गए थे। वहां का लड़का क्या बोल रहा था, गांव में क्या स्थिति है। तो स्थिति बड़ी नाजुक है। ये मैं कह सकता हूं।