खुद को नास्तिक मानते है केजरीवाल, श्री राम मंदिर बनने के समय अपनी दादी का बहाना बना कर कहा था कि कभी किसी ऐसे मंदिर में नहीं जाएंगे जो किसी मस्जिद को गिरा बनाया गया हो
ऐसा कालनेमी आज रामभक्त बना है
वह रहस्यमयी गुफा जहाँ आज भी शिवजी माँ गौरी तपस्या करते हैं
हिमालय. देवभूमि. यहाँ कंकड़-कंकड़ में शंकर है. पर कुछ जगहें ऐसी हैं जहाँ समय थम जाता है. जहाँ कहा जाता है: कैलाश के स्वामी और गिरिजा, शिव और पार्वती, आज भी तप में लीन हैं.
कौन सी है वह रहस्यमयी गुफा? एक नहीं, तीन नाम सबसे ज्यादा आते हैं: 1. अमरनाथ गुफा, 2. पाताल भुवनेश्वर गुफा, और 3. रुद्रप्रयाग की कोटेश्वर गुफा. पर लोक-श्रुति एक और गुप्त गुफा की बात करती है: "सिद्ध गुफा". जो नक्शे पर नहीं, निष्ठा पर है.
यह कथा पुराण, तंत्र, लोक-गाथा और साधुओं के अनुभव से बुनी गई है. 5000 शब्दों में उस रहस्य को खोलते हैं.
1. अमरनाथ: जहाँ शिव ने पार���वती को अमर-कथा सुनाई
1.1 कथा का बीज
शिव पुराण कहता है: पार्वती ने पूछा "प्रभु, आप अजर-अमर हैं. मैं क्यों बार-बार जन्म लेती हूँ? मुझे अमरत्व का रहस्य बताइए."
शिव ने कहा: "यह कथा गुप्त है. इसे सुनने वाला अमर हो जाए. इसलिए एकांत चाहिए."
शिव ने नंदी को पहलगाम में छोड़ा. चंद्रमा को चंदनवाड़ी में. सर्पों को शेषनाग झील पर. गणों को महागुनस टॉप पर. पाँच तत्वों को पंचतरणी पर. खुद पार्वती को लेकर अमरनाथ गुफा पहुँचे.
1.2 आज भी तप क्यों?
मान्यता है: अमर-कथा सुनाते समय शिव समाधि में चले गए. पार्वती सुनते-सुनते सो गईं. पर दो कबूतरों के जोड़े ने पूरी कथा सुन ली. वे अमर हो गए. आज भी गुफा में कबूतरों का जोड़ा दिखता है.
साधु कहते हैं: शिव ने कथा अधूरी नहीं छोड़ी. जब भी कोई सच्चा भक्त गुफा में पहुँचता है, शिव-पार्वती सूक्ष्म रूप में कथा पूरी करते हैं. इसलिए सावन में बर्फ का शिवलिंग खुद बनता है. वह "तप की ��र्जा" का घनीभूत रूप है.
वैज्ञानिक मत: गुफा में पानी टपकता है. तापमान शून्य. बूंद जमकर लिंग बनती है. पर सवाल है: वही आकार, वही समय, वही जगह हर साल कैसे? विज्ञान "कैसे" बताता है, आस्था "क्यों" बताती है.
रहस्य: अमरनाथ के मुख्य शिवलिंग के पास दो छोटे हिम-लिंग बनते हैं. कहते हैं वे पार्वती और गणेश हैं. यानी परिवार सहित तप. गुफा के अंदर आज भी घंटी-डमरू की आवाज सुनाई देती है, जब कोई नहीं होता. ITBP के जवान इसकी ग���ाही देते हैं.
2. पाताल भुवनेश्वर: पाताल में बसा कैलाश
2.1 गुफा का स्वरूप
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में. जमीन से 90 फीट नीचे. 160 मीटर लंबी चूना-पत्थर की गुफा. अंदर केदारनाथ, बद्रीनाथ, अमरनाथ सबके प्राकृतिक विग्रह हैं.
स्कंद पुराण के मानस खंड में वर्णन है. आदि शंकराचार्य ने 1191 ई. में इसे खोजा.
2.2 यहाँ तप क्यों?
कथा है: त्रेता युग में ऋतुपर्ण राजा यहाँ शिकार खेलते आए. थककर स��� गए. स्वप्न में शिव आए: "इस पहाड़ के नीचे मेरा गुप्त धाम है."
राजा ने खुदाई करवाई. गुफा निकली. अंदर गणेश का कटा सिर था. शेषनाग की आकृति थी जो पृथ्वी को थामे है. चारों युगों के हवन-कुंड थे.
पंडित कहते हैं: कलियुग का कुंड अब भरने वाला है. जब भर जाएगा, कलियुग खत्म.
रहस्य: गुफा के अंत में एक बंद द्वार है. कहते हैं उसके पीछे शिव-पार्वती सूक्ष्म रूप में तप कर रहे हैं. द्वार पर पहरेदार हैं: काल भैरव.
गुफा में "शिव जटा" है. पत्थर से पानी रिसता है. वह गंगा है. नीचे "कामधेनु" के थन बने हैं. दूध टपकता है.
साधुओं का अनुभव: यहाँ 10 मिनट बैठो तो 1 घंटे का ध्यान लग जाता है. समय धीमा हो जाता है. वैज्ञानिक कहते हैं: गुफा में ऑक्सीजन कम, कार्बन डाईऑक्साइड ज्यादा. मस्तिष्क अल्फा स्टेट में चला जाता है. पर भक्त कहते हैं: यह शिव की श्वास है.
3. कोटेश्वर गुफा: जहाँ भस्मासुर से बचने शिव छिपे
3.1 कथा
भस्मासुर ने शिव से वरदान माँगा: जिसके ��िर पर हाथ रखूँ, वह भस्म. वर पाकर शिव के पीछे भागा.
शिव भागते-भागते अलकनंदा किनारे रुद्रप्रयाग की गुफा में छिपे. पार्वती भी साथ थीं. विष्णु ने मोहिनी रूप धरकर भस्मासुर को नचाया. भस्मासुर ने खुद का सिर छुआ, भस्म हो गया.
3.2 आज भी तप?
मान्यता है: उस संकट के बाद शिव ने कहा: "यह गुफा मेरा रक्षक घर है. कलियुग में जब अधर्म बढ़ेगा, मैं-पार्वती यहाँ आकर योजना बनाएँगे."
कोटेश्वर गुफा में शिवलिंग प्राकृतिक ह���. लगातार जल गिरता है. पुजारी बताते हैं: रात 12 बजे के बाद गुफा में किसी को रुकने नहीं देते. क्योंकि "शिव परिवार" आता है. कई बार सुबह गुफा में ताजे फूल, भस्म मिलते हैं.
4. वह "गुप्त सिद्ध गुफा": जो नक्शे पर नहीं
अब आते हैं सबसे रहस्यमयी भाग पर. नाथ पंथ, सिद्ध योगी, और हिमालय के संत एक गुफा की बात करते हैं जिसका नाम नहीं है. उसे "सिद्ध गुफा", "ज्ञान गुफा", "सोम गुफा" कहते हैं.
4.1 कहाँ है?
कोई नहीं जानता. संके�� मिलते हैं:
केदारखंड: केदारनाथ से 3 दिन पैदल उत्तर. बर्फ के बाद गरम पानी का झरना.
शेष कमेंट में...
जब यूनानी आक्रमणकारी सेल्यूक��� को सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने हरा दिया, तो उसने अपनी बहुत ही सुंदर बेटी, हेलेन, की शादी का प्रस्ताव सम्राट चंद्रगुप्त के सामने रखा। हेलेन सेल्यूकस की सबसे छोटी और सबसे सुंदर बेटी थी। शादी का प्रस्ताव मिलने पर, आचार्य चाणक्य ने सम्राट चंद्रगुप्त के साथ उसकी शादी का इंतज़ाम ��र दिया!!
हालाँकि, शादी से पहले, उन्होंने हेलेन और चंद्रगुप्त के लिए कुछ शर्तें रखीं, जो उनके मिलन का आधार बनीं।
पहली शर्त यह थी कि उनके मिलन से होने वाली कोई भी संतान सिंहासन की वारिस नहीं बनेगी।
इसका कारण यह बताया गया कि हेलेन एक विदेशी महिला थी, जिसका भारत के पूर्वजों से कोई संबंध नहीं था और वह भारतीय संस्कृति से पूरी तरह अनजान थी।
दूसरा कारण यह था कि हेलेन विदेशी दुश्मनों की बेटी थी।
उसकी व��़ादारी कभी भी भारत के साथ नहीं हो सकती थी।
तीसरा कारण यह था कि हेलेन का बेटा, एक विदेशी माँ का बेटा होने के नाते, कभी भी उसके प्रभाव से मुक्त नहीं हो सकता था और कभी भी भारतीय धरती और भारतीय लोगों के प्रति पूरी तरह वफ़ादार नहीं हो सकता था।
आचार्य चाणक्य द्वारा रखी गई एक और शर्त यह थी कि हेलेन कभी भी चंद्रगुप्त के शासन-प्रशासन में दखल नहीं देगी और राजनीति तथा प्रशासनिक सत्ता से पूरी तरह दूर रहेगी��
हालाँकि, घर-परिवार के मामलों में उसे पूरे अधिकार होंगे।
ज़रा सोचिए... भारत में ��र पूरी दुनिया में, आचार्य चाणक्य जैसा कोई दूसरा रणनीतिकार और महान राजनेता कभी हुआ ही नहीं
@Danish_Ansari_9@Yadvkomal ये एक मां है जो अपने बेटे को घोड़ी बैठने से पहले अपने दूध की याद दिला��ी है कि इसकी लाज रखनी है इसको लज्जाना नही है
ये प्रथा है सनातन की जो तुम लोगो मे दूर दूर तक नही है
*ये हैं IAS नियाज खान*
जो कि वैज्ञानिक आधार पर साबित किये गए फैक्ट्स क�� रख रहे हैं👇🏻👇🏻
IAS नियाज ख़ान वो सच कह रहे है जो प्रमाणिक है जो वैज्ञानिक है..👇🏻
*धर्म सिर्फ़ एक है*,
*बाकि सब मज़हब है”*
चाहे जो जाँच करा लीजिए जेनेटिक जीन्स सबके *हिंदू* ही है...🚩
ये स्वीकार कर लीजिए
हमें इतिहास में ये क्यों नही पढ़ाया गया???
शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज के मरने के बाद अपनी बेटी जहाँनारा को अपनी पत्नी बनाया
चलिए जानते है वामपंथी इतिहासकारो ने कैसे हवस के शहंशाह को प्रेम का मसीहा बताया देश के इतिहास में वामपंथी इतिहासकारों ने हवस में डूबे मुगलों को हमेशा महान बताया जिसमे से एक शाहजहाँ को प्रेम की मिसाल के रूप पेश किया जाता रहा है और किया भी क्यों न जाए, आठ हजार औरतों को अपने हरम में रखने वाला अगर किसी एक में ज्यादा रुचि दिखाए तो वो उसका प्यार ही कहा जाएगा।
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