"मेरे कुर्ते का बटन!"
उसकी तमाम नादानियों में से एक
जो आख़िर तक मेरे साथ रह गयी
वो ये थी की -
जब कभी भी वो
बेहद नाराज़
हो जाती थी मुझसे
और
जब बातों के सिलसिले यूँ ही थम जाते थे!
फिर मेरे ना मनाने पर वो गुस्से में
मेरे ‘कुर्ते के सारे बटन’ तोड़ देती थी।
सच्ची बातें कड़वी होती हैं इसलिए नंगा होना अभिशाप है।
शायद सच्चा होना भी।
समाज नंगेपन को ढकना चाहता है,
इसलिए सुंदर कपड़े पहनाता है।
और उसपर सबसे कमाल बात ये कि
ये सच्चाई आपके, मेरे, हर घर की कहानी है
जिससे हम हमेशा आँखें चुराते रहते हैं।
(7/n)