पटना: ''मै कल तक प्रिंसिपल था, आज नहीं हूं...'' PMCH के पूर्व प्रिंसिपल डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा- मेरी कोई गुहार न तो निचले स्तर तक सुना गया, ना मंत्री जी ने सुना. मुझे जो पत्र दिया गया, बिना किसी स्पष्टीकरण के दिया गया है, यह तानाशाही रवैया है. मै प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, प्रत्यय अमृत से गुहार लगता हूं की मेरे साथ न्याय करे.
#PMCH #Bihar #Patna #prabhatkhabar
रिपोर्टिंग ऐसे होती है, शानदार @sarkarprabhat28 जी!
बेचारे कॉकरोच ग़लत व्यक्ति के पल्ले पड़ गए। बेइज्जती हो गई। जवाब नहीं मिला तो 'गोदी मीडिया' कहने लगे।
कई कॉकरोच ही परेशान होकर साइड में चले गए हैं, क्योंकि प्रोटेस्ट को डफली गैंग ने हाईजैक कर लिया है।
Urgent Representation Regarding Cancellation of NEET-UG 2026 and the Need for Accountability, Transparency, and Institutional Reform. A Collective Appeal to Protect Merit, Restore Trust, and Safeguard the Integrity of Medical Education in Bharat
Bharat Mata ki Jai 🇮🇳
2024 NEET Paper Leak
2026 NEET Paper Leak
UGC Rules Debacle
The Most Incompetent Minister and Ministry of Modi Ji’s Government needs total Overhaul
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जिस देश में हर संवेदनशील विषय पर स्वयं प्रधानमंत्री राष्ट्र को सम्बोधित करते हैं या किसी अन्य मंच के जरिए सलाह अथवा आश्वासन दे देते हैं, आश्चर्य की बात है कि वहाँ एक ऐसे प्रकरण पर विभाग का मंत्री एक बयान तक नहीं देता जिससे 22 लाख बच्चे सीधे जुड़े हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया के सामने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। समय अपना ही चुन लेते, लेकिन आज उनका बयान आना चाहिए था। मंत्री को स्वयं आकर छात्रों को आश्वस्त करना चाहिए था। ग़लती स्वीकार करें, कार्रवाई का वादा करें, ऐसी पिछली घटनाओं पर अबतक क्या कार्रवाई हुई इसकी जानकारी दें और छात्रों का उत्साहवर्धन करें - कम से कम इस परिस्थिति में इतना तो वो कर ही सकते थे।
या फिर ये मंत्री PM से भी ऊपर हो गए हैं? अभी-अभी UGC द्वारा विश्वविद्यालय कैम्पसों को जातिवादी संघर्ष का अड्डा बनाने वाले नियम-क़ानून पर इतना हो-हंगामा हुआ। 5 में से 3 राज्य जीतकर भाजपा जश्न मना ही रही थी कि मंत्रीजी के विभाग ने एक बार फिर से रंग में भंग डाल दिया।
इधर परीक्षा रद्द हो रही NEET की, उधर धर्मेंद्र प्रधान 'भारत इंनोवटस 2026' कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे हैं। ये दम्भ का बेशर्म प्रदर्शन है। कैसे होगा इनोवेशन, जब एक अदद परीक्षा तक संचालित नहीं कर पाता है आपका विभाग!
जब मैंने कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान को अपमानित करके (कहा तो मैंने कुछ और ही था) कैबिनेट से निकाला जाना चाहिए, तो कई लोगों को (UGC के कारण मेरे सरकार विरोध में होने से) समस्या हो गई थी।
इस नकारे मंत्री के कार्यकाल में NEET 2026 रद्द हो गई। इनसे पेपर लीक रुक नहीं रहा, DU में सवर्ण सहायक प्रोफेसरों को चिह्नित करके निकाला जा रहा है, VC वामपंथी लेख लिख रहे हैं, नई शिक्षा नीति लागू हो रही है पर पन्नों में ब्राह्मण ब्रिटिश को न्योता दे कर बुलाता दिखाया जा रहा है, NCERT में आज भी डिस्टॉर्टेड इतिहास पढ़ाया जा ही रहा है, फिर यह व्यक्ति क्या एक प्लेस होल्डर मात्र है?
हर 58 मिनट में एक छात्र आत्महत्या करता है। उसका कारण स्ट्रेस है, चिंता है, असफलता है, तंत्र द्वारा उसकी परीक्षा लेना है। निर्धन छात्र पैसे ले कर नए नगर में परीक्षा देने जाता है, प्लेटफार्म पर अख़बार बिछा कर सोता है, सड़क किनारे जल पीकर परीक्षा देता है कि एक दिन परिणाम आने पर उसकी चिन्ताएँ समाप्त हो जाएँगी, पर तंत्र उसे तड़पाता रहता है।
धर्मेंद्र प्रधान एक निकृष्ट और नकारा नेता है, उस से भी गया०बीता मंत्री। ऐसे लोगों को कोई घर का गराज संभालने ने दे, ये देश की शिक्षा घंटा सँभालेगा? @narendramodi जी, यदि UGC के 118 दिन बाद आपकी सरकार ने सवर्णों को औक़ात दिखा दी हो, और आपका ईगो शांत हो गया हो कि क्या उखाड़ लिया, गुजरात निगम और असम-बंगाल चुनाव जीत गए, तो प्लीज़ इस निकम्मे धर्मेंद्र प्रधान को विदा कीजिए।
यदि, चुनाव के आँकड़े ही आपके लिए एक मात्र मोटिवेशन हैं और देश की शिक्षा गर्त में जाते अच्छी लगती है, तो फिर कोई बात नहीं, UP चुनाव के लिए रैलियाँ कीजिए।
NEET 2026 पेपर लीक पर यदि हम शिक्षा मंत्री जी और पूर्व NTA DG सुबोध कुमार सिंह की जातियाँ बता दें तो क्या कॉन्ग्रेसी दलाल कह दिए जाएँगे? पेपर लीक की घटना के बाद उन्हें सस्पेंड नहीं किया, थोड़े दिन हटा कर रखा फिर, इनके रहमोकरम से सुबोध जी छतीसगढ़ चला रहे हैं।
सरकार कुछ नहीं करेगी क्योंकि सरकार चुनाव जीत रही है। वही एक मात्र मापदंड बचा है अब गवर्नेंस का। आपको कट्टर समर्थक बता देंगे कि मोदी जी की लोकप्रियता अखंड और अक्षुण्ण है, इसलिए ये सब बात जो भी कर रहा है वो सोरोस का एजेंट है।
इसके बाद आप कुछ बोल नहीं सकते। नए DG भी कुछ बढ़िया नहीं ही कर रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान जी मंत्रालय चलाने की जगह हर वह कार्य करते हैं जो मंत्री का नहीं है। मोदी जी की कौन सी विवशता है कि इस व्यक्ति को ढोया जा रहा है, समझ में नहीं आता।
पेपर लीक थम नहीं रहा। माफिया को हाई कोर्ट बेल नहीं देती तो सुप्रीम कोर्ट से मिल जाता है। कंपनी ब्लैकलिस्ट होती है, फिर कुछ समय बाद उसे ही काम मिल जाता है, या मालिक नई कंपनी बना कर काम ले लेता है।
आप इस सरकार में अपवाद रूप में ही कभी सुनोगे कि किसी अधिकारी को निलंबित किया गया या निकाला गया। मंत्री तो रहने ही दीजिए। और ये लोग शिक्षा को डिकोलोनाइज़ करने निकले थे। &% हो रहा है डिकोलोनाइज़।
जिस दुबई को सबसे सेफ बोलकर अमीर वहां जाकर प्रॉपर्टी ले लेते थे और लिबरल वहां का गुणगान करते नहीं थकते थे, ईरान के ड्रोन और मिसाइलें दागने के बाद उसी दुबई से लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं।
याद करिए मई 2025 जब पाकिस्तान ने भारत पर 1,000 मिसाइलों से हमला कर दिया था और भारत के डिफेंस सिस्टम ने उसे बड़े ही आसानी से नाकाम कर दिया था। हर मिसाइल को हवा में ही मार गिराया था।
लेकिन कुछ लोगों को हमेशा दूसरों की थाली ज्यादा भरी हुई दिखती है। उन्हें अपने देश की उपलब्धियां, हमारी सरकार के फैसले और हमारी सेनाओं की ताकत नजर नहीं आती।
हिंदुस्तानी मुसलमानों को आज दो रकात नफ़्ल पढ़कर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए कि उसने आपको भारत में पैदा किया।
शुक्रगुज़ार होना कमजोरी नहीं… ईमान की निशानी है।
जब दुनिया के कई हिस्सों में मुसलमान आपस में ही सियासी लड़ाइयों और जंग का शिकार हैं, तब आप यहाँ अमन से रोज़ा रख रहे हैं, नमाज़ पढ़ रहे हैं, ज़कात दे रहे हैं।
आपकी मस्जिदें खुली हैं।
आपका रोज़ा महफ़ूज़ है।
आपकी इबादत पर कोई पहरा नहीं।
ये सब यूँ ही नहीं है।
ये इस मिट्टी की ताकत है। इस लोकतंत्र की ताकत है। इस बहुसंख्यक हिंदू क़ौम की सहनशीलता है।
हर वक़्त शिकायत करने से पहले आईने में देखिए।
जिस थाली में खाते हैं, उसी को कोसना बंद कीजिए।
वतन ने आपको पहचान, अधिकार और सुरक्षा दी है।
भारत आपकी सबसे बड़ी नेमत है।
अल्लाह भारत को सलामत रखे…और हमें भी शुक्रगुज़ार बनाए। आमीन
सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा ❤️
भारत के समुद्री व्यापार की एक बड़ी कमजोरी यह रही कि हमारे 75% कंटेनर का ट्रांसशिपमेंट (एक जहाज से दूसरे में माल उतार-चढ़ाना) कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे विदेशी बंदरगाहों पर होता था।
इससे कई तरह का नुकसान होता था जैसे -
हर कंटेनर पर अतिरिक्त खर्च
ज्यादा समय लगना
जोखिम बढ़ना
हर साल लगभग 1,500-2,200 करोड़ रुपये (करीब $220 मिलियन) विदेश जाते थे।
अब विझिंजम इंटरनेशनल पोर्ट के रूप में (केरल में),इसका समाधान हो गया है। जिसे Adani Group ने बनाया है।
कई प्रमुख कारण हैं जो इसे खास बनाते हैं-
मुख्य अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से सिर्फ 10 नॉटिकल मील (करीब 19 किमी) दूर
पानी की प्राकृतिक गहराई 18-20 मीटर — बड़े जहाज बिना खुदाई के आ सकते हैं
दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज (24,000+ TEU) सीधे यहां रुक सकते हैं
समय, ईंधन और खर्च बहुत कम होता है
इसका शानदार परिणाम ये हुआ
पोर्ट दिसंबर 2024 में शुरू हुआ और अब (जनवरी 2026 तक) कमाल कर रहा है:
पहले साल का लक्ष्य 10 लाख कंटेनर था, लेकिन लगभग 14 लाख हैंडल हो चुके हैं
600+ जहाज आए, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े जहाज शामिल हैं
केरल सरकार ने भी पूरा सहयोग किया, क्योंकि देश की प्रगति सबसे पहले है।
विझिंजम भारत को समुद्री व्यापार में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक व्यापार में मजबूत जगह देने वाला बड़ा कदम है।
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बलात: सीमा पर इतिहास की दहाड़ और प्रकृति का सौंदर्य
मेघालय के पूर्वी खासी जिले में भारत–बांग्लादेश सीमा पर बसा बलात सिर्फ़ एक छोटा शहर नहीं, बल्कि इतिहास और साहस की जीवित गाथा है। चेरापुंजी और मावसिनराम से पहुँचा जाने वाला यह क्षेत्र 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध का अहम केंद्र रहा, जहाँ भारतीय रक्षा बलों ने मुक्ति वाहिनी को प्रशिक्षण दिया। आज बलात अपनी हरी पहाड़ियों, बादलों से ढकी वादियों और सीमावर्ती दृश्यों के कारण उभरता पर्यटन स्थल है। यहाँ इतिहास भी बोलता है और प्रकृति भी।
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