BJP के लोग आदिवासियों को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते है। ये घटिया आदमी @madanrrathore जब तक माफ़ी नहीं माँगता है तब तक इसका विरोध होना चाहिए।
#मदन_राठौड़_माफ़ी_माँगो
मदन राठौड़ का बयान केवल एक व्यक्ति की मूर्खतापूर्ण टिप्पणी नहीं है, यह उस वर्चस्ववादी और सामंती मानसिकता का नग्न प्रदर्शन है, जो सदियों से इस देश के मूल निवासियों आदिवासियों के अस्तित्व को मिटाने और उन्हें अपनी शर्तों पर हांकने का सपना देखती रही है। #मदन_राठौड़_माफी_मांगो
विश्व आदिवासी दिवस पर देश के सभी आदिवासी भाई-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं।
आदिवासी इस देश के पहले मालिक हैं - उनकी ऐतिहासिक संस्कृति भारत की अमूल्य धरोहर है।
जल, जंगल और ज़मीन पर उनके अधिकार के साथ आदिवासी अस्मिता और सम्मान की लड़ाई में हम हमेशा उनके साथ खड़े हैं।
विश्व आदिवासी दिवस के पावन अवसर पर मीणा हाईकोर्ट, नांगल प्यारीवास (दौसा) में आयोजित भव्य समारोह में सम्मिलित होकर हमारी गौरवशाली आदिवासी संस्कृति, परंपरा और इतिहास को नमन किया।1/2
भील प्रदेश की धरती (दक्षिणी राजस्थान) के डूंगरपुर जिला मुख्यालय पर आयोजित 9 अगस्त, विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ।
जय जोहार, जय भील प्रदेश
जोहार साथियों।
संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के आदिवासी समुदाय के अस्तित्व, अधिकारों एवं वर्तमान परिस्थितियों को मजबूती से रखने के उपरांत आज बांसवाड़ा में प्रवेश पर भारत आदिवासी पार्टी, बांसवाड़ा के समस्त पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं समाजजनों द्वारा आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
इस स्वागत कार्यक्रम के दौरान बारी घाटी बॉर्डर, दानपुर, ग्राम पंचायत छोटी सरवन, ग्राम पंचायत कटुंबी, ग्राम पंचायत नापला-नादिया एवं सेमलिया सहित आसपास के ग्रामीणजन भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और आत्मीयता के साथ स्वागत किया।
आप सभी के इस अपार स्नेह, सम्मान एवं समर्थन के लिए हृदय से आभार, जोहार।
आज यह खबर देखकर और सुनकर एक विचार आया जो आपके सामने रखना चाहूंगा।
एक समय था जब दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी समाज को राष्ट्रीय दलों के बड़े नेताओं को माला पहनाने तक का अवसर भी नही मिलता था। उन्हें केवल रैलियों की भीड़ और तालियां बजाने तक सीमित समझा जाता था।
आज वही साधारण आदिवासी भाई राजधानी जयपुर में आमंत्रित किए जा रहे हैं और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी द्वारा उनका माल्यार्पण किया जा रहा है।
यह परिवर्तन अपने आप नही आया है। यह उस राजनीतिक जागरूकता और आत्मसम्मान का परिणाम है, जिसे बाप पार्टी की विचारधारा ने मजबूत किया है। बाप पार्टी ने केवल दक्षिणी राजस्थान की पहचान को ही नही, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के आत्मविश्वास और राजनीतिक महत्व को भी नई पहचान दिलाने का कार्य किया है।
उसी क्रम में कमल-कांग्रेस के नेता भी बाप पार्टी का नाम लेकर अपने शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी राजनीतिक उपस्थिति के साथ नम्बर बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। यह अपने आप में एक बड़ा संकेत है कि बाप पार्टी ने प्रदेश की राजनीति में अपनी एक प्रभावशाली पहचान बनाई है।
@zeerajasthan_@ashokgehlot51@News18Rajasthan@NDTV_Rajasthan@1stIndiaNews@rpbreak
केंद्रीय बजट में शिक्षा मंत्रालय की हिस्सेदारी -
2013-14 में कांग्रेस सरकार - 4.6%
2025-26 में बीजेपी सरकार - 2.5%
आखिरकार ये बढ़ने के बजाय कम क्यों हुए?
सरकार को स्पष्ट करना चाहिए।
जो लोग खुद को बड़ा पत्रकार समझते थे और एकतरफा बात करते थे,
छात्रों ने उनको आयना दिखाने का काम किया है,
ऐसे में अब वो सब अपने आप को पत्रकार बताने में लगे हुए हैं,
अपना काम ईमानदारी से करे तो ये दिन न देखना पड़े,
लेकिन जब आप पक्षपात दिखाएंगे तो जिम्मेदारी भी आपको ही लेनी पड़ेगी।