🚨 सावधान! लव जिहाद का एक नया पैटर्न सामने आ रहा है।
पहले हिंदू बेटी को निशाना बनाया जाता है।
फिर उसे बचाने के लिए आगे आने वाले हिंदू कार्यकर्ताओं को भी उसी प्रकरण में कानूनी मामलों में उलझाने का प्रयास किया जाता है।
यानी बेटी भी गई, और उसे बचाने वाले भी फँसा दिए गए।
सभी हिंदू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेतृत्व को इस बदलती रणनीति को समझना होगा। भावनाओं के साथ-साथ कानूनी तैयारी, तथ्य, साक्ष्य और संगठित कार्यपद्धति भी उतनी ही आवश्यक है।
सजग रहिए। संगठित रहिए। विधिसम्मत रहिए।
#LoveJihad #HinduSociety #StayAlert
@Asharamjiashram जी हां, बापूजी की प्रेरणा से आश्रम द्वारा प्रकाशित Rishi Prasad के माध्यम से वैदिक ज्ञान बच्चे, युवा, वृद्ध सभी आयुवर्ग के लोगों को सहज मे उपलब्ध कराया जा रहा है । #RPGP की Online Quiz मे प्रतिभागी बनने का सुनहरा अवसर Register Now।
औरों को भी प्रेरित करें।
विष्णु गायत्री मंत्र
मंत्र:
ॐ नारायणाय विद्महे
वासुदेवाय धीमहि
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्
अर्थ:
हम नारायण को जानते हैं, वासुदेव का ध्यान
करते हैं,श्री विष्णु हमें सही मार्ग पर प्रेरित करें
रोज़ आठ प्राणायाम कर रहे हैं– बस जानते नहीं हैं।
हम, आप, सभी लोग, जो सोचते हैं कि प्राणायाम करने के लिए अलग से बैठना पड़ता है, साँस रोकनी पड़ती है, कुम्भक करना पड़ता है। पर शास्त्र कहते हैं – ये सब प्राणायाम तुम्हारे शरीर में अपने आप, बिना किसी प्रयत्न के, हर दिन हो रहे हैं।
याख्या में आठ प्राणायामों का वर्णन है – चार प्राण से सम्बन्धित, चार अपान से।
ये सब प्रत्येक के शरीर में प्रतिदिन, हर साँस के साथ, अपने आप हो रहे हैं। बिना किसी गुरु के, बिना किसी साधना के।
पहला – रेचक (प्राण का बाहर जाना)
जब हृदय कमल से प्राण बाहर की ओर जाता है – यह रेचक है। यानी साँस बाहर निकल रही है। यह आपके साथ हर पल हो रहा है। जब आप "हूँ" कहते हो, तो वह साँस बाहर ही जा रही होती है।
दूसरा – पूरक (प्राण का भीतर आना)
हृदय से बाहर निकलते हुए प्राण का प्रत्येक अंग से स्पर्श होना – यह पूरक है। यानी साँस अंदर आ रही है और पूरे शरीर को छू रही है। व्यक्ति का हर अंग, हर कोशिका इसी स्पर्श से जी रही है।
तीसरा – पूरक (अपान का भीतर आना)
बाहर से बिना प्रयत्न के जब वायु लौटती है और हृदयाकाश तक जाती है – यह भी पूरक है। यह वही साँस है जो बाहर जाकर वापस लौटती है – बिना आपके कुछ किए।
चौथा – कुम्भक (प्राण का ठहराव)
जब तक प्राण का उदय नहीं होता, तब तक की अवस्था – कुम्भक है।
यह वह ठहराव है जब साँस न तो अंदर जा रही है, न बाहर। यह क्षण बहुत छोटा है – पर यही सबसे शक्तिशाली है। यही वह द्वार है जहाँ से भैरव प्रकट होता है।
इसी तरह अपान के भी चार भेद हैं – रेचक, पूरक, कुम्भक और एक और रेचक।
इस प्रकार कुल आठ प्राणायाम तुम्हारे शरीर में स्वतः चल रहे हैं। हर इंसान में, हर जानवर में, हर चिड़िया में – बिना किसी प्रयत्न के। प्राणायाम कोई बाहरी क्रिया नहीं है – यह तो जीवन की लय ही है।
विधि – ऐसे पहचानिये इन्हें।
बैठें। रीढ़ सीधी। आँखें बंद। अपनी नाक के आसपास ध्यान लगावें। देखिए – साँस बाहर जा रही है। रुकी। फिर अंदर आ रही है। रुकी। फिर बाहर। बस इतना देखिए। आप कुछ कर नहीं रहे, सिर्फ देख रहे हैं। आपको पता चलेगा – ये सब प्राणायाम पहले से हो रहे हैं। हम बस उनके साक्षी बन रहे हो। यही देखना आपको सब कुछ सिखा देगा। आप समझ जाओगे कि प्राणायाम कोई बाहरी क्रिया नहीं – यह तो आपका स्वभाव ही है। आप स्वयं प्राणायाम हो।
लाभ
आप हर वक़्त प्राणायाम कर रहे हो – यह जान लेने भर से आपकी साँसों में गहराई आ जाती है। बिना प्रयत्न के स्थिर हो जाते हैं। मन शांत होता है, शरीर की थकान उतरती है।
पता चलता है कि जीवन कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि एक लय है – और आप उसी लय का हिस्सा हो।
सबसे बड़ा लाभ – आप यह समझ जाते हो कि मोक्ष के लिए कहीं जाना नहीं है, मोक्ष तो हर साँस के बीच छिपा है।
एक लाइन में सार
"प्राणायाम सीखना नहीं, पहचानना है – क्योंकि आपकी साँस पहले से ही योग कर रही है।"
Some Parliamentary Speeches Make History,
Some Make Headlines…
But The Rare Ones By and Made Even Laugh Nonstop! 😂”
When Discussions Between Lalu Yadav and Mamta Banarjee Made Fun and Atal ji Couldn't stop Laughing
11000 का नकद इनाम और एक साल के लिए ब्लू टिक दूंगा,
कल भाजपा की सटीक सीटों की संख्या बताने वाले को कल शाम 8 बजे दिया जाएगा।
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