A powerful video from Piplantari, Rajasthan
Videos like these give you the “real” purpose of life
Dedicated to Shyam Sunder Paliwal
(Ex-Sarpanch and Padma Shri 2021)
Superfoods are always local. We gave up eating these because its less prestigious. Superfoods are future foods and grow naturally in the same land we live .
#superfood#HealthTips#healthyplanet
The primary function of the abs is not to pull your ribcage and your pelvis together , but to provide stable platform for other muscles to pull form.
#6packs#absexercise#cardio#HealthTips
When a person runs, lifts or kicks without the requisite strength ratio between spine flexor and hip flexor, the hip flexor will arch the lower back - and possibly injure it.
#HealthTips#injury#lowerback
|| औरतें ||
वह औरत पर्स से खुदरा नोट निकाल कर कंडक्टर से अपने घर
जाने का टिकट ले रही है
उसके साथ अभी ज़रा देर पहले बलात्कार हुआ है
उसी बस में एक दूसरी औरत अपनी जैसी ही लाचार उम्र की दो-तीन
औरतों के साथ
प्रोमोशन और महँगाई भत्ते के बारे में बातें कर रही है
उसके दफ़्तर में आज उसके अधिकारी ने फिर मीमो भेजा है
वह औरत जो सुहागन बने रहने के लिए रखे हुए है करवाचौथ का निर्जल व्रत
वह प���ि या सास के हाथों मार दिए जाने से डरी हुई सोती-सोती अचानक चिल्लाती है
एक औरत बालकनी में आधी रात खड़ी हुई इंतज़ार करती है
अपनी जैसी ही असुरक्षित और बेबस किसी दूसरी औरत के घर से लौटने वाले अपने शराबी पति का
संदेह, असुरक्षा और डर से घिरी एक औरत अपने पिटने से पहले
बहुत महीन आवाज़ में पूछती है पति से—
कहाँ ख़र्च हो गए ��पके पर्स में से तनख़्वाह के आधे से ज़्यादा रुपए?
एक औरत अपने बच्चे को नहलाते हुए यों ही रोने लगती है फूट-फूटकर
और चूमती है उसे पागल जैसी बार-बार
उसके भविष्य में अपने लिए कोई गुफा या कोई शरण खोजती हुई
एक औरत के हाथ जल गए हैं तवे में
एक के ऊपर तेल गिर गया है कड़ाही का खौलता हुआ
अस्पताल में हज़ार प्रतिशत जली हुई औरत का कोयला दर्ज कराता है
अपना मृत्यु-पूर्व बयान कि उसे नहीं जलाया किसी ने
उसके अलावा बाक़ी हर कोई है निर्दोष
ग़लती से उसके ही हाथों फूट गई क़िस्मत और फट गया स्टोव्ह
एक औरत नाक से बहता ख़ून पोंछती हुई बोलती है
क़सम खाती हूँ, मेरे अतीत में कहीं नहीं था प्यार
वहाँ था एक पवित्र, शताब्दियों लंबा, आग जैसा धधकता सन्नाटा
जिसमें सिंक रही थी सिर्फ़ आपकी ख़ातिर मेरी देह
एक औरत का चेहरा संगमरमर जैसा सफ़ेद है
उसने किसी से कह डाला है अपना दुख या उससे खो गया है कोई ज़ेवर
एक सीलिंग की कड़ी में बाँध रही है अपना दुपट्टा
उसके प्रेमी ने सार्वजनिक कर दिए हैं उसके फोटो और पत्र
एक औरत फोन पकड़ कर रोती है
एक अपने आपसे बोलती है और किसी हिस्टीरीया में बाहर सड़क पर
निकल जाती है
बिना बाल काढ़े बिना किन्हीं कपड़ों के
कुछ औरते��� बस अड्डे या प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ी हैं यह पूछती हुई
कि उन्हें किस गाड़ी में बैठना है और कहाँ जाना है इस संसार में
एक औरत हार कर कहती है—तुम जो जी आए, कर लो मेरे साथ
बस मुझे किसी तरह जी लेने दो
एक पाई गाई है मरी हुई बिल्कुल तड़के शहर के सी पार्क में
और उसके शव के पास बैठा रो रहा है उसका डेढ़ साल का बेटा
उसके झोले में मिलती है दूध की ख़ाली बोतल, प्लास्टिक का छोटा-सा गिलास
और एक लाल-हरी गेंद जिसे हिलाने से आज भी आती है घुनघुने जैसी आवाज़
एक औरत जो तेज़ाब से जल गई है ख़ुश है कि बच गई है उसकी दाईं आँख
एक औरत तंदूर में जलती हुई अपनी उँगलियाँ धीरे से हिलाती है
जानने के लिए कि बाहर कितना अँधेरा है
एक पोंचा लगा रही है
एक बर्तन माँज रही है
एक कपड़े पछींट रही है
एक बच्चे को बोरे पर सुलाकर सड़क पर रोड़े बिछा रही है
एक फ़र्श धो रही है और देख रही है राष्ट्रीय चैनल पर फ़ैशन परेड
एक पढ़ रही है न्यूज़ कि संसद में बढ़ाई जाएगी उनकी तादाद
एक औरत का कलेजा जो छिटक कर बोरे से बाहर गिर गया है
कहता है—मुझे फेंक कर किसी नाले में जल्दी लौट आना,
बच्चों को स्कूल जाने के लिए जगाना है
नाश्ता उन्हें ज़रूर दे देना, आटा मैं गूँथ आई थी
राजधानी के पुल��स थाने के गेट पर एक-दूसरे को छूती हुईं
ज़मीन पर बैठी हैं दो औरतें बिल्कुल चुपचाप
लेकिन समूचे ब्रह्मांड में गूजता है उनका हाहाकार
हज़ारों-लाखों छुपती हैं गर्भ के अँधेरे में
इस दुनिया में जन्म लेने से इंकार करती हुई
वहाँ भी खोज लेती हैं उन्हें भेदिया ध्वनि तरंगें
वहाँ भी, भ्रूण में उरती है हत्यारी कटार।
---उदय प्रकाश
Life me regrets leke nahin marna. Ye bhi karna hee tha, Stand-up special ka naam aise hee "Tu kar Lega" nahin rakha tha. I meant it. I shall improve further, fitness is a life long commitment now. If I can do it at the age of 44, so can you 💪🙏 #FitnessMotivation
गणितज्ञ "लीलावती" का नाम हममें से अधिकांश लोगों ने नहीं सुना है, उनके बा��े में कहा जाता है कि वो पेड़ के पत्ते तक गिन लेती थीं।
द��वीं सदी की बात है, दक्षिण भारत में भास्कराचार्य नामक गणित और ज्योतिष विद्या के एक बहुत बड़े पंडित थे। उनकी कन्या का नाम लीलावती था।
वही उनकी एकमात्र संतान थी। उन्होंने ज्योतिष की गणना से जान लिया कि ‘वह विवाह के थोड़े दिनों के ही बाद विधवा हो जाएगी।’
उन्होंने बहुत कुछ सोचने के बाद ऐसा लग्न खोज निकाला, जिसमें विवाह होने पर कन्या विधवा न हो। विवाह की तिथि निश्चित हो गई। जलघड़ी से ही समय देखन��� का काम लिया जाता था।
एक बड़े कटोरे में छोटा-सा छेद कर पानी के घड़े में छोड़ दिया जाता था। सूराख के पानी से जब कटोरा भर जाता और पानी में डूब जाता था, तब एक घड़ी होती थी।
पर विधाता का ही सोचा होता है। लीलावती सोलह श्रृंगार किए सजकर बैठी थी, सब लोग उस शुभ लग्न की प्रतीक्षा कर रहे थे कि एक मोती लीलावती के आ��ूषण से टूटकर कटोरे में गिर पड़ा और सूराख बंद हो गया; शुभ लग्न बीत गया और किसी को पता तक न चला।
विवाह दूसरे लग्न पर ही करना पड़ा। लीलावती विधवा हो गई, पिता और पुत्री के धैर्य का बांध टूट गया। लीलावती अपने पिता के घर में ही रहने लगी।
पुत्री का वैधव्य-दु:ख दूर करने के लिए भास्कराचार्य ने उसे गणित पढ़ाना आरंभ किया। उसने भी गणित के अध्ययन में ही शेष जीवन की उपयोगिता समझी।
थोड़े ही दिनों में वह उक्त ���िषय में पूर्ण पंडिता हो गई। पाटी-गणित, बीजगणित और ज्योतिष विषय का एक ग्रंथ ‘सिद्धांतशिरोमणि’ भास्कराचार्य ने बनाया है। इसमें गणित का अधिकांश भाग लीलावती की रचना है।
पाटीगणित के अंश का नाम ही भास्कराचार्य ने अपनी कन्या को अमर कर देने के लिए ‘लीलावती’ रखा है।
भास्कराचार्य ने अपनी बेटी लीलावती को गणित सिखाने के लिए गणित के ऐसे सूत्र निकाले थे जो काव्य में होते थे। वे सूत्र कंठस्थ करना होते थे।
कंठस्थ करने के पहले भास्कराचार्य लीलावती को सरल भाषा ��ें, धीरे-धीरे समझा देते थे। वे बच्ची को प्यार से संबोधित करते चलते थे, “हिरन जैसे नयनों वाली प्यारी बिटिया लीलावती, ये जो सूत्र हैं।” बेटी को पढ़ाने की इसी शैली का उपयोग करके भास्कराचार्य ने गणित का एक महान ग्रंथ लिखा, उस ग्रंथ का नाम ही उन्होंने “लीलावती” रख दिया।
आजकल गणित एक शुष्क विषय माना जाता है पर भास्कराचार्य का ग्रंथ ‘लीलावती‘ गणित को भी आनंद के साथ मनोरंजन, जिज्ञासा आदि का सम्मिश्���ण करते हुए कैसे पढ़ाया जा सकता है इसका नमूना है।
लीलावती का एक उदाहरण देखें- ‘निर्मल कमलों के एक समूह के तृतीयांश, पंचमांश तथा षष्ठमांश से क्रमश: शिव, विष्णु और सूर्य की पूजा की, चतुर्थांश से पार्वती की और शेष छ: कमलों से गुरु चरणों की पूजा की गई। अये, बाले लीलावती, शीघ्र बता कि उस कमल समूह में कुल कितने फूल थे? उत्तर-120 कमल के फूल।
वर्ग और घन क�� समझाते हुए भास्कराचार्य कहते हैं ‘अये बाले,लीलावती, वर्गाकार क्षेत्र और उसका क्षेत्रफल वर्ग कहलाता है।
दो समान संख्याओं का गुणन भी वर्ग कहलाता है। इसी प्रकार तीन समान संख्याओं का गुणनफल घन है और बारह कोष्ठों और समान भुजाओं वाला ठोस भी घन है।‘
‘मूल” शब्द संस्कृत में पेड़ या पौधे की जड़ के अर्थ में या व्यापक रूप में किसी वस्तु के कारण, उद्गम अर्थ में प्रयुक्त होता है। इसलिए प्राचीन गणित म���ं वर्ग मूल का अर्थ था ‘वर्ग का कारण या उद्गम अर्थात् वर्ग एक भुजा‘। इसी प्रकार घनमूल का अर्थ भी समझा जा सकता है। वर्ग तथा घनमूल निकालने की अनेक विधियां प्रचलित थीं।
लीलावती के प्रश्नों का जबाब देने के क्रम में ही “सिद्धान्त शिरोमणि” नामक एक विशाल ग्रन्थ लिखा गया, जिसके चार भाग हैं- (1) लीलावती (2) बीजगणित (3) ग्रह गणिताध्याय और (4) गोलाध्याय।
‘लीलावती’ में बड़े ही सरल और काव्यात्मक तरीके से गणित और खगोल शास्त��र के सूत्रों को समझाया गया है।
अकबर के दरबार के विद्वान फैजी ने सन् 1587 में “लीलावती” का फारसी भाषा में अनुवाद किया।
अंग्रेजी में “लीलावती” का पहला अनुवाद जे. वेलर ने सन् 1716 में किया।
कुछ समय पहले तक भी भारत में कई शिक्षक गणित को दोहों में पढ़ाते थे। जैसे कि पन्द्रह का पहाड़ा…तिया पैंतालीस, चौके साठ, छक्के नब्बे… अट्ठ बीसा, नौ पैंतीसा। इसी तरह कैलेंडर याद करवाने का तरीका भी पद्यमय सूत्र में था, “सि अप जूनो तीस के, बाकी के इकतीस, अट्ठाईस की फरवरी चौथे सन् उनतीस!” इस तरह गणित अपने पिता से सीखने के बाद लीलावती भी एक महान गणितज्ञ एवं खगोल शास्त्री के रूप में जानी गई। आज गणितज्ञो को लीलावती पुरूस्कार से सम्मानित किया जाता है।
हमारे पास बहुत कीमती इतिहास है जिसे छोड़कर हम आधुनिकता की दौड़ में विदेशों की नकल कर रहे हैं।