आज पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर जी की 301वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी का जीवन सेवा,सुशासन और जनकल्याण का अनुपम उदाहरण है,जो हम सभी को समाज एवं राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता है!
आज हम सभी साथियों ने डॉ.भीमराव अंबेडकर जी की तस्वीर के समक्ष आदरणीय मुन्नालाल पाल जी को भारत कला भवन,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में सेक्शन ऑफिसर पद पर प्रमोशन होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की। 💐
इस अवसर पर उनकी इस उपलब्धि पर हम सभी ने हर्ष एवं गर्व व्यक्त किया। 🙏✨
हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।
शक्ति, साहस, समर्पण और सेवा के प्रतीक हनुमान जी के आदर्श हमें सदैव सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। आइए, उनके मूल्यों को अपनाते हुए समाज में एकता, सद्भाव और सेवा की भावना को और मजबूत करें।
आज का प्रेरणादायक क्षण – BHU
आज हमारे बीच आदरणीय समाजसेवी एवं प्रेरणादायक शिक्षक प्रदीप पाल भैया जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।इस अवसर पर भैया जी ने अपने उद्बोधन में लक्ष्य निर्धारण,सकारात्मक सोच और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।🙏❤️
मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़ स्टूडेंट एजुकेशन वेलफेयर एसोसिएशन स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया।“नर्मदा से महानदी तक–हमारी साझा विरासत,हमारी पहचान”इस भावपूर्ण संदेश के साथ कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
सभी सदस्यों,प्रोफेसरगण और विद्यार्थियों की सक्रिय उपस्थिति एवं सहयोग से यह आयोजन सफल रहा।
विकास के नाम पर काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को जिस तरह क्षति पहुँचाई जा रही है,उसके विरोध में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू)के छात्रों ने आवाज़ बुलंद की।पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को क्षति पहुंचाना निंदनीय है।
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर नारी शक्ति, साहस, वीरता और न्याय की अनोखी मिसाल, होल्कर साम्राज्य की महारानी माता अहिल्याबाई होल्कर जी की प्राचीन मूर्तियों का तोड़ा जाना अत्यंत निंदनीय, शर्मनाक और अक्षम्य है।
मणिकर्णिका घाट का निर्माण लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी द्वारा वर्ष 1771 में कराया गया था। यह स्थल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर है।
लोकमाता अहिल्याबाई जी केवल इतिहास की नहीं, बल्कि न्याय, सुशासन और सांस्कृतिक गरिमा की प्रतीक हैं। उनकी प्रतिमाओं के साथ हुआ यह कृत्य गंभीर प्रशासनिक चूक और संवेदनहीनता को दर्शाता है।
यह भी स्मरणीय है कि AMASR (प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम), 1958 के तहत संरक्षित धरोहरों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून मौजूद है। ऐसे में इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाली विरासत को क्षति पहुंचना कानूनी उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
हम वाराणसी के माननीय सांसद एवं प्रधानमंत्री @narendramodi जी से मांग करते हैं कि इस मामले में स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही मूर्तियों की सुरक्षित संरक्षण व्यवस्था और समयबद्ध पुनर्स्थापना सुनिश्चित की जाए।
लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। यह केवल एक मूर्ति का प्रश्न नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक जिम्मेदारी का विषय है।
@mygovindia@UPGovt@PMOIndia@CMOfficeUP@myogiadityanath
बनारस में मणिकर्णिका घाट पर बुल्डोजर चलाकर सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मणिकर्णिका घाट और इसकी प्राचीनता का धार्मिक महत्व तो है ही, इससे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की स्मिृतियां भी जुड़ी हैं।
विकास के नाम पर, चंद लोगों के व्यावसायिक हितों के लिए, देश की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है। इसके पहले भी बनारस में रिनोवेशन के नाम पर कई सदी पुराने अनेक मंदिर ध्वस्त किए जा चुके हैं। काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मिटाने की ये साजिशें तत्काल बंद होनी चाहिए।
बनारस में मणिकर्णिका घाट पर बुल्डोजर चलाकर सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मणिकर्णिका घाट और इसकी प्राचीनता का धार्मिक महत्व तो है ही, इससे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की स्मिृतियां भी जुड़ी हैं।
विकास के नाम पर, चंद लोगों के व्यावसायिक हितों के लिए, देश की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है। इसके पहले भी बनारस में रिनोवेशन के नाम पर कई सदी पुराने अनेक मंदिर ध्वस्त किए जा चुके हैं। काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मिटाने की ये साजिशें तत्काल बंद होनी चाहिए।
बनारस के मणिकर्णिका घाट पर यह विध्वंस
महमूद गजनवी के असली अनुयायी मोदी ने किया
बनारस का इतिहास गौरव वहां के प्राचीन मंदिरों पर
बुलडोजर बाबर नहीं मोदी चला रहे हैं
हर हर महादेव को बदल घर घर मोदी का नारा देने
वाला हिंदू सभ्यता का सबसे बड़ा दुश्मन है
अंधभक्तों आंख खोलो, सच देखो!
.@narendramodi जी,
भोंडे सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर आपने बनारस के मणिकर्णिका घाट में बुलडोज़र चलवाकर सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को ध्वस्त कराने का काम किया है।
आप चाहतें हैं कि इतिहास की हर धरोहर को मिटाकर बस अपना नेम-प्लेट चिपका दिया जाएँ।
पहले कॉरिडोर के नाम पर छोटे-बड़े मंदिर और देवालय तोड़े गए और अब प्राचीन घाटों की बारी है।
गुप्त काल में वर्णित जिस मणिकर्णिका घाट, जिसका लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी ने पुनरुद्धार करवाया उस दुर्लभ प्राचीन धरोहर को आपने Renovation के बहाने तुड़वाने का अपराध किया है।
काशी, दुनिया का प्राचीनतम शहर अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास का ऐसा संगम है जो पुरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है।
क्या इस सब के पीछे फिर से व्यावसायिक मित्रों को फ़ायदा पहुँचाने की मंशा है? जल, जंगल, पहाड़, सब आपने उनके हवाले किए हैं, अब सांस्कृतिक विरासत की बारी आ गई है।
देश की जनता के आपसे दो सवाल हैं —
1. जीर्णोद्धार, साफ़-सफ़ाई और सौंदर्यीकरण विरासत को सहेज कर भी हो सकता था?
पूरे देश को याद है संसद परिसर से आपकी सरकार ने किस तरह से महात्मा गाँधी, बाबासाहेब आंबेडकर समेत भारत की महान हस्तियों की प्रतिमाओं को बिना किसी राय-मशवरे के एक कोने में रखवा दिया।
जलियाँवाला बाग़ मेमोरियल की दीवारों से इतिहास से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को इसी Renovation के नाम पर मिटाया गया।
2. मणिकर्णिका घाट में बुलडोज़र का शिकार बनी सैंकड़ों साल पुरानी मूर्तियों पर कुल्हाड़ी चलाकर उन्हें मलबे में क्यों डाला गया, किसी म्यूजियम में सँभाल कर रखा जा सकता था?
आपने दावा किया था — “माँ गंगा ने बुलाया है” आज आपने माँ गंगा को भुला दिया है। बनारस के घाट बनारस की पहचान हैं। क्या आप इन घाटों को जनता की पहुँच से दूर करना चाहते हैं?
लाखों लोग हर वर्ष काशी मोक्ष प्राप्ति के लिए अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में आते हैं। क्या आपकी मंशा इन श्रद्धालुओं से विश्वासघात करने की है ?
आज सड़कों पर सवाल थे, जवाब में लाठियाँ
छात्रों पर लाठीचार्ज करते हुए बर्बरता के साथ NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @varunchoudhary2 को गिरफ़्तार किया गया।
सरकार समझ ले कि लाठी से आंदोलन नहीं रुकते, और ज़्यादा तेज़ होते हैं। हर वार के बाद और छात्र सड़कों पर उतरेंगे।
मनरेगा बचाने की लड़ाई दबेगी नहीं।
#डरपोक_BJPसरकार
11 दिसंबर 1767 को यानी आज ही के दिन लोकमाता अहिल्याबाई द्वारा शासन की बागडोर अपने हाथ में लिया गया था, इसीलिए लोकमाता अहिल्याबाई होलकर: शिक्षा, समाज और प्रशासन की अद्वितीय विरासत नमक किताब पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के श्रीचरणों में समर्पित करते हुए भव्य विमोचन किया गया।
आज डॉ. हरि सिंह गौर जयंती एवं संविधान दिवस के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम।
कार्यक्रम में डॉ. हरि सिंह गौर जी के जीवन,संघर्ष,शिक्षा के प्रति समर्पण एवं समाज सुधार में उनके योगदान पर सारगर्भित चर्चा हुई।साथ ही संविधान दिवस के अवसर पर संविधान के मूल्यों के पालन का संकल्प लिया गया।