जो ख़ुद हर मोड़ पर साज़िशों के किरदार रहे,
आज वही वफ़ादारी के पहरेदार बने।
जिनके हाथों में कभी चालों का नक्शा था,
अब वही मासूम बनकर हमें समझा रहे हैं।
सियासत भी क्या खेल दिखाती है दोस्तों,
जो आग लगाते थे, वही बुझाने का ज्���ान बांट रहे हैं।
25 सितंबर 2022 राजस्थान की राजनीति का काला दिन"
जब सोनिया गांधी जी के निर्देशन पर अजय माकन जी और खड़गे साहब राजस्थान आए विधायकों से वन टू वन चर्चा करने के लिए
लेकिन उन्हें कोई सीनियर नेता एयरपोर्ट पर लेने तक नहीं आया खरगे साहब तब राजसभा के नेता प्रतिपक्ष थे और मकान साहब प्रभारी थ��
लेकिन @ashokgehlot51 ने सोनिया गांधी जी को आदेशों की अवमानना करके खुलेआम उनके चुनौती दी और विधायकों की वन टू वन मीटिंग नहीं होने दी
100 साल से भी अधिक कांग्रेस पार्टी के इतिहास में आज तक कभी भी ऐसी कोई घटना नही हुई
अशोक गहलोत उस दिन सोनिया गांधी जी अपमान नहीं करते और वह मीटिंग हो जाने देते तो सायद आज कांग्रेस पार्टी की राजस्थान में सरकार होती
कांग्रेस पार्टी ने उनको केंद्��ीय मंत्री बनाया राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष बनाया और तीन बार मुख्यमंत्री बनाया लेकिन तीनों बार कांग्रेस पार्टी की सरकार रिपीट नही करा पाए
दो बार कांग्रेस पार्टी ने इनके बेटे को लोकसभा का टिकट दिया लेकिन दोनो ही बार जनता ने बुरी तरह हराया एक बार अशोक खुद मुख्यमंत्री थे तब भी अपने बेटे को नहीं जितवा पाए।
जब जब कांग्रेस पार्टी में गद्दारी की बात आएगी तब तब 25 सितंबर की घटना दोहराई जायेगी। @SachinPilot @INCIndia @RahulGandhi
जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए मेहनत, समर्पण और धैर्य सबसे महत्वपूर्ण तत्व होते हैं। राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट को देखकर अक्सर लगता है कि वे धैर्य के सजीव उदाहरण हैं।
चाहे अशोक गहलोत हों, मुख्य विप���्षी भाजपा के नेता हों या हनुमान बेनीवाल जैसे विरोधी समय-समय पर कई लोग उनकी आलोचना करते रहे हैं।
इसके बावज��द सचिन पायलट की वाणी और व्यवहार सदैव मर्यादित रहते हैं। वे न तो तीखी प्रतिक्रिया देते हैं और न ही किसी प्रकार का विवाद खड़ा करते हैं, बल्कि शांत और संयमित रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हैं।
यही धैर्य, संयम और समर्पण उन्हें राजस्थान की राजनीति में एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।
श्री @SachinPilot जी के विरुद्ध राजस्थान भाजपा के प्रभारी राधामोहन दास द्वारा की गई टिप्पणी अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजनीति में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर इस प्रकार की अमर्यादित भाषा का प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक जीवन की गरिमा के खिलाफ है। श्री सचिन पायलट जी ने सदैव मर्यादित और शालीन राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया है, ऐ��े में उनके प्रति इस तरह की टिप्पणी पूरी तरह अनुचित है।
मैं इस ओछी बयानबाज़ी की कड़ी निंदा करता हूँ। भाजपा नेतृत्व को अपने पदाधिकारियों को संयम और शालीनता का पाठ पढ़ाने की आवश्यकता है, तथा Radha Mohan Das Agarwal जी को अपने बयान पर आत्ममंथन करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
AICC महासचिव एवं टोंक विधायक सचिन पायलट जी के लिए राजस्थान भाजपा प्रभारी राधामोहन दास जी द्वारा की गई अशोभनीय टिप्पणी न केवल निंदनीय है, बल्कि भाजपा की गिरती सियासी संस्कृति का उदाहरण है।
राधामोहन जी को भाषण से पहले ��ाजस्थान को समझना होगा, यहाँ की अपनायत, सम्मान और संस्कृति को समझना होगा। राजस्थान को माफ़ कीजिएगा प्रभारी जी आपके वैमनस्य से भरे शब्दों का स्थान यहाँ नहीं है।
व्यक्तिगत अपमान और मर्यादा भंग करन��� भाजपा की आदत बन गई है। BJP लगातार शुचिता और लोकतांत्रिक संस्कारों को खत्म करने पर आमादा दिख रही है। भाजपा नेतृत्व को अपने नेताओं और पदाधिकारियों के आचरण पर ध्यान देने की आवश्यकता है। राधामोहन जी को इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए।
@SachinPilot @BJP4India
AICC महासचिव एवं टोंक विधायक सचिन पायलट जी के लिए राजस्थान भाजपा प्रभारी राधामोहन दास जी द्वारा की गई अशोभनीय टिप्पणी भाजपा की गिरती हुई राजनीतिक संस्कृति और संकीर्ण सोच का परिचायक है। लोकतंत्र में वैचारिक ��तभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और स्तरहीन भाषा किसी भी स्वस्थ राजनीति का हिस्सा नहीं हो सकती।
भाजपा बार-बार यह साबित कर रही है कि वह मुद्दों पर संवाद और जनहित के सवालों का उत्तर देने के बजाय व्यक्तिगत हमलों की राजनीति को प्राथमिकता देती है। यह केवल एक नेता का अपमान नहीं, बल्कि राजनीतिक शिष्टाचार, लोकतांत्रिक मर्यादा और सार्वजनिक जीवन की गरिमा पर सीधा प्रहार है।
भाजपा नेतृत्�� की चुप्पी इस तरह के बयानों को मौन समर्थन देने जैसी प्रतीत होती है। राधामोहन दास जी को तुरंत बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए और भाजपा को अपने नेताओं की भाषा व आचरण पर नियंत्रण रखना चाहिए। जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।
@SachinPilot
राजस्थान भाजपा प्रभारी श्री राधामोहन दास जी को कोई नहीं जानता यहाँ तक की उनको राजस्थान भाजपा के लोग नहीं जानते,
एआईसीसी महासचिव एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्री सचिन पायलट जी के प्रति राजस्थान भाजपा प्रभारी श्री राधामोहन दास जी की टिप्पणी न केवल अत्यंत अशोभनीय है, बल्कि यह भाजपा की गिरती हुई राजनीतिक संस���कृति का स्पष्ट उदाहरण भी है।
लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन व्यक्तिगत कटाक्ष और मर्यादा का उल्लंघन किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता। दुर्भाग्यवश, भाजपा के कई नेता लगातार इस स्तर की भाषा का प्रयोग कर राजनीतिक शुचिता और स्वस्थ संवाद की परंपरा को कमजोर कर रहे हैं।
राजनीति में विचारों की लड़ाई होनी चाहिए, व्यक्तित्व पर प्रहार नहीं। भाजपा नेतृत्व को अपने पदाधिकारियों के आचरण पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और ऐसी घटनाओं पर स्पष्ट संदेश देना चाहिए।
श्री राधामोहन दास जी को अपनी इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, ताकि राजनीतिक संवाद की गरिमा बनी रहे।@SachinPilot
राजस्थान में पायलट साहब की लोकप्रियता इतनी ज़्यादा हो गयी की भाजपा प्रभारी को पायलट साहब पर अमर्यादित टिप्पणी करके सुर्खियों में आना चाहते है उनको राजस्थान भाजपा ना पूछ रही है , ना उनकी कदर कर रही है
राजस्थान की जनता ऐसे लोगो को करारा जवाब देगी @SachinPilot 🙏
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आधार, राशन, बैंक, छात्रवृत्ति, स्कूल एडमिशन, परीक्षा फॉर्म, बीमा, मनरेगा, किसान योजनाएँ और लगभग सभी सरकारी सेवाएँ आज मोबाइल OTP से जुड़ी हुई हैं।
अगर किसी गरीब व्यक्ति के मोबाइल में रिचार्ज नहीं है तो उसे OTP कैसे मिलेगी? क्या सिर्फ OTP पाने के लिए हर महीने रिचार्ज करवाना गरीबों की मजबूरी बना दी गई है?
ऊपर से टेलीकॉम कंपनियों की 28 दिन में सेवा समाप्त करने की मनमानी व्यवस्था ने लोगों पर औ�� बोझ डाल दिया है।
पहले महीने 30 दिन का होता था, लेकिन अब 28 दिन के रिचार्ज से साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करवाना पड़ता है। इसका सीधा असर गरीब, मजदूर, किसान और छात्रों पर पड़ रहा है।
जब सरकार खुद आधार, बैंक, राशन और सरकारी योजनाओं के लिए OTP अनिवार्य कर रही है, तो कम से कम OTP सेवा को सभी नागरिकों के लिए मुफ्त किया जाना चाहिए। डिजिटल इंडिया का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि गरीबों पर हर महीने नया आर्थिक बोझ डाल दिया जाए।
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