8 नवंबर को एक दुर्घटना में अपने दोनों पैर गंवा चुके धौलपुर के दिव्यांग कुशल गोस्वामी के लिए सक्षम बना सहारा। जीविकोत्पार्जन के लिए सक्षम की टीम ने कुशल गोस्वामी के घर के बाहर उसे एक दुकान खुलवायी। किसी दिव्यांग को इस प्रकार स्वरोजगार उपलब्ध कराने का सक्षम का यह प्रयास अतुलनीय है।
Deeply disturbed by the deliberate attack on a Hindu temple in Canada. Such acts of hatred and violence have no place in a civilized society. We strongly condemn this vile act and expect the Canadian government to take immediate and decisive action to ensure the safety and respect of all religious communities.
राष्ट्र सेवा में समर्पित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानि आरएसएस आज अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। अविरल यात्रा के इस ऐतिहासिक पड़ाव पर समस्त स्वयंसेवकों को मेरी हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनाएं। मां भारती के लिए यह संकल्प और समर्पण देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करने के साथ ही ‘विकसित भारत’ को साकार करने में भी नई ऊर्जा भरने वाला है। आज विजयादशमी के शुभ अवसर पर माननीय सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी का उद्बोधन जरूर सुनना चाहिए…
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आज हर क्षेत्र में भारत आगे बढ़ रहा है।
समाज की समझदारी भी धीरे-धीरे बन रही है।
आज हम देखते हैं कि जम्मू कश्मीर का चुनाव भी शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो गया।
पूरी दुनिया में भारत की साख और प्रतिष्ठा बढ़ी है, वसुधैव कुटुम्बकम का हमारा विचार सबको स्वीकार्य है।
: डॉ मोहन जी भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
#RSS100
#RSSFoundationDay
"I have been seeing a harmony of valour and determination all around from the morning. Yesterday,
I had an opportunity to visit the home of the founder of RSS - it is an experience of "simplicity and greatness" .
Chief Guest Dr. Radhakrishnan former chairperson ISRO. #RSS100
RSS के स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से सेवा कार्य करते हैं।
आत्म अनुशासन और निस्वार्थ सेवा के इस पवित्र वातावरण में एक दिन बिताना मेरे लिए बहुत सम्मानजनक था।
: पद्म भूषण डॉ. के. राधाकृष्णन, भूतपूर्व अध्यक्ष, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
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पत्थरबाजों की गुंडागर्दी नहीं चलने देनी है!
गणेश महोत्सव के दौरान कई जगह पत्थरबाजी हुई।
जबतक पुलिस आती है तबतक समाज को भुगतना पड़ता है।
इसलिए हमारे समाज को स्वयं तैयार रहना चाहिए और पत्थरबाजी का जवाब देना चाहिए।
अपना और अपनी चीजों की रक्षा करना हमारा अधिकार है।
: डॉ मोहन जी भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
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#RSSFoundationDay
हमने अपने संतों को, देवों को सबको बांट लिया!
वाल्मीकि जयंती केवल वाल्मीकि बस्ती में ही क्यों होना?
वाल्मीकि जी ने रामायण तो पूरे हिन्दू समाज के लिए लिखा।
तो भगवान वाल्मीकि, रविदास की जयंती सब मिलकर क्यों नहीं मना सकते।
मंदिर, श्मशान, पानी हर किसी के लिए खुले होने चाहिए, किसी को कोई रोक-टोक नहीं होनी चाहिए।
: डॉ मोहन जी भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
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जहां तक संस्कारों के क्षरण का प्रश्न है, तीन स्थानों पर - जहां से संस्कार मिलते हैं, - संस्कार प्रदान की व्यवस्था को पुनर्स्थापित व समर्थ, सक्षम करना पडेगा । शिक्षा पद्धति पेट भरने की शिक्षा देने के साथ साथ छात्रों के व्यक्तित्व विकास का भी काम करती है । अपने देश के सांस्कृतिक मूल्य सारांश में बताने वाला एक सुभाषित है
मातृवत् परदारेषु परद्रव्येषु लोष्ठवत्, ।
आत्मवत् सर्व भूतेषु य: पश्यति स: पंडित: । ।
महिलाओं को माता समान देखने की दृष्टी, पराया धन मिट्टी समान मानते हुए स्वयं के परिश्रम से व सन्मार्ग से ही धनार्जन करना और दूसरों को दु:ख कष्ट हो ऐसे आचरण, कार्य नहीं करना, यह जिसका व्यवहार है उसको अपने यहाँ शिक्षित मानते हैं । नई शिक्षा नीति में इस प्रकार के मूल्य शिक्षा की व्यवस्था व तदनुरूप पाठ्यक्रम का प्रयास चला है परन्तु प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक शिक्षकों के उदाहरण छात्रों के सामने उपस्थित हुए बिना यह शिक्षा प्रभावी नहीं होगी । इसलिए शिक्षकों के प्रशिक्षण की नई व्यवस्था निर्माण करनी पड़ेगी । दूसरा स्थान है समाज का वातावरण । समाज के जो प्रमुख लोग हैं जिनकी लोकप्रियता के कारण अनेक लोग उनका अनुकरण करते हैं, उनके आचरण में ये सारी बातें दिखनी चाहिए । इन बातों का मंडन भी उन प्रमुख लोगों को करना चाहिए और उनके प्रभाव से समाज में चलने वाले विभिन्न प्रबोधन कार्यों से यह मूल्य प्रबोधन किया जाना चाहिए । समाज संवाद माध्यमों का (social media) उपयोग करने वाले सभी सज्जनों को माध्यमों का उपयोग समाज को जोड़ने के लिए हैं, तोड़ने के लिए न हों, सुसंकृत करने के लिए है, अपसंस्कृति फैलाने के लिए नहीं इस बात की सावधानी बरतनी होगी ।
- मोहन भागवत
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