जब बी एल ओ घर- घर जाकर प्रत्येक मतदाता का सत्यापन कर सकता है तो वर्ष में एक बार सीनियर सिटीजन का सत्यापन यह तंत्र क्यों नहीं कर सकता?
वरिष्ठों का सम्मान करें।उनकी भावनाओं को आहत न करें।सत्यापन का डिजिटल/ भौतिक तंत्र विकसित करें।सदाचरण का न केवल पाठ पढ़ायें बल्कि उसका अनुपालन करें
हास्यास्पद/ शर्मनाक
अपने देश में नागरिकों की औसत आयु 72 वर्ष है ।
सेवानिवृत्ति की अधिवर्षता आयु सामान्यतः 60 वर्ष है ।इसके बाद अच्छे स्वास्थ्य के साथ पेंशन पाने वाले सीनियर सिटीज़न को अपने जिंदा रहने का प्रमाण देना पड़ता है
यह भावनात्मक रूप से उन्हें आहत करने वाला है ।यह सिलसिला ख़राब होते स्वास्थ्य के साथ उनकी मुत्यु तक चलता रहता है । उन्हें उनकी मृत्यु याद दिलाई जाती है और असमर्थ से उपस्थित होकर जीने का प्रमाण देने को कहा जाता है ।
@suryapsingh_IAS समाजवादी युवजन सभा के गुंडों ने हज़रतगंज में चेकिंग कर रहे तत्कालीन क्षेत्राधिकारी राजेश साहनी पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की थी । तब वे गुण्डों की खुली जीप के बोनट पर चढ़ गए ।बोनट पर ही उन्हें लादकर वे गाड़ी सहित सीधे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आवास में दबंगईपूर्वक घुस गए ।
@ANI अमन और शांति के माहौल में आजादी का जश्न शोपियाँ, जम्मू और कश्मीर में डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन, सैन्य बल तथा आम जनता के द्वारा आतंकवाद को कुचलकर जड़ से समाप्त करने के बाद की खुशी का इजहार है ।सभी को सैल्लुट । भारत का उन्नत भाल उन्नति की नित नूतन ऊंचाइयों को छुए ऐसी कामना है ।
निवर्तमान पुलिस उपमहानिरीक्षक का बहुत सारगर्भित तथा यथार्थपरक लेख है । सिविल पुलिस आम नागरिकों- सिविलिएंस की रोज़मर्रा की समस्याओं का आपसी समझौते से शांतिपूर्ण निस्तारण करने हेतु बनाई गई है । इसीलिए इसे अनार्म बनाया गया है । अपने समाज के बीच से नियुक्त कर्मियों पर राय दें।
अधिकारियों की उपस्थितिमें सशस्त्र पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और जनप्रतिनिधि भाजपा विधायक के साथ भयंकर मारपीट । यह दृश्य खीरी जनपद का है। सामान्य जनता की सुरक्षा का क्या आलम होगा?