आज DME ऑफिस, जयपुर में हमारे साथियों का RBS चेक करने के लिए जो मशीनें लाई गईं, उन पर एक बेहद गंभीर सवाल खड़ा होता है।
मैंने उसी समय अपनी मशीन से RBS चेक किया और सरकारी टीम द्वारा इस्तेमाल की जा रही मशीन की रीडिंग से अंतर सामने आया। अगर यह अंतर सिर्फ एक बार का नहीं है और बार-बार सामने आ रहा है, तो सवाल मशीन की accuracy, calibration और उसकी विश्वसनीयता पर उठना स्वाभाविक है।
मेरा सीधा सवाल है—आखिर हमारे साथियों की सेहत से जुड़ी जांच में इतनी बड़ी discrepancy क्यों?
अगर सरकारी मशीन बिल्कुल सही है, तो उसकी calibration report और accuracy certificate सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते?
अगर मेरी मशीन गलत है, तो स्वतंत्र लैब/अधिकृत एजेंसी से दोनों मशीनों की जांच करवाइए।
और अगर सरकारी मशीन की रीडिंग गलत निकलती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
मशीन किस कंपनी की है?
किस प्रक्रिया से खरीदी गई?
किसने उसका tender approve किया?
किसने उसकी quality और calibration verify की?
और आज DME ऑफिस में RBS जांच के लिए उसी मशीन का इस्तेमाल किस अधिकारी के आदेश पर किया गया?
हम किसी पर बिना जांच आरोप नहीं लगा रहे हैं—हम जांच की मांग कर रहे हैं।
लेकिन अगर सब कुछ सही है, तो सरकार को एक स्वतंत्र जांच से डरना क्यों चाहिए?
राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री और चिकित्सा शिक्षा विभाग से हमारा सीधा सवाल है:
क्या हमारे साथियों की मेडिकल जांच में इस्तेमाल हो रही मशीनों की accuracy की स्वतंत्र जांच करवाई जाएगी?
क्या मशीन की calibration report सार्वजनिक की जाएगी?
क्या मशीन का brand, model, serial number और procurement/tender details सार्वजनिक की जाएंगी?
और सबसे बड़ा सवाल—
अगर जांच में मशीन गलत पाई गई, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
हम जवाब चाहते हैं।
बहाना नहीं।
हम सबूत के साथ सवाल उठा रहे हैं—अब सरकार सबूत के साथ जवाब दे।@BhajanlalBjp@KumariDiya@BJP4India@BJP4Rajasthan@ANI@PTI_News@1stIndiaNews@EdgeNewsIND@RajCMO@RahulGandhi@ashokgehlot51@sachinyadav___1@imajdnnational@IMAIndiaOrg@Nffmgs_official@aajtak@TheNewspinch@zeerajasthan_@RajGovOfficial@JPNadda@GajendraKhimsar@gssjodhpur@GovindDotasra@PMOIndia