संभोग के अंतिम क्षणों मे जब स्त्री का योनि को सिकोड़ लेती है तो वह चरमसुख की ओर अग्रसर होती है। ऐसे मे योनि एकदम कस जाती है और ऐसा महसूस होता मानो लिंग योनि मे फस गया हो। ऐसी स्थ��ति में लिंग को योनि पर रगड देने से स्त्री तडपकर जल्दी झड जाती है
स्त्री कभी पहल नहीं करती... वह प्रतीक्षा करती है... पहल हमेशा पुरुष की तरफ से होता है... ऐसा नहीं कि उसे संभोग की इच्छा नहीं है बल्कि वह तड़प रही होती है... जो उस तड़प को समझ के शांत करे वही असली पुरुष है..! 😊💕
इस सुख के लिए हर औरत तड़पती है और वो चाहत�� है कि उसका मर्द उसके हर एक का अंग का आनंद ले सिर्फ योनि या नितंबों का नहीं बल्कि आँख, कान, गला, हथेली, पेट इन सबको अपने होठों ओर जीभ से पवित्र करदे, तब जाके ये लुक आता है औरत के चेहरे पर। क्या आप ऐसा सुख दे सकते हैं?
महिला उत्तेजना के दौरान, जननांग क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे योनि में चिक���ाई आती है और भगशेफ व बाहरी जननांग सूज जाते हैं। हृदय गति, साँस और ब्लड प्रेशर तेज हो जाते हैं, शरीर गर्म हो सकता है और निप्पल खड़े हो सकते हैं। इस दौरान मांसपेशियों में तनाव भी महसूस हो सकता है
उत्तेजना, कामेच्छा और संभोग के पड़ाव...
मेरा अनुभव कहता है की जीवन में दो पड़ाव ऐसे होते हैं जब कामेच्छा चरमसीमा पर होती है
पहली जब लड़की की उम्र 16-17 पार होती है तब उसे खुद को जानने की इच्छा होती है,खुद को महसूस करने की, तने हुए शख्त स्त�� को किसी मर्द के द्वारा मसल दिए जाने की, फिर जब एक दिन उसे उसके मन का मर्द मिलता है तब पहली बार अनुभव करती है वो सुख जिसके बाद उसे ��रत होने पर खुशी मिलती है फिर संभोग और चरमसुख का सिलसिला शुरू हो जाता है .ये मेरी अपना अनुभव है.दूसरे पढ़ाव कि औरत जब 35 पार कर चुकी होती है चालीस के करीब जब शरीर पूरा भर चुका होता है स्तन मुलायम हो चुके होते हैं लचक आ चुकी होतीहै गाल बाजू जांघें भरी भरी हो जाती है तब फिर से शरीर में नयापन महसूस होने लगता है फिर एक बार उस नयेपन को महसूस करने का मन करता है और फिर से मर्द के स्पर्श में रहकर उसकी कठोरता ��र गर्माहट से औरत फिर से औरत हो जाती है.