तेरी नौकरी तू संभाल मेरी नेतागिरी मै संभालूगा!😳😲
एक SDM की ये औकात हो गई कि मेरे आफिस मे ये कहे की आप उद्घाटन मत करो सरकार मेरे से नाराज होगी कान खोलकर सुन लेना सरकारी प्रोटोकॉल मे MLA/MP, जनप्रतिनिधि ही उद्घाटन करेंगे इसके अलावा किसी की औकात नही है जो लक्ष्मणगढ़ मे घुसकर के उद्घाटन करे
- गोविंदसिह डोटासरा
भाजपा ‘अवध एक्सप्रेस’ से सत्ता में आई थी, ‘अयोध्या एक्सप्रेस’ से उसकी वापसी तय है।
दानपात्र में हाथ डालनेवाले भाजपाई और उनके संगी-साथियों के ख़िलाफ़ ‘दानपात्र’ के साथ सपा के सांसदों ने संसद के सामने जो सांकेतिक प्रदर्शन किया, उसे देखकर शर्मिंदगी में डूबे भाजपाई लोग, सबसे निगाह चुराकर चुपके से आते-जाते देखे गए।
जनता कह रही है, हम उदार हृदय भारतीय लोग, भाजपाइयों की सौ क्या हज़ार चोरी भी माफ़ कर देते लेकिन धर्म के पैसे चुराने का महापाप हम कभी माफ़ नहीं करेंगे। जनता ये भी कह रही है कि जो भगवान के नहीं हुए, वो हमारे क्या होंगे।
जो भाजपा का साथी, वो रामघाती-महापापी!
NTA जैसी एजेंसियां अपनी गलती के लिए आपसे पैसे वसूलती है। हिंदुस्तान में 'पेपर लीक उद्योग' चल रहा है।
NEET पेपर लीक होता है तो BJP के लोग दलील देते हैं कि इसमें शिक्षा मंत्री की गलती नहीं, उन्होंने पेपर लीक नहीं किया- ये तो सिस्टम की कमी है।
अगर ऐसा है तो शिक्षा मंत्री की जरूरत ही क्या है?
: 'छात्रों की गूंज' में आए अभिनय सर ने कहा
111 दिन तक माँ गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे प्रो॰ जी डी अग्रवाल हों या हरियाणा की ओलिंपिक रेसलर हों,
हमारे 750 अन्नदाता किसान हों, दलित-आदिवासी हों, या फ़िर पेपर लीक की बलि चढ़े 25 बच्चे और उनके परिजन,
इस तानाशाह सरकार ने किसी को नहीं बख़्शा…
इनकी नज़र में कोई भी अगर आवाज़ उठाता है तो वह "Anti-National" है, "परजीवी" है !
जंतर-मंतर पर आज जो हुआ वह लोकतंत्र और संविधान के ऊपर एक और काला धब्बा है।
कोटा और देहरादून से "छात्रों की गूँज" का आगाज़ हो चुका है…दिल्ली की दहलीज़ तक ज़रूर पहुँचेगी !!
सोनम वांगचुक जी के नहीं, सरकार के vitals डाउन हुए हैं। तभी संवाद की जगह पुलिस और पर्दों का सहारा लेना पड़ा। यह किसी व्यक्ति की नहीं, एक घबराई हुई सत्ता की कहानी है।
#StandWithSonamWangchuk#JantarMantar@Cockroachisback
सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से जबरन हटाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के संवैधानिक अधिकार पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
लोकतंत्र में असहमति का जवाब संवाद से दिया जाता है, दमन से नहीं। किसी भी सरकार की परिपक्वता उसकी आलोचना सुनने और बातचीत करने की क्षमता से तय होती है, न कि विरोध की आवाज़ को बलपूर्वक दबाने से।
लोकतंत्र की असली पहचान संवाद, संवेदनशीलता और जवाबदेही है - डर, दमन और चुप्पी नहीं।
2004 से लेकर 2025 तक जितने भी RPSC के चैयरमेन और मेम्बर रहे उनके वो सभी रिश्तेदार जो SDM, डिप्टी, RJS बना है उनकी अलग सूची बनाए क्यूकि इसमे भी #RPSC_के_साथ_हाईकोर्ट की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है😳😲
"अच्छा तुम्हे RAS बना दूगा तुम मेरी भतीजी से रिश्ता करोगे, मेरी भांजी के करोगे"😳😲
पहले एक RPSC के चैयरमेन थे वो तो पहले ही कापी घर पर रखते थे और उन्होने अपने सारे ही बच्चो के रिश्ते अच्छे कर दिए
- हनुमान बैनीवाल
कपिल सिब्बल ने उठाया आचार संहिता के उल्लंघन का मुद्दा -
"मैंने प्रधानमंत्री का भाषण सुना, प्रधानमंत्री के पीछे राष्ट्रीय ध्वज था और वे भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर बोल रहे थे, जबकि चुनाव चल रहे हैं। यह भारत की राजनीति में एक नया निम्न स्तर है। लेकिन मुझे पता है कि न तो मुख्य चुनाव आयुक्त और न ही कोई अन्य संस्था इस बारे में कुछ करेगी..."
क्या हमेशा की तरह प्रधानमंत्री के पद का इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है? बंगाल में तृणमूल सत्ता में है और मुख्य प्रतिद्वंद्वी है। प्रधानमंत्री के संबोधन में तृणमूल पर हमला किया गया। देश की सरकार और प्रधानमंत्री के पद का इस्तेमाल चुनाव प्रभावित करने के लिए हो रहा है।
एपस्टीन फाइल्स का दुनिया में तहलका लेकिन हमे भारत की चिंता
एपस्टीन फ़ाइलस ने दुनिया में तहलका मचाया हुआ है अमेरिका का कानूनी विभाग चुनिंदा लोगों के नाम ही सामने रख रहा है सभी नाम नहीं खोलें जा रहे है। ऐसे में अमेरिकी सांसद नैन्सी मैसी के बयान के बाद एपस्टीन फाइल्स की पीड़िताओं ने बयान दे दिया कि अगर बाल यौन उत्पीडन में लिप्त दुनियां के तमाम ताकतवर राजनेताओं, उद्योगपतियों, बड़ी हस्तियों के छुपाये गये और उनके नाम से पर्दी नहीं हटाया गया तो, वें स्वयं सामने आकर उनका नाम खोल देंगी। अब भारत सहित दुनियां में जो होने जा रहा है, उसके लिए तो यही कहा जा सकता है;
"जब शहर की तमाम बदनाम औरतों ने आत्मकथा लिखने का फैसला किया तो शहर के सभी इज्जतदार लोगों ने आत्महत्या कर ली"!
#Epstein
#EpsteinFiles
#EpsteinTrumpFiles
#Episteinfiles
#JefryEpstein
#epteinfilesnew
#GHDuoGala6
डोनाल्ड ट्रंप का बयान चर्चा में है.
“मैं नरेंद्र मोदी के राजनीतिक करियर को खत्म कर सकता हूं, लेकिन ऐसा करना नहीं चाहता.”
एक बयान, कई सवाल.
क्या यह सिर्फ राजनीतिक बयान है या इसके पीछे कोई बड़ा संकेत है?
वैश्विक राजनीति में शब्दों का वजन होता है. उनका असर दूर तक जाता है.
"संसद में PM केयर फंड, PM राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) और राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF) से जुड़े सवाल नहीं पूछे जा सकेंगे"
- ये निर्देश सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय ने लोकसभा सचिवालय को दिए हैं
PMO ने लोकसभा सचिवालय से कहा है- इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि संसद में कोई भी सदस्य इन फंड्स पर सवाल न उठाए।
सवाल है-
• सांसद जनता के प्रतिनिधि हैं, उन्हें जनहित के सवाल पूछने से क्यों रोका जा रहा है?
• मोदी सरकार जनता के लाखों-करोड़ रुपये का हिसाब क्यों नहीं देना चाहती?
• आखिर मोदी सरकार देश की जनता से क्या छिपाना चाह रही है?
• क्या अब देश की संसद नरेंद्र मोदी की मनमर्जी से चलेगी?
ये सीधे तौर पर तानाशाही है। संसद का अपमान है और सांसदों के अधिकारों पर हमला है।
दोनों वीडियो देख अंतर बताईए -
नियम तो वही है फिर या तो इन 6 वर्षों में सरकार की नीयत बदल गई या फिर इन वर्षों में बड़ी तेजी से संसदीय परंपराओं में गिरावट आ गई…
लोकसभा अध्यक्ष महोदय का ही पुराना वीडियो गवाही दे रहा है कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा का दायरा असीमित है।
मामला उधर गया तो 2 दिन मे पता नही चलेगा #डोटासरा जी जेल मे मिलेंगे "हमारी सरकारी को जाच करनी चाहिए"
डर तो कुछ नही है😲 पर एक बार जाच हो जाए बहुत बडे नाम आयेंगे वही कांग्रेस के 2-3 बडे पुराने नेता😳, 2-3 RPSC के चैयरमेन😲, 2-3 RPSC के मेम्बर🤥 और गोपनीय शाखा के अधिकारी कर्मचारी एक बडा माफिया विकसित हो गया है😵 जिसको खोला जाना बहुत जरूरी है.
- डॉ किरोडीलाल मीना
ससुरा OMR कहां गई...?
हर माह SOG के पत्र फिर भी नहीं मिले दस्तावेज,
राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य से जुड़े सबसे अहम दस्तावेज ओएमआर शीट को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं,
चयन बोर्ड ने बड़ी-बड़ी भर्तियों की OMR ही गायब कर दी
Where did the OMR sheets go?
Despite repeated letters from the SOG every month, the crucial documents were never provided.
Serious questions have now been raised over the fate of the OMR sheets — the most important documents linked to the future of lakhs of unemployed youths preparing for government jobs in Rajasthan.
Shockingly, the Recruitment Board has reportedly lost the OMR sheets of several major recruitment examinations.
This is not just administrative negligence — this is about the future of an entire generation.
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में OMR शीट बदलने के खुलासे ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। SOG की रिपोर्ट के अनुसार 9 साल पहले यानी 2018 से पूर्व की भाजपा सरकार से शुरू हुआ यह खेल 2026 तक जारी रहा है जो बेहद ही चिंताजनक तथ्य है। जो कर्मचारी इस फर्जीवाड़े में लिप्त थे, वे 2024 और 2025 में भी सक्रिय तथा राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में पदस्थ थे।
कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक के नासूर को मिटाने के लिए देश में सबसे पहले कदम उठाते हुए उम्रकैद की सजा, दोषियों की संपत्ति जब्त एवं 10 करोड़ जुर्माने का कड़ा कानून बनाया। इतिहास में पहली बार आरपीएससी (RPSC) के सदस्य को गिरफ्तार किया गया। कांग्रेस सरकार के दौरान SOG ने 250 से अधिक गिरफ्तारियां कीं और पेपर लीक माफियाओं की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त किया।
कांग्रेस सरकार ने कभी भी राजनीति को न्याय के आड़े नहीं आने दिया। जहां कमी थी उसका सामना करते हुए सुधार किया। कई परीक्षाओं को रद्द तक करने की परिस्थिति बनी तो युवाओं के हित में यह निर्णय भी लिया गया। चाहे कांग्रेस शासन हो या भाजपा शासन हो, अगर किसी ने भी बेईमानी की हो उन्हें पेपर लीक पर बने नए कड़े कानून के तहत सजा दिलाई जाए जिससे न्याय सुनिश्चित हो सके।
परन्तु ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार पेपर लीक, OMR शीट बदलने जैसे गंभीर मुद्दों को न्याय सुनिश्चित करने की बजाय केवल राजनीति का माध्यम बना रही है इसलिए निष्पक्ष जांच करवाने की बजाय केवल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आयोजित हुईं परीक्षाओं को आरोपित करने का प्रयास कर रही है।
पिछले 2 साल में राजस्थानी कर्माचरी चयन बोर्ड द्वारा सूचना सहायक, संविदा नर्स (GNM/ANM), कृषि पर्यवेक्षक, कनिष्ठ लेखाकार, संगणक, समान पात्रता परीक्षा (CET- स्नातक व सीनियर सेकंडरी), पशु परिचर, कनिष्ठ अनुदेशक, LDC, कनिष्ठ अभियंता (JEN), पटवारी, वाहन चालक और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (Grade 4) की परीक्षाएं संपन्न हुईं जिनमें 35 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
ये सभी परीक्षाएं उसी सिस्टम और स्टाफ की देखरेख में हुईं जो अब ओएमआर शीट में गड़बड़ी के लिए पकड़े गए हैं। इस कारण अब इन सभी परीक्षाओं की शुचिता संदेह के घेरे में है। अभ्यर्थियों द्वारा लगातार ये शिकायत की जा रही है कि बीते 2 सालों से भर्ती परीक्षाओं की कट ऑफ असामान्य रूप से अधिक जा रही है जिससे उनके मन में शंकाएं उपज रही हैं जिन्हें दूर किया जाना आवश्यक है।
मैं मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से आग्रह करता हूं कि इस नए खुलासे के बाद अब 2024 व 2025 की सभी परीक्षाओं की भी गंभीरता एवं गहराई से जांच करवाई जाए। मुझे उम्मीद है कि युवाओं के भविष्य को देखते हुए सरकार तत्काल कदम उठाएगी।
🚨 संदीप चौधरी ने BJP की विदेश नीति उधेड़ दी!
📢 संदीप:
50% नहीं, अब 500% टैरिफ की धमकी।
बाज़ार धड़ाम, रुपया 90 पार।
अमेरिका आँखें दिखा रहा,
और हम चीन से गले मिल रहे!
वही चीन - गलवान में 20 जवान शहीद।
इसे कूटनीति नहीं, विफलता कहते हैं 😡