@SureshMato59070@VishalBihar_ गलत टिप्पणी है, भाई जी। ये सामान्य बातें हैं। ऐसे कारनामे हिन्दू लड़के भी हिन्दू लड़की से शादी करके करते रहें हैं, उन्हें आप क्या कहेंगे ? एक मुस्लिम लड़के ने कर दिया तब घटना को इतनी तूल दी जा रही है। जबकि ऐसे हजारों घटनाएं आएदिन हमारे समाज में घटित हो रही हैं।
@ErDurgeshPande7@royalvishal51 जाति हटाने की आंदोलन की अगुवाई आप करो। आज तक क���सी ब्राह्मण ने बिना किसी स्वार्थ के समाज सुधार के लिए कोइ आंदोलन नही किया, आप करो इतिहास पुरुष बनने का सौभाग्य भी मिलेगा।
@sdwivedi2010d@Profdilipmandal इससे पहले जाति बनाने वाले मुर्दाबाद, मंदिरों मे ब्राह्मणो की शतप्रतिशत आरक्षण मुर्दाबाद,
भगवान सभी का है, मंदिरों मे सभी वर्ग पुजारी बने, ट्रस्टी बने। यह केवल ब्राह्मणों की बपौती नही होनी चाहिए।
@nareshlavania@ashokgehlot51 आरक्षण गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है, जो इसकी आर्थिक व्याख्या की जाये, यह केवल् प्रतिनिधित्व का मामला है। हा समीक्षा जरूर होनी चाहिए की आरक्षण के इतने साल ब���द भी देश् के सभी संस्थानों मे आरक्षित वर्ग की भागीदारी जनसंख्या के अनुपात मे इतनी कम क्यों है ?
जिस कदर सत्तारूढ़ दलों द्वारा लोकतंत्र को बाधित करने की कोशिश की जाती रही है, या सत्ता का दुरुपयोग किया जाता है, उससे निष्पक्ष चुनाव कतई संभव नहीं है। इसलिए किसी भी राज्य या संघ के चुनाव पूर्व न्यूनतम 45 दिन या 3 माह के लिए राष्ट्रपति शासन लगा देनी चाहिए।
@Profdilipmandal आडवानी जी इतने भी अस्वस्थ तो नही लग रहे कि वे दो कदम चल भी न पा रहे हों। भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान राजभवन से ही दिया जाना गौरवपूर्ण होता। खैर वहां भी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी के लिए तीसरी कुर्सी भी नहीं रखी गई है। मोदी है तो सब मुमकिन है।
@Profdilipmandal शापत, ताड़त पुरुष कहंता, विप्र पूज्य अस गावही संता।। रामचरितमानस की इस पक्त्ति का ही व्याख्या कर रहा है, वह ब्राह्मण, जो तुलसीदास दुबे नामक एक दूसरे ब्राह्मण ने लिखी है। किसी झूठ को कितनी जोर से कितनी बार बोला जाए आखिर वो झूठ ही रहेगा।
@Profdilipmandal@analp_chandra दलित कभी जातिवाद के समर्थक नहीं रहे, जो उनको समझाने की जरूरत थी। गांधी जी को काम उनके बीच करना चाहिए था, जो समाज में जातिवाद क��� जहरीला बीज बोते हैं, उसे पोषित करते हैं, उसकी निरंतरता बनाए रखने के लिए हमेशा प्रयासरत रहते हैं।
@Profdilipmandal@analp_chandra गांधी जी का दलितोत्थान को लेकर सारे कार्य छलावा के अतिरिक्त कुछ नहीं था। जातिवाद पे असली हथौड़ा तो अंग्रेजों और बहुजन महापुरुषों ने ही चलाया। गांधी यदि सच्चे मन से दलितों के ह��मायती थे तो उनको दलितों के बस्ती में नहीं सवर्णों के बस्ती में जाकर कार्य करना चाहिए था।
@theHindu_Sena@Profdilipmandal संविधान के पहले तो आरक्षण नहीं था, फिर बाबा साहब खुद किस जातिवाद का दंश झेले ?ज्ञान बघारने के पहले थोड़ा इतिहास पे भी नजर डाल लिया करो महोदय। एकलव्य को गुरु द्रोण ने क्यों शिक्षा से मना किया?कर्ण को सूत पुत्र कहके किसने प्रतिस्पर्धा से वंचित किया? जातिवाद हिंदू धर्म के मूल में है
@Profdilipmandal सूर्य और चंद्रग्रहण जैसे सामान्य भौगोलिक घटनाओं की व्याख्या राहू- केतु ग्रसने जैसे काल्पनिक कहानियों ��े करने वालों की सोच कभी वैज्ञानिक नहीं हो सकती और न ही इनकी मानसिकता शुद्ध।
@ajayamar7@Profdilipmandal राष्ट्र के संसाधनों पर भागीदारी एवम उसके वितरण पर जातीय विश्ले��ण कर पाना आम आदमी के बूते की बात नहीं, पढ़े लिखे ज्ञानी लोग ही कर पाएंगे। इसके लिए आदरणीय प्रोफेसर दिलीप मंडल जैसे पैनी नजर के विद्वान परफेक्ट हैं।
👉सूचना का अधिकार #RTI खत्म
👉इलेक्शन कमीशन खत्म
👉संविधान रख दिया गया अलमारी में
👉संवैधानिक संस्थाओं में लग गए ताले
👉रेलवे स्टेशन हवाईअड्डे बेच दिए गए
👉एलआईसी और बैंक खतरे में
👉कानून का मतलब सिर्फ बुलडोज़र
👉भीड़ न्याय कर रही चौक चौराहे पर
👉ईडी आईटी सीबीआई गुलामी कर रहे
सवाल यह है देश की दशा औऱ दिशा उसे कहाँ ले जाएगी?
हम छत्तीसगढ़िया मन के आप अभिभावक हैं और सच में आपको अपन भतीजा, भतीजी मन से प्यार हे ता एक सौगात 15 अगस्त के दिन जरूर देहो कका, ये स्टाइपेंड प्रणाली ला खत्म करके। फेर हमन भी ये दिन दोहरी खुशी साथ नाचबो आऊ गाबो " कका जिन्दा हे रे"
@_Puja___ @Profdilipmandal आरक्षण प्रतिनिधित्व का मामला है। ताकि देश के संसाधनों में हर वर्ग, लिंग, धर्म, समुदाय के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। जात पात से उसको कोई लेना देना नहीं। यह सदियों से अधिकार वंचित लोगों को मुख्यधारा में लाने का संवैधानिक तकनीकि उपाय है।
@im_abhi_s@Profdilipmandal याने आप चाहते हैं कि न्यायायिक शिखर पर केवल ब्राह्मण बैठे और बाकी 97% जनता के लिए फैसले गढ़ें। मंदिरों में भी सारे वैदिक मंत्रों को कंठस्थ किया हुआ या संस्कृत में पीएचडी किया हुआ sc/st/obc का व्यक्ति पुरोहित नहीं बन सकता। ठीक ऐसे ही कोलेजियम का हाल है।