देश भर के तीन दर्जन से भी अधिक कहानिकारों की कहानियों में से सर्वश्रेष्ठ तीन का चुनाव बेहद मुश्किल और जिम्मेदारी का कार्य था। सम्मानीय निर्णायक मंडल ने बड़ी ही कुशलता व निष्पक्षता से इन कहानियों को चुना है।
हिंदू कानून ‘मनुस्मृति’ पर आधारित है, वे असल में गलत हैं, क्योंकि भारत का ज्यादातर हिस्सा ‘मिताक्षरा’ विचारधारा को मानता है, जो ‘याज्ञवल्क्य स्मृति’ पर आधारित है।
#नवभारतटाइम्स
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शनिवार को कहा कि हिंदू कानून को ‘मनुस्मृति’ से जोड़ना एक गलतफहमी है, क्योंकि असम और बंगाल को छोड़कर ज्यादातर हिंदू ‘मिताक्षरा’ विचारधारा को मानते हैं। ‘प्राचीन ज्ञान और कानूनी समझ’ पर एक लेक्चर देते हुए मेहता ने कहा कि जो लोग यह आरोप लगाते हैं कि
पाकिस्तानी आतिफ़ असलम हर साल भारत आता था D गैंग और बालीबुडिया दल्लों के कारण आतिफ़ असलम भारतीय शो से 1-2 करोड़ रुपये कमाते था आतिफ़ असलम आखिरी बार 26 अप्रैल 2015 को इंदौर आया था आतिफ़ असलम अब UK में हर शो के लिए 72 पाउंड कमाता है
जब से भारत ने पाकिस्तानी कलाकारों को कॉन्सर्ट के लिए बुलाना बंद किया है, तब से उनका हाल देखिए
ये पाकिस्तानी कलाकार यहाँ आते थे, खूब पैसे कमाते थे और वापस पाकिस्तान जाकर भारत को बुरा-भला कहते थे
यहाँ आतिफ़ असलम सड़कों पर गाते हुए (busking करते हुए) दिखा और कोई भी उन पर ध्यान नहीं दे रहा है
भारत के बिना यही उनकी असल औकात है
🇵🇰😎🤣🇬🇧
कवियों,रंगकर्मियों कलाकर्मियों एवं सांस्कृतिकदूतों ने सदैवसे सभ्यता और संस्कृति का संरक्षण किया है,उसमें नएतथ्य जोड़े हैं तथा पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित, सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़ानेका कार्य किया है।आपके द्वारा इन्हें समायोजित व संयोजित करके मुख्यचैनल पर दिखाना बहुतही महत्वपूर्ण है।
@TV9Bharatvarsh प्रिंस ऑफ़ पर्शिया और इसके साथ जुड़े हुए इसके अन्य अंशों को आप राष्ट्रीय चैनल पर दिखा रहे हैं, इसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। वास्तव में इतिहास के ऐसे अंशों को आप हम सबके सामने ला रहे हैं, जो स्वागत योग्य है। आपके इस कदम की जितनी तारीफ की जाए वह उतना ही काम है।
फारसकी खाड़ीके राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उनवान को बहुत ही व्यवहारिक एवं व्यवस्थित तरीकेसे आपके द्वारा दिखाया जाना संभवत अतीतको वर्तमानके साथ जोड़ने का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।इसके लिए आपके द्वारा जिस तरह से तथ्यों का अन्वेषण किया गया है, संदर्भों का संचयन किया गया है, उत्कृष्ट है।
वे सिर्फ़ जिहाद के लिए जीते और मरते हैं। लेकिन मीडिया और वामपंथी इकोसिस्टम हमसे यह उम्मीद करते हैं कि हम यह मानें कि कश्मीरी पंडितों का नरसंहार महज़ एक मनगढ़ंत कहानी थी और आतंकवाद का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है।
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पिछले24घंटों में कश्मीर में क्या हुआ:
•बिजली विभाग के कर्मचारी मोहम्मद शफी को लश्कर के आतंकवादियों को पनाह देने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया।
•वन विभाग के कर्मचारी तारिक अहमद को जैश के आतंकवादियों को लॉजिस्टिकल मदद देने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया।
• हिज़्बुल के तीन आतंकवादियों - एज़ाज़ अहमद, अरबाज़ अहमद और नासिर अहमद - को ग्रेनेड और विस्फोटक के साथ गिरफ़्तार किया गया।
इन सभी कश्मीरी मुसलमानों के पास सरकारी नौकरी और सरकारी फ़ायदे थे, और उनका करियर भी स्थिर था, फिर भी उन्होंने जिहाद का रास्ता चुना।
सिर्फ BJP का झंडा थामने पर 13 साल के बच्चे को अभिषेक बनर्जी ने उम्रकैद करवा दी थी! आज वह मासूम प्रेसीडेंसी जेल से रिहा हो गया है।
बंगाल में राष्ट्रवादियों पर ऐसा घोर अत्याचार? लेकिन याद रहे, सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं! 🚩
बांग्लादेश में मजहबी भीड़ द्वारा भगवान राम का अपमान और राममूर्ति के काम को रुकवाने के विरोध में |
बांग्लादेश की राजधानी ढाका की सड़कों पर लाखों हिंदुओं की भीड़ उतर कर भयंकर विरोध कर रही है |
भारत के हिंदुओं अगर हो सके तो इनके संघर्ष को सोशल मीडिया से बैकअप जरूर दे देना | ✊
हरिद्वार में लगभग 40 साधु पकड़े गए जो बिरयानी खाते थे.
छान बिन के बाद पता चला कि...
ये सब मु@ल्ले थे.
सनातन को बदनाम करने का हर प्रकार साजिश चलाते है
ये हलाला पुत्र
जिसका हम दूध पीते हे वो हमारी मां हे गौमाता
और उसकी रक्षा करना हमारा धर्म
मुस्लिम जज द्वारा 14 हिंदू गौरक्षकों को उम्र कैद सजा
ऐसा लगा फ़ैसला भारत में नहीं पाकिस्तान में हो रहा
हिंदुओं आज शांत रहे तो इतिहास में कायर कहलाएंगे या अगला नंबर हमारा होगा आवाज रुकनी नहीं चाहिए
पहले आप क्रोनोलॉजी समझिए...!
1. 15 अगस्त 1947 से पहले, जब 2 सितंबर 1946 को 'अंतरिम सरकार' (Interim Government) बनी थी, तब नेहरू जी का आधिकारिक पद 'वायसराय की कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष' (Vice-President of the Viceroy's Executive Council) था।
तो नेहरू जी 2 सितंबर 1946 से लेकर 13 मई 1952 से तक भारत के प्रधानमंत्री कहे जाते थे, पर कहीं किसी सरकारी कागज में उनको प्रधानमंत्री बनाया नहीं गया था। वे तब उसी तरह से बिना किसी संवैधानिक दर्जे के प्रधानमंत्री थे,