"बहुत शर्मनाक है कि इतने लोगों की रिक्वेस्ट के बाद भी धर्मेंद्र प्रधान जी इस्तीफा नहीं दे रहे हैं", स्टूडेंट्स ने कहा
◆ देखिये माहौल क्या है, राजीव रंजन के साथ
◆ पूरा शो: https://t.co/06A9UlZL70
#MaholKyaHai | #MKH | @rajeevranjanMKH
छपरा स्टेशन पर एक बच्ची को इसी ट्रेन का ये लड़का खुद को स्टाप (TTE ) बता रहा है और उस बच्ची का समस्तीपुर से ही पीछा कर रहा है बच्ची के साथ कोई भी नहीं है अकेले ही जा रही थी तो ये लड़का उसको काफी परेशान कर रखा था और उसको डरा रखा था
उसे डरा-धमका रहा था और शौचालय की ओर ले जाने की कोशिश कर रहा था। आप सब बिल्कुल देख सकते हैं बच्ची ने जाने से इनकार किया, जिसके बाद उसे ले जाकर उसके साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई।
इसकी जानकारी स्टेशन पर जो RPF रहते हैं उसे कदी गई, जो वहां मौजूद थे, ट्रेन रूकी और फिर उस लड़का को भगा दिया पुलिस वाले ने ही...!! क्या ये सही है उस लड़के ने जो किया उसके लिए इतनी सजा काफी है??
ये बच्ची काफी डरी हुई थी,ट्रेन के कोच में मौजूद बाकी सहयात्री शुरुआत में चुप क्यों रहे?
जब एक बच्ची पर हमला हो रहा था, तो पूरे कोच ने मिलकर उस अपराधी को तुरंत दबोच क्यों नहीं लिया?
एक सार्वजनिक जगह पर एक लड़का इतनी हिम्मत कैसे कर लेता है कि वह एक बच्ची को डराए-धमकाए और बात न मानने पर हाथ उठाए?
अपराधियों के मन से कानून और पुलिस का डर पूरी तरह क्यों खत्म हो गया है?
लोकतंत्र एक बार फिर शर्मसार!
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक जी को सादा कपड़ों में पहुँचे पुलिसकर्मियों द्वारा जबरन अस्पताल ले जाना तथा उनके साथियों के साथ मारपीट कर उन्हें हिरासत में लेना अत्यंत निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है।
इससे पहले वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर महीनों तक धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों के साथ भी यही हुआ। देश का गौरव बढ़ाने वाली महिला पहलवानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को भी इसी तरह बलपूर्वक हटाया गया। अब सोनम वांगचुक जी के सत्याग्रह के साथ भी वही व्यवहार किया जा रहा है।क्या शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार केवल सत्ता की सुविधा तक ही सीमित रह गया?
हम प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि सोनम वांगचुक जी को उत्तम स्वास्थ्य, शक्ति और दीर्घायु प्रदान करे।
#SonamWangchuk
@abhijeet_dipke 𝗖𝗝𝗣 Protest – Day 27 | Jantar Mantar 📍
📷 दिल्ली मेट्रो में छात्रों का संदेश: - "माँ-बाप लोन लेकर पढ़ाते हैं, लेकिन कथित '94 पेपर लीक' जैसे दावों ने लाखों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।" 📷 😢
The media that ignored Jantar Mantar protest all this time has finally arrived.
Their first job? Smear the protest with baseless propaganda. Just look at this ABP News reporter.
चन्द्रशेखर आजाद के अलावा सभी नेताओं ने अपनी सरकारों में जमकर भ्रष्टाचार किये हैं और उन सबकी कमजोर नब्ज भाजपा ने पकड़कर रखी है। यही कारण है कि चन्द्रशेखर के अलावा कोई नेता खुलकर सामने नहीं आ रहा है 🚫
अगर आप मेरी बात से सहमत हैं तो इस बात को शेयर करके देशभर में फैला दो...!!
केन–बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी पिछले कई वर्षों से उचित मुआवज़े, सम्मानजनक पुनर्वास और अपने संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस वर्ष अप्रैल में भी प्रभावित परिवारों ने आंदोलन किया था। तब प्रशासन द्वारा समझा-बुझाकर आंदोलन समाप्त करा दिया गया था, लेकिन मांगें पूरी न होने के कारण अबकी बार वे आखिरी तक लड़ने के जज़्बे के साथ आंदोलन के 14वें दिन भी चिता सत्याग्रह, जल सत्याग्रह, मिट्टी सत्याग्रह तथा प्रतीकात्मक फांसी सत्याग्रह के माध्यम से अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि अपनी लोकतांत्रिक आवाज़ उठाने पर उन्हें शासन-प्रशासन द्वारा तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है।
आंदोलनकारी आदिवासियों का आरोप है कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 तथा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि कई प्रभावित परिवारों के घरों को बिना पर्याप्त पूर्व सूचना ध्वस्त कर दिया गया। इसके साथ ही मुआवज़े के निर्धारण और वितरण में अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आए हैं।
उनका यह भी कहना है कि उन्हें दिया जा रहा मुआवज़ा वास्तविक नुकसान की तुलना में बेहद अपर्याप्त है। इस राशि से न कहीं और सम्मानजनक ढंग से बसना संभव है, न रहने के लिए घर की समुचित व्यवस्था हो सकती है, न आजीविका का स्थायी साधन जुटाया जा सकता है और न ही बच्चों की शिक्षा एवं परिवार के भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। उनका यह भी कहना है कि जिन स्थानों पर उनका पुनर्वास किया गया है, वहाँ बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने अपने अस्तित्व और भविष्य का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
यदि विकास के नाम पर लोगों को उनकी पुश्तैनी जमीन, घर, आजीविका और सामाजिक जीवन से विस्थापित किया जाता है, तो यह सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को न्यायपूर्ण एवं पर्याप्त मुआवज़ा, सम्मानजनक पुनर्वास, मूलभूत सुविधाओं से युक्त पुनर्वास स्थल, वैकल्पिक आजीविका तथा कानून के अनुरूप सभी अधिकार सुनिश्चित किए जाएँ।
मैं शीघ्र ही अपने इन परिवारों से मिलने उनके बीच जाऊँगा। मेरा वादा है कि उनकी आवाज़ बनकर इस पूरे मामले को लोकसभा में पूरी मजबूती के साथ उठाऊँगा।
@MP_MyGov को आंदोलनरत आदिवासी परिवारों के साथ संवेदनशीलता और गंभीरता से संवाद कर उनकी जायज़ मांगों का शीघ्र समाधान करना चाहिए। विकास तभी सार्थक है, जब वह न्यायपूर्ण, पारदर्शी, सहभागी और मानवीय हो; न कि आदिवासियों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की कीमत पर।
दिल्ली से बड़ी खबर 🚨
- देर राथ CJP फाउंडर Abhijeet Dipke ने नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद जी के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की
- कल जंतर-मंतर पर पहुंचेंगे चन्द्रशेखर आजाद।।