आदरणीय मुख्यमंत्री #डॉ मोहन यादव जी आप
यह स्वीकार कर लिया है कि #शिक्षा ही प्रगति
का आधार है।तब उच्च शिक्षा में कार्यरत
#अतिथि विद्वानों से महापंचायत में किया गया।
वादा ���ूरा कीजिए। अभी भी आप से बहुत उम्मीदें हैं।
आदरणीय मुख्यमंत्री #डॉ मोहन यादव जी आप
यह स्वीकार कर लिया है कि #शिक्षा ही प्रगति
का आधार है।तब उच्च शिक्षा में कार्यरत
#अतिथि विद्वानों से महापंचायत में किया गया।
वादा पूरा कीजिए। अभी भी आप से बहुत उम्मीदें हैं।
इस मुद्दे को सुलझाने के लिए सरकार को अतिथि विद्वानों के लिए स्थायी समाधान निकालना होगा,जिससे उनकी नौकरी की स्थिरता और उनके अधिकार सुनिश्चित हो सकें। घोषणाओं को लागू करने में देरी न केवल अतिथि विद्वानों के लिए हानिकारक है,बल्कि यह शिक्षा प्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
मध्य प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि विद्वानों की समस्याएं और उनके साथ हो रहे अन्याय और शोषण का मुद्दा लंबे समय से चर्चा म���ं है। तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महापंचायत में जो घोषणाएं की थीं, वे अभी भी पूरी तरह से लागू नहीं हुई हैं।
@ChouhanShivraj
आदरणीय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी सब से भेट कीजिए ।लेकिन एक प्रार्थना है कि अतिथि विद्वानों की 50 हजार फि���्स वेतन और 65 वर्ष तक स्थायीत्व वाली घटनाओं को लागू कीजिए।
आज नागपुर में डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति पहुंचने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक परम पूज्य, श्रद्धेय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।
इस अवसर पर संघ के सम्माननीय पदाधिकारी गणों एवं सदस्यों से भेंट अत्यंत सुखद रही।
@rashtrapatibhvn मान्यवर @BJP4India@BJP4MP@narendramodi 25 साल के अनुभवी अतिथि विद्वानो के पास आय का स्रोत यही है जिससे परिवार को रोजी-रोटी कमा कर देता है जीवन निर्वाह के लिए नौकरी मे रहना जरूरी है परंतु ट्रांसफर और नई नियुक्ति से बेरोजगार हो जाएंगे बच्चो के भविष्य के लिए नौकरी को स���रक्षित करे
अतिथि विद्वानों का उच्च शिक्षा में योगदान और समर्पण बहुत महत्वपूर्ण रहा है और उन्हें इसके लिए उचित सम्मान और प्रतिफल मिलना चाहिए। इ��से न केवल उनके साथ न्याय होगा,बल्कि भविष्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में और भी उत्कृष्ट योगदान देने के लिए उन्हें प्रेरणा मिलेगी। #अतिथिविद्वान
घोषणा हुई थी शिवराज जी एवं मोहन जी की रिक्त पदों पर कार्य कर रहे अतिथि विद्वानों को नियमित/स्थाई/समायोजन करने की एवं फिक्स वेतन की लेकिन हुआ क्या फिर भाजपा ने अतिथि को अतिथि ही बना दिया।शर्म कर�� सरकार।विद्वानों को नियमित कर वादा पूरा करो।कही ये भी तो जुमला नहीं??कोरी महापंचायत