सवर्ण समाज के अलंबरदार कहां हैं?
केंद्रीय शासन के संरक्षण में UGC की वर्तमान स्थिति पर मौन की स्थिति शर्मनाक की श्रेणी में आती है या नहीं?
देश का सवर्ण समाज इस कानून पर मौन क्यों हैं?
अपनी स्थिति स्पष्ट करें सवर्ण समाज।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं वेदपाठी बटुकों के साथ हुए अमानवीय, घृणित कृत्य भारतीय जनता पार्टी के हिन्दुत्व और छद्म राष्ट्रवाद की प्रासंगिकता पर प्रश्न चिन्ह क्यों नहीं लगना , या लगाना जाना चाहिए?
देश मौन क्यों हैं?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज तथा बेदपाठी बटुकों के साथ किया गया घृणित कार्य पर भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व मौन क्यों हैं, और मौन का कारण क्या है?
उत्तर प्रदेश का शासन , प्रशासन तत्काल प्रभाव से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज से क्षमा याचना करते हुए, सभी दोषी उच्च पदस्थ अधिकारियों को को तत्काल दण्डित करते हुए, उनसे जवाबदेही सुनिश्चित करें।
क्या श्रद्धेय शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज का यह प्रश्न किया जाना गलत है कि एक मठ का महंत रहते हुए कोई व्यक्ति संविधान की शपथ लेकर अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा के तहत किसी संवैधानिक पद पर आसीन हो सकता है?
क्या यह प्रश्न किया जाना गलत है?
क्या भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं को इस बात पर तनिक भी लज्जा आती है कि इस विषय पर भी गोल गोल बात करके स्वयं को और देश की जनता को समूचे विश्व में लज्जित नहीं कर रहे है?
क्या शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज की सत्ता को भारतीय जनता पार्टी के द्वारा चुनौती नहीं दी जा रही है?
देश में सनातन का झंडा उठाकर चलने वाले, हिन्दुत्व की आवाज लगाने वाले कहां गुम हैं?
इस देश में ब्राह्मण समाज की दुकानदारी चलाने वाले, इस बात पर मौन क्यों हैं कि बटुकों की शिखा खींचते हुए, घसीटने वालों को भा ज पा संरक्षित क्यों कर रही है?
वर्तमान परिवेश में दंभी राजनैतिक किरदारों का उदय कैसे राजनैतिक पार्टियों को अस्पृश्य बनाता चला जा रहा है, इसकी बानगी सामाजिक अस्थिरता, मूल्यों का क्षरण, सिद्धांतविहीनता, सस्ती होती जा रही शब्दावली, इससे भारत की राजनैतिक छाती कैसे चौड़ी हो सकती है, एक प्रश्न है?
जिसका विचार हरेक भारतीय को करना है।
जय हो!!
अर्श से फर्श तक!!!
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय एक ऐसा विश्वविद्यालय जिसकी पहचान कभी एशिया की बेहतरीन विश्वविद्यालय में थी और सम्पूर्ण विश्व की तीसरी विश्वविद्यालय में शुमार थी।
इसकी पहचान भारत की स्वतन्त्रता आन्दोलन से भी थी। स्वर्गीय पण्डित मदन मोहन मालवीय जी की इस कृति से अनेकानेक महापुरुषों का जुड़ाव रहा है।
कभी यहां डॉ० राजेंद्र प्रसाद जी, स्वर्गीय श्री राधाकृष्णन जी, सरसुंदर लाल जी, डॉ० कर्ण सिंह जी एवं अनगिनत महापुरुषों ने अपनी सेवाएं दी है।
यहां यह भी संदर्भित करना आवश्यक हो जाता है कि विराट कद एवं व्यक्तित्व के सापेक्ष बड़े बड़े पदों की कुर्सियां भी छोटी हो जाती थीं। आज उसी विश्वविद्यालय की अहमियत केन्द्र सरकार की शासन सत्ता की गलत नीतियों के कारण कभी दूसरी ऑक्सफोर्ड की संज्ञा से विभूषित की जाने वाली यह संस्था आज महज एक डिग्री कालेज बना दिए जाने की दहलीज पर आ कर खड़ी हो गई है।
कभी यहां के एक्सक्यूटिव कौंसिल के सदस्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के महान चिन्तक एवम शिक्षाविद हुआ करते थे, आज इस विश्वविद्यालय के कार्यकारिणी के ऐसे सदस्य है जो प्राथमिक पाठशालाओं में भी नामांकित होने की काबिलियत नहीं रखते। आज की परिस्थिति में इस विश्वविद्यालय की पहचान यह हो चुकी है कि अपने आपको यहां के एलुमनाई होने पर शर्म महसूस होता है। इसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ वर्तमान की केन्द्रीय सरकार की नीतियां है।
यदि इस विश्वविद्यालय की पहचान और गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखना है तो देश के तथाकथित बुद्धिजीवियों को छोड़ कर वास्तविक मायने में शिक्षाविद, बुद्धिजीवी, ईमानदार राजनैतिक नेतृत्व को सामने आना होगा, और इस विश्वविद्यालय के अस्तित्व की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने होंगे, नहीं तो वो भी समय दूर नहीं, जब इस विश्वविद्यालय को पहचान का संकट भी उत्पन्न होने का समय दूर प्रतीत नहीं होता।
चिन्तन कीजिए कि देश के शिक्षण संस्थाओं की स्थिति कहां से कहां पहुंच चुकी है।
शुक्रिया!!!
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भारतीय जनता पार्टी भाषाई आतंकवाद और साहित्यिक शब्दों के मायाजाल के सिवा कुछ नहीं।
जी एस टी राष्ट्र के साथ छलावा सिद्ध हुआ।
आज दिनांक २४/०९/२०२५ को डॉक्टर मनीष कुमार उपाध्याय ( पूर्व राष्ट्रीय महासचिव, अखिल भारतीय युवक कांग्रेस एवम सदस्य, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली) ने एक वृहद बयान जारी कर कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए जिस प्रकार से जी एस टी में किए गए अपनी सरकार के द्वारा संशोधनो को बढ़ा चढ़ा कर दावे कर रही हैं, और उन संशोधनों को उत्सव के रूप में मनाने के लिए देशवासियों को प्रेरित करने का प्रयास कर रही है उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उनके नेतृत्व में उनकी सरकार द्वारा पूर्व में लिए गए जी एस टी लागू करने का निर्णय स्वस्फूर्त पूर्ण रूप से असंवैधानिक और गलत नीतियों का परिणाम साबित हो गई है उनके आठ साल पहले के लिए गए निर्णयों के कारण देशवासियों से जिस बाइस लाख करोड़ रुपए की लूट वर्तमान सरकार के द्वारा की गई है उसकी भरपाई देश और प्रदेशों की सरकार किस प्रकार से करेंगी यह अपने आप में यक्ष प्रश्न है, यह तो सर्वविदित है कि आ एस एस और उसकी अनुवांशिक संगठन जिस प्रकार दृढ़ता पूर्वक झूठ बोलने और प्रचारित करने का माद्दा उनके पास है वो विश्व के किसी भी राजनैतिक पार्टी और सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन के पास नहीं है।
डॉक्टर उपाध्याय ने भारतीय जनता पार्टी और आर एस एस को भाषाई आतंकवाद और साहित्यिक शब्दों के मायाजाल के सिवा कुछ नहीं कि संज्ञा देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी छद्म राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को गलत तरीके से परिभाषित करने की जननी के रूप में पूरे विश्व में जानी जाती है, इससे इस संगठन का ज्ञान शील एकता और चाल चरित्र चेहरा को भी परिभाषित करती है जिसकी कीमत पूरे राष्ट्र को विश्व पटल पर चुकानी पड़ रही है।
वर्तमान में भारत की जनता असामान्य जीवन व्यतीत करने के लिए मजबूर है, जहां एक ओर महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार से देश की बहुसंख्य आबादी त्राहि त्राहि कर रही है एवम जिस प्रकार से समाज में असमानता चरमोत्कर्ष पर है, यह सभी संदर्भित कारण से देश की जनता अकारण दुश्वारियां भुगतने के लिए मजबूर है।
सधन्यवाद!
भवदीय
डॉ० मनीष उपाध्याय
पूर्व राष्ट्रीय महासचिव
अखिल भारतीय युवक कांग्रेस
नई दिल्ली
स्वतंत्र पत्रकार एवं सदस्य
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया
नई दिल्ली
दिनांक -
२५/०९/२०२५
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The Bharatiya Janata Party is nothing but linguistic terrorism and a maze of literary words.
The GST has proved to be a deception with the nation.
On 25/09/2025, Dr. Manish Kumar Upadhyay (Former National General Secretary, Indian Youth Congress, and Member, Press Club of India, New Delhi) issued a comprehensive statement, saying that the way Prime Minister Shri Narendra Damodardas Modi, while addressing the nation, exaggerated the amendments made by his government in GST and tried to inspire the citizens to celebrate those amendments as a festival, it has become clear that under his leadership, the earlier decision to implement GST was spontaneous, completely unconstitutional, and a result of wrong policies.
Due to the decisions taken eight years ago, the loot of 22 lakh crore rupees from the citizens by the present government has raised a serious question: how will the central and state governments compensate for this colossal loss?
It is well-known that the RSS and its affiliate organizations possess such a strong ability to lie and spread propaganda that no other political party or social and cultural organization in the world can match them.
Dr. Upadhyay described the Bharatiya Janata Party and RSS as nothing more than linguistic terrorism and a maze of words, further stating that the BJP is known across the world as the originator of pseudo-nationalism and for misrepresenting Hindutva. This also defines the so-called wisdom, unity, character, and face of this organization, the cost of which the entire nation is paying on the global stage.
At present, the people of India are forced to live an abnormal life. On one hand, the majority of the population is suffering under the burden of inflation, unemployment, and corruption; on the other, inequality in society is at its peak. For all these reasons, the citizens of the nation are compelled to bear unnecessary hardships.
Thank you.
Yours sincerely,
Dr. Manish Upadhyay
Former National General Secretary
Indian Youth Congress
New Delhi
Independent Journalist & Member
Press Club of India
New Delhi
Date: 25/09/2025
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