10.कप्तान एक ब्राह्मण को बनाया गया मनुवादी व्यवस्था क़ायम करने के लिए
11. विपक्ष टीम की जीत हुई है संविधान की जीत हुई है अगर तीसरी बार ये जीत हो जाते तो संविधान आरक्षण सब ख़त्म हो जाता मूल निवासी मेज़बान की ज़मीन छीन ली जाती और फिर कभी विश्व कप नहीं होता
@theskindoctor13 ये इंडिया की नैतिक हार है, तानाशाही और अहंकार की हार है खेलतंत्र की जीत है क्योंकि
1. सबसे पहले तो लेवल प्लेयिंग नहीं था अमीर BCCI के सामने लड़ाई थी
2. जय शाह ने 6माह पहले बोला की बारबाडोस में हम जीतेंगे मतलब विपक्ष को पहले ही डराया गया होगा वरना कैसे पता चला
8. बार बार लाँच होकर फैल होने वाली टीम चोकर्स से फ़ाइनल मुक़ाबले के रखा ताकि आराम से जीत सकें परन्तु फिर भी जैसे जीतना चाहते थे वो नहीं कर पाए
9. पहली बार विश्व कप जीत 43 रन से, दूसरी बार 6 विकेट से 10 बॉल शेष
और इस बार मैच की अंतिम बॉल तक जैसे तैसे
ECI data reveals that DMK received ₹656.5 crore through electoral bonds and they received ₹509 crore from lottery king Santiago Martin's Future Gaming who bought maximum bonds worth ₹1,300 crore.
Now opposition can't corner BJP as their own partner received huge amount from Martin.
श्री राम
भारत की आस्था हैं, राम भारत का आधार हैं।
राम भारत का विचार हैं, राम भारत का विधान हैं।
राम भारत की चेतना हैं, राम भारत का चिंतन हैं।
राम भारत की प्रतिष्ठा हैं, राम भारत का प्रताप हैं।
राम प्रवाह हैं, राम प्रभाव हैं।
राम नेति भी हैं। राम नीति भी हैं।
राम नित्यता भी हैं। राम निरंतरता भी हैं।
राम विभु हैं, विशद हैं।
राम व्यापक हैं, विश्व हैं, विश्वात्मा हैं।
राम आग नहीं, राम ऊर्जा हैं।
राम विवाद नहीं, राम समाधान हैं।
राम सिर्फ हमारे नहीं हैं, राम तो सबके हैं।
राम वर्तमान ही नहीं, राम अनंतकाल हैं।
~ PM @narendramodi ‘s emotions will inspire generations
#RamMandirPranPrathistha
496 Years (Thread)
1528 - 2024
Journey of Prabhu Shri Ram in Ayodhya
Entire journey can be explained in seven timeframes
In this detailed research, You will read
- Details of all those seven timeframes
- Where was Ram in last 496 years and what happened in that time
1/13
#EXCLUSIVE
Mahua Moitra allegedly put illegal surveillance on her ex-boyfriend (other than Jai Anant) and his female friend.
Don't miss the big names!
A confidential complaint letter to CBI exposed the hypocrisy of the MP who has been vocal about 'Pegasus Story'!!
1/
सुनने मे आया है कि कल चिंदी गठबंधन की मीटिंग में पलटू चचा नितीश कुमार ने बवाल कर दिया..
हुआ ये कि उन्होंने हिंदी में भाषण दिया मीटिंग में, तो DMK वालों को कुछ पल्ले नहीं पड़ा, तो बेचारे बोल दिये की अंग्रेज़ी में ट्रांसलेट करा दो..चचा फट पड़े.. बोले हिंदी हमारी "राष्ट्रीय भाषा" है, सीखो इसको..
RJD के मनोज झा ने कहा भी कि चचा शांत हो जाइये, हम अंग्रेज़ी मे अनुवाद कर देते है, लेकिन चचा बोले कोई जरूरत नहीं..और DMK के लीडरों को "Colonial Remnants" कह दिया..
मतलब अंग्रेज़ों के टाइम के बचे हुए अवशेष..
😂😂😂😂😂😂😂
आसान भाषा में
"अंग्रेज़ी चले गए,औलादे छोड़ गए"।।
अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा
यह घटना सन् 1270-1280 के बीच की है । दिल्ली में बादशाह बलबन (1266–1287) का राज्य था । उसके दरबार में एक अमीर दरबारी था जिसके तीन बेटे थे । उसके पास उन्नीस घोड़े भी थे । मरने से पहले वह वसीयत लिख गया था कि इन घोड़ों का आधा हिस्सा... बड़े बेटे को, चौथाई हिस्सा मंझले को और पांचवां हिस्सा सबसे छोटे बेटे को बांट दिया जाये ।
बेटे उन 19 घोड़ों का इस तरह बंटवारा कर ही नहीं पाये और बादशाह के दरबार में इस समस्या को सुलझाने के लिए अपील की । बादशाह ने अपने सब दरबारियों से सलाह ली पर उनमें से कोई भी इसे हल नहीं कर सका । उस समय प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो बादशाह का दरबारी कवि था । उसने जाटों की भाषा को समझाने के लिए एक पुस्तक भी बादशाह के कहने पर लिखी थी जिसका नाम “खलिक बारी” था । खुसरो ने कहा कि मैंने जाटों के इलाक़े में खूब घूम कर देखा है और पंचायती फैसले भी सुने हैं और सर्वखाप पंचायत का कोई पंच ही इसको हल कर सकता है । नवाब के लोगों ने इन्कार किया कि यह फैसला तो हो ही नहीं सकता..! परन्तु कवि अमीर खुसरो के कहने पर बादशाह बलबन ने सर्वखाप पंचायत में अपने एक खास आदमी को चिट्ठी देकर गांव- सौरम (जिला- मुज़फ्फरनगर ) भेजा (इसी गांव में शुरू से सर्वखाप पंचायत का मुख्यालय चला आ रहा है और आज भी मौजूद है) ।
चिट्ठी पाकर पंचायत ने प्रधान पंच चौधरी रामसहाय सूबेदार को दिल्ली भेजने का फैसला किया। चौधरी साहब अपने घोड़े पर सवार होकर बादशाह के दरबार में दिल्ली पहुंच गये और बादशाह ने अपने सारे दरबारी बाहर के मैदान में इकट्ठे कर लिये । वहीं पर 19 घोड़ों को भी लाइन में बंधवा दिया ।
चौधरी रामसहाय ने अपना परिचय देकर कहना शुरू किया - “शायद इतना तो आपको पता ही होगा कि हमारे यहां राजा और प्रजा का सम्बंध बाप-बेटे का होता है और प्रजा की सम्पत्ति पर राजा का भी हक होता है । इस नाते मैं जो अपना घोड़ा साथ लाया हूं, उस पर भी राजा का हक बनता है । इसलिये मैं यह अपना घोड़ा आपको भेंट करता हूं और इन 19 घोड़ों के साथ मिला देना चाहता हूं, इसके बाद मैं बंटवारे के बारे में अपना फैसला सुनाऊंगा ।”
बादशाह बलबन ने इसकी इजाजत दे दी और चौधरी साहब ने अपना घोड़ा उन 19 घोड़ों वाली कतार के आखिर में बांध दिया, इस तरह कुल बीस घोड़े हो गये ।
अब चौधरी ने उन घोड़ों का बंटवारा इस तरह कर दिया-
आधा हिस्सा (20/2 = 10) यानि दस घोड़े उस अमीर के बड़े बेटे को दे दिये ।
चौथाई हिस्सा (20/4 = 5) यानि पांच घोडे मंझले बेटे को दे दिये ।
पांचवां हिस्सा (20/5 = 4) यानि चार घोडे छोटे बेटे को दे दिये ।
इस प्रकार उन्नीस (10 + 5 + 4 = 19) घोड़ों का बंटवारा हो गया ।
बीसवां घोड़ा चौधरी रामसहाय का ही था जो बच गया । बंटवारा करके चौधरी ने सबसे कहा - “मेरा अपना घोड़ा तो बच ही गया है, इजाजत हो तो इसको मैं ले जाऊं ?”
बादशाह ने हां कह दी और चौधरी साहब का बहुत सम्मान और तारीफ की । चौधरी रामसहाय अपना घोड़ा लेकर अपने गांव सौरम की तरफ कूच करने ही वाले थे, तभी वहां पर मौजूद कई हजार दर्शक इस पंच के फैसले से गदगद होकर नाचने लगे और कवि अमीर खुसरो ने जोर से कहा - “अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा”।
सारी भीड़ इसी पंक्ति को दोहराने लगी । तभी से यह कहावत हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व उत्तरप्रदेश तंथा दूसरी जगहों पर फैल गई।
यहां यह बताना भी जरूरी है कि यह वृत्तांत सर्वखाप पंचायत के अभिलेखागार में मौजूद है।
और बता दु उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी जाट है और पढ़े लिखे भी कांग्रेस वालों बच कर रहो ये ख़ुदा तुम्हारी क़ब्र खोद देगा
BREAKING JUST IN *
The cabinet has given green signal to the New Education Policy. After 34 years, there has been a change in the education policy. The notable features of the new education policy are as follows:
5 Years Fundamental:
1. Nursery @ 4 Years.
2. Jr KG @ 5 Years.