कवि, लेखक और स्तंभकार।दैनिक समाचार पत्रों में रचनाएं और लेख प्रकाशित होते रहते हैं।
पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक-औद्योगिक संबंध ,ल्यूपिन लिमिटेड।
सलाहकार: श्रम क़ानून।
@DmAmethi@cdoamethi@CMOfficeUP
पिछले आठ साल से मामले का निस्तारण नहीं हो सका । प्रधान के प्रभाव में कोई कार्रवाई नहीं की जाती, दस्तावेज़ और साक्ष्य होने के बावजूद झूठी रिपोर्ट लगाई जाती हैं, अधिकारी की कार्यवाही सिर्फ़ आश्वासन तक सीमित है, उनके निर्देश का पालन नहीं किया जाता।
शिखरवार्ता( मासिक पत्रिका )के संपा��क श्री कैलाश नारायण शर्मा जी को उनके कार्यालय में अपनी पुस्तक उपन्यास द्रोह भेंट करते हुए, और उन्होंने शिखरवार्ता जुलाई अंक पढ़ने के लिए मुझे भेंट किया ।
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पिछले आठ साल से (कृष्ण कुमार शुक्ला) जो मेरा छोटा भाई है, दौड़ रहा है, लेकिन मामले का निस्तारण नहीं हो पा रहा है, ग्राम प्रधान संग्रामपुर (अमेठी )की वजह से, कहते हैं कोई कुछ नहीं कर सकता मेरा ।सारे प्रमाण होने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।
@cdoamethi@DmAmethi@UPGovt
आज के दैनिक समाचार पत्र राष्ट्रवार्ता के विचार वार्ता परिशिष्ट में “चर्चा में आज”के कॉलम में मेरा लेख छपा है ।
यह लेख समाचार पत्र के ई -पेपर: https://t.co/MCvuGigNIO पर भी पढ़ सकते हैं ।
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राष्ट्रीय हिंदी दैनिक समाचार पत्र # दैनिक जागरण के आज के अंक के सप्तरंग (साहित्य और संगीत)परिशिष्ट में हमारी पुस्तक उपन्यास # “ द्रोह : नियति का न्याय “ की समीक्षा (डॉ.शोभा जैन)छपा है ।
क्या आपने पढ़ा है? आमेजन पर उपलब्ध है । लिंक नीचे दिया गया है । https://t.co/PHT2ky4eNA
आज के दैनिक समाचार पत्र “राष्ट्रवार्ता” क��� विचारवार्ता परिशिष्ट में छपा लेख पढ़िए । अपने विचार साझा करें ।समाचार पत्र के ई पेपर संस्करण पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:
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समय पत्रिका का जुलाई अंक
इस अंक में खास :
साक्षात्कार -
1. शब्दों का विवेक और डिजिटल दौर : डॉ. सुरेश पन्त
2. प्रकाशन की दुनिया धैर्य माँगती है : प्रयास कोठारी
3. पहले हम अंग्रेज़ों के गुलाम थे और आज सरकार के : डॉ. ओम प्रकाश शुक्ल
4. कहानियाँ तितलियों की तरह ख़ुद मेरी हथेलियों पर आकर बैठ जाती हैं : इरा टाक
5. रिश्ते वहीं तक सुंदर हैं जहाँ तक उनमें सम्मान जीवित है : डॉ. मंजरी शुक्ला
विशेष लेख -
₹5,600 करोड़ के भारतीय बाल पुस्तक बाजार के आंकड़ों के साथ समझिए कि कैसे आज की पीढ़ी 'डिजिटल डिटॉक्स' की ओर बढ़ रही है। प्रभात प्रकाशन के निदेशक पीयूष कुमार का बाल साहित्य के भविष्य पर एक खास और सटीक विश्लेषण.
साथ में नई किताबों की खास चर्चा.
जुलाई अंक पढ़िए : https://t.co/ApT8Z7XrH6