इतनी महंगाई के लिए भी एक दिया जलाइए… 🪔
आज एक तरफ़ साहब का जन्मदिन मनाया जा रहा है, दीये जलाए जा रहे हैं, जश्न की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं…
और दूसरी तरफ़ जिस घर में रसोई का तेल खरीदना मुश्किल हो गया है, वहाँ चूल्हा कैसे जलेगा?
जिस परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा राशन, दवा, बच्चों की फीस, गैस और रोज़मर्रा की जरूरतों में चला जाता है, उसकी परेशानी कौन दिखाएगा?
और बिहार को देखिए…
एक तरफ़ पानी में डूबे घर, बर्बाद फसलें और राहत का इंतज़ार करते 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
दूसरी तरफ़ उसी बिहार में जन्मदिन के अवसर पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने के कार्यक्रम हो रहे हैं।
सवाल जन्मदिन मनाने का नहीं है।
सवाल प्राथमिकताओं का है।
जब जनता महंगाई से परेशान हो,
जब बाढ़ में घर डूब रहे हों,
जब परिवार राशन और दवाइयों के लिए संघर्ष कर रहे हों-
तब मीडिया का कैमरा सिर्फ़ जश्न पर क्यों रहे?
एक दिया साहब के जन्मदिन के लिए सही…
लेकिन उस परिवार के चूल्हे के लिए ? जिसमें आज खाना बनाने के लिए तेल तक नहीं है।
जश्न मनाइए, शुभकामनाएँ दीजिए-
लेकिन जनता की तकलीफ़ को जश्न की रोशनी में छिपाइए मत।
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Pyara Rajasthan ❣️
India’s Best River Front
Chambal River Front, Kota
राजस्थान का कोटा हाल फ़िलहाल में विकसित हुए शहरों की अग्रणी पंक्ति में है, पूरे शहर में आपको एक भी ट्रैफ़िक सिग्नल नहीं है,फिर भी जाम लगते नहीं देखा। सड़कें एकदम चकाचक,लाइटें शानदार लगी हैं। लेकिन रीवर फ्रंट अलग ही लेवल का है। एक तरफ आपको भारतीय इमारतों की रिप्लिका और दूसरी तरफ विदेशी कारीगरी। बीच में चंबल माता की मूर्ति।
अफ़सोस है कि इसका प्रचार नहीं है,वरना राजस्थान घूमने का प्लान है तो आइटनरी में लोगों को इसे भी जोड़ना चाहिए। मारवाड़,मेवाड़ और बागड़ के अलावा हाड़ौती इलाके में बहुत ही ख़ूबसूरती बसी है। 🫶
बाक़ी आख़िर में वही यहाँ आपको लगता नहीं कि ये India है 😀
आज स्वास्थ्य महकमे में एक खतरनाक ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। झोलाछाप डॉक्टर से लेकर डिग्री वाले डॉक्टर तक हर जगह अपनी-अपनी पैथोलॉजी लैब खोल रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन लैब को अनुमति कौन देता है और इनके संचालन पर निगरानी कौन करता है।
देशभर में हजारों पैथोलॉजी लैब चल रही हैं और रोज़ लाखों ब्लड व डायग्नोस्टिक टेस्ट किए जा रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि बड़ी संख्या में इन लैब का कोई ठोस ऑडिट या नियमित निरीक्षण ही नहीं होता। मरीज को यह तक पता नहीं चलता कि रिपोर्ट कितनी भरोसेमंद है।
आज हालत यह है कि कई बुनियादी सवालों का जवाब देने वाला कोई नहीं है → टेस्ट सही तरीके से हुआ भी या नहीं → मशीनें सही तरह से कैलिब्रेटेड और प्रमाणित हैं या नहीं → लैब में काम करने वाला टेक्नीशियन प्रशिक्षित और योग्य है या नहीं → रिपोर्ट वैज्ञानिक आधार पर बनी है या सिर्फ कॉपी-पेस्ट करके दे दी गई है।
धीरे-धीरे इलाज से ज्यादा “टेस्ट लिखने का बिजनेस” चलने लगा है। मरीज का खून एक सैंपल बन गया है और रिपोर्ट कमाई का जरिया। जब डायग्नोसिस का आधार ही संदिग्ध होगा, तो सही इलाज की उम्मीद करना भी मुश्किल हो जाता है।
आजतक पर बहस बाजीगर नाम का शो था एंकर अंजना ओम कश्यप ने एक शिक्षक को बोलने के लिए 2 मिनट का टाइम दिया...
सामने स्टूडेंट थे तो उनके अंदर का शिक्षक जाग गया और निश्चित तौर पर दो मिनट बाद अंजना पछता रही होंगी…
दुर्बल काया और उम्र की बेड़ियाँ भी उसे रोक नहीं पाई, काँपते हाथों में लाठी लेकर ये वयोवृद्ध महिला देहरादून की सड़कों पर प्रदर्शन करने पहुंची। इस महिला को गौर से सुनिए, ऐसा लगता है ये उत्तराखंड की मूल आत्मा बोल रही है।
देहरादून में अंकिता भंडारी मर्डर केस की सीबीआई जांच को लेकर जो हुजूम उमड़ा था उसी में ये बूढ़ी माँ भी शामिल थी।
कोई सुन रहा है या अंधे बहरो की सरकार है ?
@BJP4India@INCIndia
आज देहरादून में प्रोटेस्ट में भाजपा मंडल अध्यक्ष का छलका दर्द, कहा— अंकिता भंडारी को इंसाफ मिलना चाहिए, कीड़े पड़े ऐसी भाजपा पर, इन्होंने हमारे पहाड़ की 19 साल की बेटी को मार दिया, ये दरिंदे पहाड़ों में रिजॉर्ट खोलकर हमारी बेटियों से सर्विस मांग रहे हैं।
Arrogance 100% , Merit 0%
It has become trademark of BJP Ministers & CM
Can u imagine a Minister who doesn’t know names of the departments - DTTDC, DSSSB
Earlier he could not say - DSSSB
Now it’s DTTDC
The CM says IQ & AQI instead of AQI
टीम खुरपेंच ने अब सीधे तौर पर FSSAI के उन अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जो अपने कर्तव्य से भाग रहे हैं , आँख मूँदकर मंज़ूरी दे रहे हैं और जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने दे रहे हैं। यह लड़ाई औपचारिक शिकायतों की नहीं , जवाबदेही तय करने की है।
अब आपकी भागीदारी अनिवार्य है।
अगर आज आप आवाज नहीं उठाएंगे तो आने वाली पीढ़ियाँ नकली पनीर , मिलावटी घी , ज़हरीली मिठाइयाँ , पॉम ऑयल से भरी चीजे , दूषित सब्ज़ियाँ और मसाले खाकर बीमार होती रहेंगी।
👉 देश तेज़ी से कैंसर की अंतरराष्ट्रीय राजधानी बनने की ओर बढ़ रहा है और सिस्टम चुप है।
टीम खुरपेंच लगातार रिकॉर्ड , लाइसेंस , सैंपल रिपोर्ट, बजट और मंज़ूरी के कागज खंगाल रही है।
👉 सारा डेटा सार्वजनिक किया जाएगा ,
👉 हर जिम्मेदार अफसर और फैसले की जवाबदेही तय कराने की भरकस कोशिश होगी।
पैसा लेकर मुहर लगाने वाले ,
काग़ज़ पर सुरक्षा और जमीन पर ज़हर बेचने देने वाले अधिकारियों को बेनकाब किया जाएगा।
यह साफ किया जाएगा कि किसने क्या साइन किया, किस कीमत पर किया और उसके नतीजे में कितनी ज़िंदगियाँ खतरे में पड़ीं।
> यह चेतावनी है , अपील नहीं।
या तो आज सवाल उठेंगे या कल लाशें गिनी जाएँगी।
झालावाड़ SP अमित बुडानिया की खरी खरी..
आगे से रोड जाम करने वालों के सामने यह वीडियो ही बड़ी स्क्रीन पर चला दीजिए। काफी असर हो जाएगा।
आमतौर पर पुलिस अफसर पीड़ितों/भीड़ से इस तरह सीधा संवाद कर नहीं पाते और समस्या बढ़ती जाती है।
संवाद एक बेहतर समाधान है