“Rashtriya Swayamsevak Sangh works in Bharat and has not engaged any lobbying firm in United States of America”
- Sunil Ambekar
Akhil Bharatiya Prachar Pramukh , RSS
@editorvskbharat
भक्ति रचनाओं से मानव मन को आंदोलित व आध्यात्मिकता को समाज में निरूपित करने वाले सद्गुरु श्री रविदास जी को उनकी जयंती सादर नमन!
#गुरु_रविदास_जयंति#रविदास_जयंती
शिकागो के ऐतिहासिक भाषण के बाद अमेरिकन हेराल्ड अख़बार ने लिखा था कि जिस देश में स्वामी विवेकानंद जैसे विद्वान व्यक्ति विद्यमान हैं, उस देश में धर्म उपदेश देने के लिए ईसाई मिशनरी भेजना मूर्खता है
BIG BREAKING NEWS 🚨 In a strong message, 500 plus hindu women in Dhule went to vote together. UNBELIEVABLE scenes 🔥🔥
Hindu Ladki Bahin showcasing power of unity.
In Dhule loksabha, BJP was ahead in 4 out of 5 assembly segments.
But due to one sided voting in 5th segment (Malegaon Central), bjp lost the entire Loksabha seat.
MASSIVE COUNTER polarization 🔥
आप लोगों ने “उपकार" फिल्म का यह गीत 'कसमे वादे प्यार वफा सब वादे हैं वादों का क्या' कई बार सुना होगा
लेकिन आप यह जानकर चौक जाएंगे कि इस फिल्म की अंतिम अंतरा कांग्रेस सरकार के सेंसर बोर्ड ने काट दिया था क्योंकि अंतिम अंतरे में भारत के मंदिरों के तोड़ने लूटने की सच्चाई बताई थी
आप वह अंतिम अंतरा सुनिए जिसे कांग्रेस ने काट दिया गया था
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की दो दिवसीय बैठक का हुआ शुभारंभ
मथुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की दो दिवसीय बैठक का शुभारंभ शुक्रवार (25 अक्टूबर) को दीनदयाल गौ विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, गऊ ग्राम, परखम, फरह के नवधा सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत एवं माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी के द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन अर्पित कर किया गया। बैठक के प्रारम्भ में हाल ही में दिवंगत हुए पूज्य राघवाचार्य महाराज (जयपुर), प्रसिद्ध उद्योगपति पद्मविभूषण रतन टाटा, पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बुद्धदेव भट्टाचार्य, ईनाडु और रामोजी फ़िल्म सिटी के संस्थापक श्री रामोज़ी राव, कम्युनिस्ट नेता सीताराम येचुरी, पूर्व विदेश मन्त्री के. नटवर सिंह, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुशील मोदी, एडमिरल (सेनि) रामदास तथा दिवंगत अन्य प्रमुख लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बैठक के प्रारंभ में मार्च 2024 की अ. भा. प्रतिनिधि सभा की बैठक की कार्यवाही का अनुमोदन किया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र कुमार ने बताया कि बैठक का समापन 26 अक्टूबर सायं 6:15 बजे होगा। बैठक में विजयादशमी के पावन पर्व पर पूजनीय सरसंघचालक जी द्वारा प्रस्तुत विचारों तथा उनके उद्बोधन में उल्लेखित महत्वपूर्ण विषयों के अनुवर्तन हेतु योजनाओं तथा देश में वर्तमान समय चल रहे समसामयिक विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। साथ ही प्रतिनिधि सभा में निर्धारित वार्षिक योजना की समीक्षा तथा संघ कार्य के विस्तार का वृत्तांत भी लिया जाएगा। बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष में कार्य विस्तार की योजना सहित अभी तक किए गए कार्यों की समीक्षा और पंच परिवर्तन (सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण, ‘स्व’ आधारित जीवन शैली और नागरिक कर्तव्य) को समाज में लेकर जाने पर चर्चा होगी। सभी कार्यकर्ता इसी गऊग्राम परिसर में निवास कर रहे हैं।
बैठक में संघ रचना के सभी 11 क्षेत्रों तथा 46 प्रांतों के माननीय संघचालक, सह संघचालक, कार्यवाह तथा प्रचारक सहित कुल 393 कार्यकर्ता प्रतिभाग कर रहे हैं। जम्मू कश्मीर से केरल तथा पूर्वोत्तर के अरूणाचल, मणिपुर, त्रिपुरा आदि प्रांतो से भी कार्यकर्ता उपस्थित हैं। बैठक में प्रांतो के विशेष कार्यों का तथा परिस्थितियों का निवेदन होगा। आगामी मार्च 2025 तक की विस्तृत योजना पर भी विचार विमर्श होगा।
बैठक में संघ के पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत, माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी तथा सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल जी, श्री मुकुन्दा जी, अरूण कुमार जी, रामदत्त चक्रधर जी, आलोक कुमार जी, अतुल लिमये जी सहित अन्य अखिल भारतीय कार्य विभाग प्रमुख एवं कार्यकारिणी के सदस्य भाग ले रहे हैं।
आज के भारत का स्टैंड स्पष्ट है, पाकिस्तान भारत की भूमि को खाली करे एवं आंतकवादी गतिविधियों से बाज आये नहीं तो उसके द्वारा किए गए कुकर्मों का अंजाम बहुत बुरा होगा.
This Video would never be shown by Sold Out Indian Media.
A Kashmiri Pandit woman ripped off @RahulGandhi on a flight for his Anti Bharat agenda and failure to address Kashmiri Hindus Genocide questions…
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सुप्रीम कोर्ट में जब धारा 370 को हटाने को लेकर सुनवाई चल रही थी तब इसमें कुछ संगठनों ने भी याचिका दायर किया था ऐसे ही एक संगठन के वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने इतिहास का वो पन्ना पलट दिया कि सभी जज चुपचाप सुनते रह गए,
उन्होंने नेहरू का नाम तो नहीं लिया लेकिन नेहरू के नीचता और नेहरू की गद्दारी की पूरी कहानी सुप्रीम कोर्ट के खंडपीठ के सामने बयां कर दी वह भी तथ्यों के साथ
फिर भी कांग्रेसी चमचे कहेंगे नेहरू तो आधुनिक भारत के निर्माता थे
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी अपनी दलील में कहते हैं, 'हम सच्चाई के बारे में बात नहीं करना चाहते हैं। सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर कौन था ? एक अंग्रेज सर क्लाउड जॉन औचिनलेक। भारत के तीनों जनरल ब्रिटिश थे। पाकिस्तान के तीनों जनरल ब्रिटिश थे।
यह युद्ध (कश्मीर पर पाकिस्तान की तरफ से हमला) क्या था? चर्चिल ने ही तय किया था कि भारत का विभाजन होगा।
यह जियो-पॉलिटिक्स का खेल था सब। यह युद्ध एक ब्रिटिश युद्ध था। उन्होंने दोनों तरफ से इसकी तैयारी की थी। हमलावर कहां से आए थे? उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) से। दो कार्यकालों के बाद मिस्टर कनिंघम, जो उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत के गवर्नर रह चुके थे, उन्हें जुलाई में वापस बुलाया गया। चुनाव से ठीक पहले।'
द्विवेदी ने उस वक्त की परिस्थियों को बताते हुए आगे कहा, 'हमलावरों को प्रशिक्षित किया गया, सेना के हथियारों के साथ ट्रकों पर भेजा गया। पाकिस्तान की सेना भारत से अभी-अभी अलग हुई थी। और सबसे बड़ा, सबसे स्पष्ट उदाहरण है, कौन लड़ रहा था? आज पीओके क्या है? पीओके का दो-तिहाई हिस्सा गिलगित-बााल्टिस्तान है। और वहां किसने युद्ध लड़ा? हमलावरों ने नहीं। यह मेजर ब्राउन था। वहां का एजेंट कौन था? उन्हें कनिंघम ने ठीक उसी जुलाई में दोबारा पोस्ट किया था। उन्होंने महाराजा (हरि सिंह) के सभी फोर्सेज को मार डाला। अंसार अहमद वहां तैनात थे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। और उन्होंने चार दिनों में पाकिस्तान का झंडा लहराया और उन्होंने इसे कनिंघम को सौंप दिया। उन्होंने पाकिस्तान की सेना आलम के पास भेजी और उन्होंने गिलगित-बल्तिस्तान पर कब्जा कर लिया। पाकिस्तान के साथ युद्ध कहाँ है? यह ब्रिटिश है। लेकिन अगर हम इन सब से आंखें मूंद लेते हैं।'
वो कहते हैं, 'भला ये हमलावरों का युद्ध है? हमलावर अपने आप श्रीनगर तक नहीं आ सकते थे। युद्ध लगभग स्कार्दू और कारगिल से लेकर लेह के करीब तक पहुंच गया था। तो यह एक अलग तरह का युद्ध था, लेकिन कोई नहीं कह सकता था क्योंकि माउंटबेटन वहां गवर्नर जनरल के रूप में थे।
पता नहीं हमारे नेताओं ने ऐसा क्यों किया? जिन्ना ने तो साफ कहा, मैं किसी भी ब्रिटिश गवर्नर-जनरल को स्वीकार नहीं करूंगा। लेकिन हमारे यहां कहा गया, नहीं, हमें गवर्नर जनरल स्वीकार हैं। तो यह युद्ध क्या है? यही नहीं, जब युद्ध शुरू हुआ, तो उन्होंने (नेहरू सरकार ने) एक डिफेंस कमिटी का गठन किया और माउंटबेटन को इसका अध्यक्ष बनाया दिया। तो यह एक गजब की स्थिति है, लेकिन माउंटबेटन डिफेंस कमिटी के अध्यक्ष हैं।'
वरिष्ठ वकील आगे कहते हैं, 'ऑचिनलेक सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं। सभी जनरल ब्रिटिश हैं और एक ब्रिटिशर विद्रोह कर रहा है और जब वह इंग्लैंड लौटता है तो उसे ब्रिटिश साम्राज्य का पदक दिया जाता है। तो यह युद्ध की स्थिति नहीं है। इसलिए जब आप संविधान और 370 को पढ़ते हैं, तो कृपया इन बातों को ध्यान में रखें कि हमारे नेता किन परिस्थितियों में आगे बढ़ रहे थे। हमारी हमलावरों को पीछे धकेलने और अपनी जमीन वापस पाने की चाहत ही नहीं थी। उन्होंने एक समय पर जानबूझकर युद्ध को रोक दिया और संयुक्त राष्ट्र चले गए क्योंकि अगर हम मीरपुर तक और पीछे चले गए होते तो वह गिलगित-बल्तिस्तान से कनेक्शन टूट जाता।'
राकेश द्विवेदी ने अपनी बहस जारी रखते हुए कहा, 'ये सभी सच्चे तथ्य हैं। कोई भी इसे नकार नहीं सकता। और संयुक्त राष्ट्र क्या था? वही शक्ति जो जियो पॉलिटिक्स की वजह से भारत का विभाजन करना चाहती थी, अमेरिका और ब्रिटेन, उन्हें मध्यस्थ बनाया गया था। सौभाग्य से, पाकिस्तान ने पीओके खाली करने से इनकार कर दिया। इसलिए वह प्रस्ताव खत्म हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के बारे में बात करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन उस समय 370 के निर्माण में स्थिति की गंभीरता को देखें।'
और सुप्रीम कोर्ट ने जो धारा 370 पर फैसला दिया वह राजेश द्विवेदी के इतिहास के इन पन्नों को ध्यान में रखकर ही दिया जो एक कड़वी सच्चाई है
कंधार विमान अपहरण पर बहुत चर्चा हो रही है तो ये हैं इस घटना के वो फैक्ट जिनसे आप अनजान हैं और जिन्हें जानकर आप चौंक जाएंगे
इस थ्रेड को अवश्य पढ़िए...
PC: @vijaygajera