@khurpenchh गलती इन्हीं लोगों की है जो इसके यहां आते है।जिस तरीके की हरकतें यह करता है उस तरह की ट्रेनिंग की जरूरत ही नहीं होती। फिजिकल एग्जाम पास करने के लिए दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद जैसी बेसिक चीजों की जरूरत होती है।
बाकी सारी चीजें सिलेक्शन होने के बाद आर्मी वाले खुद से करवा देते है
@GovindDotasra बड़े दुख की बात है सदन में राजस्थान से कांग्रेस के 8 लोकसभा और 5 राज्यसभा सांसद होने के बावजूद उनको अपने पूर्व दिवंगत सांसद की याद नहीं आई, कम से कम वो सदन में इस बात को उठा सकते थे।
दुर्भाग्यवश, वर्तमान में अनेक कुलपति (कुलगुरु) शैक्षणिक सुधारों और संस्थागत विकास की बजाय औपचारिक बधाइयों, समारोहों और राजनीतिक नेताओं को खुश करने में अधिक व्यस्त दिखाई देते हैं।
इस प्रवृत्ति में बदलाव नहीं किया गया तो राजस्थान की उच्च शिक्षा केवल नाम मात्र की व्यवस्था रह जाएगी
NIRF 2025 रैंकिंग में राजस्थान का एक भी राजकीय विश्वविद्यालय(स्टेट यूनिवर्सिटी श्रेणी) शीर्ष 100 में स्थान नहीं बना सका। तथा 300 कॉलेजों की रैंकिंग में राजस्थान का कोई सरकारी कॉलेज जगह बनाने में कामयाब नहीं हुआ। यह स्थिति प्रदेश में उच्च शिक्षा के गिरते हुए स्तर को उजागर करती है।
और एक सुस्पष्ट शैक्षणिक दृष्टि के साथ आगे बढ़ें। इसके साथ की राज्य में नई शिक्षा नीति को लागू तो कर दिया गया, लेकिन हमारे विश्वविद्यालय लेटलतीफी का शिकार है, उनसे न ही तो समय पर परीक्षा का आयोजन हो पा रहा है, और न ही समय पर परीक्षा घोषित कर पा रहे है।
उच्च शिक्षा का स्तर केवल कुलपति का नाम बदलकर "कुलगुरु " करने से नहीं सुधर सकता। इसके लिए आवश्यक है कि विश्वविद्यालय और कॉलेज आलोचनात्मक शोध कार्यों को प्रोत्साहित करें, रिक्त पदों पर एक सुस्पष्ट योजना बनाकर योग्य फैकल्टी (बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के) की समयबद्ध नियुक्ति करें,