1998 में अटल जी ने परमाणु परीक्षण करके देश को शक्तिशाली बना दिया था।
भारत में राजनीतिक दल मुण्डन करवाकर प्रदर्शन कर रहे थे।
वीडियो ध्यान से देखिएगा- कुछ को तो आप पहचान भी लोगे, वही थे जो आज भेष बदलकर संविधान बचाने की बात करते है 👇
दिल्ली में SIR के दौरान जारी नोटिसों से जुड़े कुछ आँकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं:
• एक ही माँ से जन्मे दो भाई-बहनों के बीच 9 महीने से कम का अंतर: 6.4%
• मतदाता और माता-पिता के बीच 50 वर्ष से अधिक का उम्र-अंतर: 2.5%
• मतदाता और दादा-दादी/नाना-नानी के बीच 40 वर्ष से कम का अंतर: 2.3%
• मतदाता और माता-पिता के बीच 15 वर्ष से कम का उम्र-अंतर: 5%
• छह या उससे अधिक बच्चे दर्ज होने वाले मामले: 4.2%
अब सवाल यह है कि मतदाता सूची के ऐसे असंगत रिकॉर्ड सामने आने पर सत्यापन की प्रक्रिया पर इतना राजनीतिक हंगामा क्यों?
और विडंबना देखिए...
जिन प्रविष्टियों की वैधता पर सवाल उठे, उनके सत्यापन की मांग करने के बजाय चुनाव आयोग के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया गया!
नोटिस का अर्थ नाम हट जाना नहीं है। संबंधित मतदाता को अपनी पात्रता और दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है।
तो फिर इतनी बेचैनी किस बात की?
मतदाता सूची साफ-सुथरी हो, यह लोकतंत्र की जरूरत है या किसी दल की राजनीतिक परेशानी?
जनता को बस इतना समझना है:
सत्यापन से डर कैसा, अगर सूची में सब कुछ दुरुस्त है?
@CommonBS786OM ऐसा हर जगह नहीं है. मेरा account एसबीआई MLA rest house bhopal में है और पिछले 18 साल से वहाँ हर कर्मचारी को मेने काफी helpful पाया है. अब लंच time hoga to थोड़ा wait तो करना पड़ता है.
@animalsaveindia Little knowledge is always dangerous. We cant feed cow or buffalo calf on milk for long time. They have ruminant digestion system and its different than simple stomach animals. So the there is no cruelity in using rest of the milk. From the day Bharat has become first among