🚨 कॉकरोच समर्थक ने CRPF के एक जवान को थप्पड़ मार दिया!
ज़रा सोचिए, अगर जवान ने भी पलटकर उसे एक थप्पड़ मार दिया होता, तो क्या होता?
अब तक सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया होता, विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए होते और उसके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग उठने लगी होती!
जो व्यक्ति भारत पर 54-55 वर्षों तक राज करने वाली कांग्रेस को खा गया, जो व्यक्ति असंभव सी लगने वाली धारा 370 को खा गया, जाली नोटों के धंधे को खा गया, अयोध्���ा में ��्रीराम मंदिर के निर्माण की रुकावटों को खा गया, जिसने पाकिस्तान को भिखारी बना दिया, जो अमेरिका जैसे देश के सामने तन कर खड़ा हो जाता है, जिसने मेक इन इंडिया से दुनिया भर में तहलका मचा दिया। जिस व्यक्ति ने भारतीयों का एक पैसा भी नहीं खाया।
ऐसे मोदी को आप उसकी एक दो गलतियों के कारण हटा कर, विदेशी बैंकों में अपना बैंक बैलेंस बढ़ाने वालों के लिए, हटाना चाहते हैं?
फिर तो आपसे बड़ा कोई "समझदार" नहीं है��
मुंबई हाईकोर्ट के वकील ने दीपके को धो डाला
यहां तू पंतप्रधान को गाली भी दे सकता इतना अच्छा लोकतंत्र हे यही तू विदेश में करता तो तेरा मुंह लाल हो जाता
अमेरिका में चूहे की तरह रहता वहां से भगाया और यहां तू भौंकता दंगे भड़काता क्यों.?
एडवोकेट सुनील कुमार ने चिपके को रगड़ दिया 😅
प्रशांत भूषण ने आंदोलन की पोल कैसे खोली?
वकील प्रशांत भूषण नेहा बोरा से भी दो कदम आगे निकल गए. उन्होंने कल खुलकर कहा कि इस आंदोलन का मकसद भारत में सत्ता परिवर्तन करना है, इसके लिए जो करना पड़ेगा वो करेंगे. प्रशांत भूषण नेहा बोरा और CJP नेता अभिजीत दिपके के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे.
प्रशांत भूषण ने तो सारे प्रोटेस्ट की पोल खोल दी. जो लोग ‘वोट चोरी’ के नाम पर सड़कों पर उतरे थे, उनकी असलियत बता दी. बिल्ली थैले से बाहर आ गई. प्रशांत भूषण ने बता दिया कि साज़िश सरकार बदलने की है, बिना चुनाव के सत्ता परिवर्तन करने की है.
क्या राहुल गांधी इस इरादे का समर्थन करेंगे ? दो दिन पहले वह प्रशांत भूषण के ���ाथ खड़े थे. क्या भारत का लोकतंत्र अब दंगा कराने वालों के हवाले कर दिया जाएगा ? ये सवाल कांग्रेस से बार-बार पूछा जाएगा.
बलूचिस्तान के घनश्याम बलोच की एक अवयस्क हिंदू बेटी की कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है।
इस बच्ची को जिहादी अगवा करके ले गए।
चूँकि परिवार तुलनात्मक रूप से संपन्न था, इसलिए उन्होंने पुलिस ���र कुछ अन्य लोगों की सहायता से जिहादी डाकुओं से संपर्क स्थापित किया।
जब घनश्याम बलोच एक समूह के साथ इस बलोची वडेरे के मुकाम पर पहुँचे तो उन्हें अपनी बेटी की हृदय विदारक चीखें सुनाई दीं।
घनश्याम सुन्न पड़ गए और वडेरों के प��र पकड़कर बच्ची की रिहाई की भीख माँगने लगे। पर दुष्ट जिहादियों का कोई इरादा नहीं था उस बच्ची को छोड़ने का।
बच्ची पिता का रुदन सुनकर अंदर से बोली, “पिताजी, आप शेष परिवार को लेकर भारत चले जाइए, मुझे भूल जाइए और फिर मुड़कर इस नर्क में कभी मत आइएगा।”
1200 वर्ष के इतिहास में हमारी पूर्वजा माताएँ-बहनें मुसलमानों से युद्ध के समय जीवित अग्नि में स्वयं को जला देती थीं कि उनका मृत शरीर भी इन म्लेच्छों के ���ाथ न पड़े। क्या उस बच्ची के मन में भी यही भाव नहीं आए होंगे, जब जिहादी उसका शरीर नोंच रहे थे?
घनश्याम बलोच के हृदय पर क्या बीती होगी,
वे कैसे घर लौटे होंगे,
कैसे उन्होंने परिवार को यह घिनौना सत्य बताया होगा,
लेखक के लिए वह सारा घटनाक्रम शब्दों में वर्णन करना संभव नहीं है।
कुछ ��ेदनाएँ ऐसी होती हैं, जिन्हें न शब्द, न अश्रु, न कोई और भाव व्यक्त करने का सामर्थ्य रखता है।
एक पिता, जो अपनी पुत्री का शील भंग प्रत्यक्ष देख-सुनकर आ रहा हो, उसकी मनोदशा का कौन वर्णन कर सकता है?
घनश्याम अपने शेष बच्चों को लेकर भारत आ गए तथा स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं। लेखक 2017 में उनसे मिलना हुआ था । इतना ही कहा जा सकता है कि एक जीवित शरीर, जिसकी आत्मा मार चुकी हो, कैसे चलता है, कैसे बोलता है, लेखक ने प्��त्यक्ष अपनी आँखों से उस दिन देख लिया।
मैंने अपने जीवन में इतनी रिक्त आँखें उस दिन से पूर्व और उस दिन के बाद कभी नहीं देखीं।
मेरी आगामी पुस्तक - ‘ पाकिस्तान के हिंद व सिख - एक अनवरत नरसंहार ‘ से ।
🚨 ब्रेकिंग: आज के लिए अभिजीत दिपके की कथित विरोध योजना लीक हो गई है।
मेरे CJP के एक सूत्र ने बताया है कि एक ग्रुप में ये बातें साझा की गई थीं:
1. धार्मिक प्रतीक पहनें और तिलक लगाएं।
2. पुलिस को उकसाएं और उन पर BJP का समर्थन करने का आरोप लगाएं।
3. विरोध प्रदर्शन के दौरान अपने साथ भारतीय तिरंगा रखें।
4. अगर कोई आपका रास्ता रोकता है, तो तिरंगे को आगे रखते हुए उसे वहां से हटा दें।
5. अगर पुलिस आपको गिरफ्तार करती है, तो घायल होने का नाटक करें।
6. सभी लोग खुद को छात्र बताएं।
हिंदू भाइयों, जाग जाओ! वह विरोध प्रदर्शन की आड़ में भारत में दहशत फैला रहा है।
ये है इयाल वाल्डमैन,एक इसराइली यहूदी बिजनेसमैन जो कि मेलानॉक्स (Mellanox)कंपनी के फाउंडर हैं।
उन्होंने अपनी कंपनी में सैकड़ों फिलिस्तीनी इंजीनियरों को नौकरी पर रखा..क्योंकि उनका ये मानना था ��ि एक दूसरे के साथ रिश्ते एक
दूसरे को इस तरह से सपोर्ट करके सुधारे जा सकते हैं..।
उन्होंने गाज़ा के पश्चिमी हिस्से में कंपनी का रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर बनाया ताकि वो ज़्यादा से
ज़्यादा गाज़ा निवासियों को तकनीकी द्वारा शिक्षित कर सकें और उन्हें स्वावलंबी बना सकें..।
सन 2019 में ग्राफिक प्रोसेसर बनाने वाली कंपनी एनवीडिया (Nvidia) ने मेलानॉक्स का 6.9 बिलियन डॉलर में अधिग्रहण कर लिया इयाल वाल्डमै�� के इस समझौते के साथ,कि वो उन सैकड़ों गाज़ा नागरिकों को इस कंपनी
से कभी नहीं निकालेगी और गाज़ा पट्टी पर स्थित रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर उसी तरह काम करता रहेगा।
7 अक्टूबर को म्यूजिक फेस्टिवल में जब गाजा के आतंकी घूसे तब उन दरिंदो ने इयाल वाल्डमैन की बेटी डेनियल वाल्डमैन और उसके ब्वॉयफ्रेंड को
इन्हीं गाज़ा पट्टी वालों,जिन्हें इयाल ने नौकरी और सुरक्षा दी थी,ने मार डाला
उसको ऐसी दर्दनाक मौत दी है कि एनवीडिया के सीईओ से लेकर सारा व्यापार जगत सदमे में है..।
उसे इन लोगों ने तब मारा जब वो एक म्यूजिकल फेस्टिवल में अपने ब्वॉयफ्रें�� के साथ नाच रही थी.. वहीं इन गाज़ा पट्टी वालों ने हमला करके उसे मार डाला।
इयाल वाल्डमैन कहते हैं कि मेरी बेटी को इन लोगों ने सिर्फ इसलिए मार डाला क्यों वो "इसराइली" थी..
जबकि वो इन गाज़ा।निवासियों से बहुत प्यार करती थी औ अपनी कंपनी में इन्हें ज़्यादा से ज़्यादा नौकरी देने की वकालत करती थी।
डेनियल वाल्डमैन ने गाज़ा निवासियों
से अपने प्रेम की कीमत अपनी जान
देकर चुका दी है।
- सिद्धार्थ ताबिश
जयश्रीराम💐
नेहा बोरा भारत को बांग्लादेश बनाना चाहती है. वो बांग्लादेश के लोगों को इस बात का धन्यवाद दे रही है कि उन्होंने भारत में Gen-Z आंदोलन की तरफ ध्यान दिया है. नेहा बोरा एक ���ीडियो में आगे कहती है कि जैसे बांग्लादेश ने मजहबी कट्टरपंथ को हराया वैसे ही हम भी लड़ाई लड़ रहे हैं. अरे भगवान को न मानने वाली नेहा बोरा बांग्लादेश में कट्टरपंथ के चलते ही वहां की चुनी हुई सरकार को एक "खूनी कू" में बदला गया. बांग्लादेश में जो हुआ वो भारत में कभी नहीं होना चाहिए. मैं ये भी नहीं कह सकता कि भगवान आपको सद्बुद्धि दे क्योंकि धर्म तो आपके लिए अफीम है भगवान को तो आप मानती ही नहीं.
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कल राहुल गांधी ने एक 3 महीने की गर्भवती महिला पत्रकार रिचा पाराशर को बहुत तेजी से धक्का देकर और वह भी जानबूझकर धक्का देकर नीचे गिरा दिया
महिला पत्रकार के पेट में तेज चोट लगी और वह अस्पता�� में भर्ती है
दरअसल वह पत्रकार राहुल गांधी से यही सवाल पूछ रही थी कि जिन राज्यों में आप जीत जाते हैं वहां आप वोट चोरी का आरोप क्यों नहीं लगाते ?
इस सवाल से राहुल गांधी इतना गुस्सा हो गया कि महिला पत्रकार को धकेल कर गिरा दिया
सत्ता के लिए राहुल गांधी पागल हो चुका है यह सत्ता के लिए तड़प रहा है
कहां है नेहा बोरा? कहां हैं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास? छात्रो��� के मुद्दे के चैंपियन बनने वाले ये लोग JNU में प्रोफेसर के यौन उत्पीड़न पर खामोश हैं. आज JNU प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम पर FIR भी हो गई, लेकिन इनके मुंह से एक भी शब्द या एक भी ट्वीट नहीं निकला. लिबरल इको सिस्टम भी पूरा खामोश है. कम से कम 'रस्म-अदायगी' ही कर देते.
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मोदी
और
मोहम्मद मोसादेग
ईरान 1951
और
भारत 2025 -
क्या कोई समानताएं हैं?
क्या आपने कभी सोचा है कि ईरानी अमेरिका को "शैतानों की धरती" क्यों कहते हैं?
एक समय था, जब ईरान की तेल इंडस्ट्री पर ब्रिटेन का पूरा कंट्रोल था; 84% प्रॉफिट इंग्लैंड को जाता था और सिर्फ़ 16% ईरान को।
1951 में, एक सच्चे देशभक्त, मोहम्मद मोसादेग, ईरान के प्राइम मिनिस्टर बने। वह नहीं चाहते थे कि विदेशी कंपनियां ईरान के तेल रिसोर्स पर कंट्रोल करें। 15 मार्च, 1951 को, मोसादेग ने तेल इंडस्ट्री को नेशनलाइज़ करने के लिए एक बिल पेश किया, जो भारी बहुमत से पास हुआ। टाइम मैगज़ीन ने उन्हें 1951 में "मैन ऑफ़ द ईयर" का नाम दिया!
लेकिन इस फ़ैसले से ब्रिटिश फ़ायदों को नुकसान हुआ। उसने रिश्वत, हत्या की कोशिश और मिलिट्री तख्तापलट के ज़रिए मोसादेग को हटाने की कोशिश की, लेकिन उसकी दूर की सोच और पॉपुलैरिटी ने उसकी सारी कोशिशें नाकाम कर दीं। जब ��्रिटेन नाकाम रहा, तो उसने मदद के लिए अमेरिका से संपर्क किया। CIA ने मोसादेग को सत्ता से हटाने के लिए $1 बिलियन डॉलर मंज़ूर किए।
इस प्लान में लोगों में नाराज़गी पैदा करना, मीडिया और धार्मिक नेताओं को खरीदना और आखिर में भ्रष्ट MPs के ज़रिए सरकार गिराना शामिल था।
जर्नल, एडिटर और मौलवियों को मोसादेग के ख़िलाफ़ माहौल बनाने के लिए $631 मिलियन दिए गए। हज़ारों लोगों को नकली विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा ल��ने के लिए पैसे दिए गए। ग्लोबल मीडिया ने भी अमेरिका का साथ देना शुरू कर दिया। कार्टून का इस्तेमाल मोसादेग पर पर्सनल हमले करने के लिए किया गया, ठीक वैसे ही जैसे आज मोदी की पर्सनल ज़िंदगी पर हमले हो रहे हैं।
मोसादेग को डिक्टेटर कहा गया। जब उसे एहसास हुआ कि उसकी सरकार पार्लियामेंट गिरा देगी, तो उसने पार्लियामेंट भंग कर दी। US ने शाह पर मोसादेग को हटाने का दबाव डाला और नकली विरोध प्रदर्शनों के बाद मोसादेग ने सरेंडर कर दिया। उन्हें जेल में डाल दिया गया और बाद में हाउस अरेस्ट कर लिया गया।
इसके बाद, ईरान का तेल US (40%), इंग्लैंड (40%), और दूसरे यूरोपियन देशों (20%) के बीच बंट गया।
कट्टरपंथी खोमैनी सत्ता में आए और आम ईरानियों की हालत खराब हो गई।
मोसादेग का गुनाह यह था कि वह चाहते थे कि ईरान के रिसोर्स पर विदेशियों के बजाय ईरान की अपनी कंपनियां कंट्रोल करें। अगर मोसादेग को सपोर्ट मिला होता, तो ईरान 1955 तक पूरी तरह से डेमोक्रेटिक देश बन सकता था। लेकिन पत्रकारों, एडिटर्स, MPs और प्रोटेस्टर्स ने पैसे के लिए अपने देश का भविष्य बेच दिया। इसीलिए अमेरिकियों को "शैतानों की धरती" कहा जाता है।
*अब, भारत भी ऐसे ही मोड़ पर है। नकली मुद्दे, नकली आंदोलन, नकली आंकड़े और लोगों को जाति और धर्म के आधार पर बांटना - यह सब भारत को फिर से विदेशी कंट्रोल में लाने की एक गहरी साज़िश का हिस्सा है।
अब समय आ गया है कि हम स���वधान रहें और करप्ट मीडिया के प्रोपेगैंडा का शिकार न हों। हर देशभक्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। नहीं तो भारत का भविष्य भी ईरान जैसा हो सकता है।*
आज, कई ग्लोबल इंटेलिजेंस एजेंसियां मोदी सरकार को हटाने के लिए भारतीय नेताओं को अपने एजेंट के तौर पर भर्ती करने की कोशिश कर रही हैं। हमारा भविष्य हमारे हाथ में है। बस हमें समय रहते यह समझने की ज़रूरत है।
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने मोसादेग को तानाशाह कहा था। आज, टाइम ���ैगज़ीन मोदी को "डिवाइडर-इन-चीफ" कहती है। क्या यह सिर्फ़ एक इत्तेफ़ाक है? नहीं, यह एक स्ट्रैटेजी है। सोचो, समझो और जागरूक बनो।
जय हिंद।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस की टीम गुरुग्राम के एक 5 स्टार होटल में रूटीन चेक के लिए पहुंची।
चेक के दौरान ध्रुव राठी और उसके दोस्त अंग्रेजी ब्रेकफा��्ट और जूस पीते हुए मिले।
ID मांगी तो ध्रुव राठी ने जर्मन पासपोर्ट निकालकर दिखाया।
पुलिस ने आधार या वोटर कार्ड (कोई भी भारतीय ID) मांगा।
ध्रुव राठी बोला — “मैं जर्मन नागरिक हूं और टूरिस्ट वीजा पर हूं।”
जैसे ही उसने “टूरिस्ट वीजा” कहा, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। क्योंकि कानून के मुताबिक कोई विदेशी नागरिक अगर भारतीय राजनीति या विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश करे, तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता है।
चेन्नई में राहुल गांधी के मंच पर एक मुस्लिम लड़की आई
और उसने तमिल भाषा में काफी कुछ बोला
फिर जब ट्रांसलेटर ने उसे ट्रांसलेट किया कि यह कह रही है कि मैं मुस्लिम लड़की हूं हमारे धर्म में पूरी तरह से पितृसत्तात्मक व्यवस्था है हमें पढ़ने नहीं दिया जाता हमें आगे बढ़ने नहीं दिया जाता हमें तमाम बंद���शों में रखा जाता है और दूसरी तमाम बातें चुपचाप राहुल गांधी सुने और कुछ नहीं बोले
राहुल गांधी एक शब्द तक नहीं बोले
और उस लड़की को मंच से उतार दिया गया
अब सीन बदल देते हैं
अगर कोई हिंदू लड़की आई होती और राहुल गांधी से कहती कि वह हिंदू है उसके धर्म में पितृसत्तात्मक व्यवस्था है उसे बंदिशें में रखा जाता है फिर राहुल गांधी 1 घंटे तक हिंदू धर्म पर हिंदुओं पर हिंदू किताबों पर जहर उगलते और पूर्व ���ें कई बार राहुल गांधी जहर उगल चुका है
इसीलिए हिंदुओं में बार-बार कहता हूं कि विदेशियों का औलाद कभी तुम्हारा नहीं हो सकता
यह कभी हिंदुओं का तो क्या भारत देश का भी नहीं हो सकता
आज ये तस्वीर सबको देखनी चाहिए...
एक जवान फूट फूट कर र�� रहा है।
महिला पुलिस कर्मी हो या फिर पुरुष सबके साथ मारपीट और बदसलूकी की जा रही है।
उसके बाद भी बदनाम वर्दी को किया जा रहा है।
सीजेपी के प्रदर्शनकारी शुरू से पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगा रहे हैं।
लेकिन ये वर्दी वाले भी इंसान ही है, ये प्रदर्शन के दौरान घायल हो रहे हैं, इन पर हिंसा की जा रही है।
लेकिन इनका दर्द दिखाने के लिए कोई वीडियो सामने नहीं आ रही है।
एक ये वीडियो सामने आया है जिसमें एक महिला अधिरकारी जमीन पर लेट पर दर्द से बेहाल हो रही है।
लगता है बांग्लादेश और नेपाल की तरह का सत्ता परिवर्तन फ्रांस में होगा।
उस वामपंथियों की सरकार के देश म���ं जिन्होंने जिहादियों को भर भर कर फ्रांस में शरण दी थी।
वही घुसपैठिए फ्रांस को जला रहे हैं।
अब जो जो लोग तरह-तरह की थ्योरी दे रहे हैं तो उनके ही बाप सऊदी अरब ने अब तक की जांच रिपोर्ट दुनिया के सामने रख दी...!*
*अब इनको न उगलते बन रहा है ना निगलते...!*
*क्योंकि अब यह अपने असली बाप सऊदी अरब के जांच पर ��क भी नहीं कर सकते...!*
*सऊदी अरब ने अब तक की जांच में यह बताया है की ओमानी पायलट जिसकी यह तस्वीर है "हमम अल हमामी" वह काफी जिहादी और कट्टरपंथी बन चुका था...!*
*ओमान एयरलाइन में काम करता था...*
*ओमान एयरलाइन ने उसके कट्टरपंथी मुस्लिम विचारधारा के नाते उसे सस्पेंड कर दिया...!*
*फिर वह फ्लाई दुबई में नौकरी करने लगा...*
*और उसने सऊदी अरब के अधिकारियों को पूछताछ में बताया कि उसका इरादा विमान को तेल अबीब के कि��ी ऊंचे टावर से टकराकर क्रश करना था...!*
*उसने बताया कि उसे यह प्लानिंग बनाने में कई हफ्ते लगे और उसे पता था कि कॉकपिट में एक क्रश ऑक्स (कुल्हाड़ी) रहती है जो आपातकाल में अगर पायलट कॉकपिट का विंडशील्ड तोड़कर बाहर निकलना चाहे तो उनके लिए होती है...!*
*तो उसने प्लानिंग बनाया कि वह इसी कुल्हाड़ी को हथियार बनाकर अपने साथी पायलट को मार देगा और विमान को ऊंचे टावर में क्रश करके 9/11 जैसी घ���ना करेगा...*
*उसने बताया कि उसे पता था कि दुबई से तेलअबीब जाने वाली फ्लाइट में 90% यात्री यहूदी होते हैं और वह यहूदियों को मारना चाहता था...!*
*_अब सोचिए कि भारत विपक्ष और काँग्रेस इस घटना की निंदा और पायलट स्मित मच्छार की सराहना क्यों नहीं कर रहा था...!?🤔😏_*
इनका नाम संभव जैन है, जो कि एक IT कंपनी में इंजीनियर थे, इनकी शादी 2023 में हुई थी,
शादी के बाद उनकी पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसकी बीमारी में करीब 35 लाख रुपए खर्च हुए,
उसी के चलते पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद हुआ और तलाक का केस चल रहा था,
तलाक के केस में संभव जैन 1/2
को पत्नी को गुजारा भत्ता यानी एलुमनी के नाम पर करीब 3 करोड़ रुपए देने थे। इसमें से करीब 1 करोड़ रुपए वह पहले ही दे चुके थे,
लेकिन इसके बाद भी करीब 2 करोड़ रुपए और देने थे, नोएडा की सुपरनोवा बिल्डिंग में ठहरे हुए संभव जैन ने अपने पिता को मैसेज किया कि
अब पैसे नहीं देने पड़ेंगे, इसके बाद उन्��ोंने 43वीं मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान दे दी,
बताया जा रहा है कि लोगों ने उन्हें बचाने और पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन वह काफी ऊंचाई से गिरने के कारण लोगों के हाथ नहीं आ सके,
अब सोचिए, आखिर एक मर्द इतना पैसा लाएगा कहां से? एलुमनी के नाम पर इतनी बड़ी रकम का दबाव किसी व्यक्ति पर पड़े तो वह किस हालत से गुजरता होगा?
आखिर कब तक मर्द एलुमनी के आर्थिक दबाव में अपनी जान देते रहेंगे?
कर्नाटक KPSC परीक्षा में टॉपर्स के जवाब ही नहीं गलतियां भी एक जैसी! 14 टॉपर्स की उत्तर पुस्तिकाओं में 99.9% समानता।
कर्नाटक की पशु चिकित्सक भर्ती परीक्षा का यह मामला अब सिर्फ पेपर लीक का नहीं, बल्कि कांग्रेसी संस्कृति और उसके समर्थकों के चरित्र का सत्यापन है।