इस तन के व्रण भर गए हैं
पर हिय वेदना अभी शेष है
किंचित तिरस्कार बहुत सहे
प्रेम को देखना अभी शेष है
देख मन की अंतर्दशा को
कुछ सोचना अभी शेष है
अतृप्त मन के आवेगों को
"शिव" रोकना अभी शेष है
कुटिल मन की अतृप्ति से
मेरा बचना अभी शेष है
पवित्र प्रेम में छुद्र छल की
आलोचना अभी शेष है✍️
बस इतनी कृपा करदो मेरे राम।कि,राम राम से सुरू.....................................................................रामराम पर ही खत्म हो ये जीवन मेरे राम..
🙏🏻🌹🙏🏻
#जय____श्री__________राम
किसी को कांटो से चोट पहुँची
किसी को फूलों ने मार डाला ....
जो बच गए इन मुसीबतों से ...
उन्हें
"उसूलों" ने मार डाला ......
जय सहारे हरि विष्णु ......
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏