ये आरक्षण का कमाल है ??
बरेली का ये अध्यापक बच्चों को कविता सुना रहे हैं –"कांवड़ लेने मत जाना, तुम ज्ञान का दीप जलाना.."
इस हराम के ढक्कन की क्या इतनी औकात है जो ये कहे "हज पर मत जाना" या "मुहर्रम का ताजिया मत उठाना"
इस स्कूल के बच्चों के पेरेंट्स को चाहिए इसे सबक सिखाए