@Induwinner कुछ स्टेशनों पर एअरपोर्ट की तरह वर्ड क्लास की सुविधा शुरू हो गई है।आने वाले दिनों में यह सुविधा बहुत जगहों पर होगी।भारतीय रेल ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर बहुत ध्यान दिया है।
यात्रियों को भी स्वच्छता एवं चीजों को सुंदर बनाएं रखने के लिए नागरिक कर्तव्यों का बोध होना चाहिए।
@Manasi_6 युद्ध लड़ने की क्षमता तो अमेरिका की कम हो रही है।ईरान के सामने दम निकल रहा है। लगता था कि घंटों में ईरान को घुटनों पर ला देगा।अब समझौते का खानापूर्ति कर भागना चाहता है।रुस भारत का नैसर्गिक मित्र है।हर संकट में भारत के साथ खड़ा रहा है।हमें बाहरी दबाव के जगह राष्ट्रहित देखना होगा।
@BharatR74239432 जिसके रक्षक प्रभु श्रीराम हैं और जिसने धर्म एवं राष्ट्र कार्य हेतु संन्यास लिया है उसके लिए पद प्रतिष्ठा की रक्षा श्रीराम करेंगे।
जय योगी, तय योगी।
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@BharatR74239432 इनकी नाक ही नहीं टेढ़ी है बुद्धि भी विधाता ने तदनुरूप दिया है।
देश का दुर्भाग्य है कि ऐसे लोग जननेता बने बैठे हैं। जिनके लिए देश हित से महत्वपूर्ण वोट बैंक है।
@ocjain4 लोग नियम कानून मानना ही नहीं चाहते हैं। सभी लोगों को अनिवार्य रूप से एक माह जेल में सुधार गृह के तरह रखना चाहिए तभी नागरिक कर्तव्यों का बोध होगा।
@Sanika0909 यह संस्कारों का क्षरण है जहां गरीब के परिश्रम का मूल्य चुकाने के स्थान पर उनके हक पर डाका डाल कर अपने को लोग आधुनिक कहलाने का प्रयास करते हैं।
@ankita_sin38649 पूरी दुनिया के सुख चैन इन जाहिलों ने छीन रखा है।अब सऊदी अरब सरकार को आगे आकर मुस्लिम समुदाय से कट्टरता दूर करने का प्रयास करना चाहिए।शायद उनकी बातों का असर हो।हुती विद्रोहियों को यमन के साथ ही इजरायल के हवाले करना आवश्यक है।
@sumit1kalra यहां पर यह समझना आवश्यक है कि अमेरिकी राजनीतिज्ञों में श्रेष्ठता का अहंकार हो गया है।समय समय पर उसी का प्रकटीकरण दिखाई देता है।कभी टैरिफ,कभी टेक्नोलॉजी,कभी वीजा,कभी हथियार, कभी ईसाईयत को लेकर बयान आते हैं।इसे बहुत गंभीरता से नहीं लेकर अपने हितों के अनुरूप निर्णय लिया जाना चाहिए।
@sumit1kalra समाज के अंतिम व्यक्ति का हितैषी शायद एक भी नहीं होगा।यह नव धनाढ्य वर्ग बन जाते हैं।समाज हित इनके लिए वक्तव्य एवं भाषण में सिमटकर रह जाता है।आरक्षण एवं संविधान की दुहाई देश में अराजकता फैलाने के काम आ रहा है।नैतिकता एवं चरित्र निर्माण हमारी संस्कृति एवं धर्म से ही संरक्षित है।
बांकीपुर और दतिया उपचुनाव के नतीजों से देश के लोकतंत्र और संविधान के साथ ईवीएम की भी लाज बच गई वरना विपक्ष विधवा विलाप कर रहा होता कहीं भाजपा जीत गई होती तो निश्चित ही लोकतंत्र और चुनाव आयोग खत्म था।विपक्ष की छोटी छोटी खुशियों से लोकतंत्र को कुछ समय के लिए जीवनदान मिल जाता है।