ये कब्र नूरदीन की हैं जो गुरुद्वारा दातनसर,मुक्तसर साहिब के पास हैं।
मुग़लो को पता था युद्ध के मैदान में गुरु गोबिंद सिंह जी को हराना नामुमकिन हैं इसलिए उन्होंने नूरदीन को सिख के भेस में गुरु जी की सेना में शामिल करा दिया । और एक दिन जब गुरु गोबिंद सिंह जी दातुन कर रहे थे तो उसने पीछे तलवार से गुरु जी पर हमला कर दिया । गुरु जी के पास लोटा था जिसे उन्होंने नूरदीन के सर पर दे मारा जिस से उसी समय नूरदीन की मौत हो गई ।
इस स्थान पर अब गुरुद्वारा दातनसर हैं और गुरुद्वारे से कुछ दूरी पर मुग़ल आतंकवादी नूरदीन की कब्र है । जो भी संगत गुरुद्वारे आती है वो नूरदीन की कब्र पर 5-5 बार चप्पल-जुत्तों से पिटाई करती हैं ।
🌳 “अंधकार में खड़ी आशा”
🌿 “शांत नीले आकाश में जीवन की हरियाली”
💚 “उम्मीद का अकेला वृक्ष”
🌌 “सन्नाटे में भी ज़िंदगी”
🌱 “जहाँ अंधेरा है, वहीं उजाला भी है”
🕊️ “शांति का प्रतिबिंब”
🌳 “हरियाली जो सुकून दे”
🌿 “खामोशी में बसी उम्मीद”
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