आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी जी आज रिटायर हो चुके है-
उनका एक शानदार कार���यकाल रहा जिसमे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना ने शौर्य दिखाया तो defence modernisation की तरफ़ भी तेज़ी से क़दम बढ़ाये।
अपनी सेना में मेजोरिटी अभी तक फ़र्ज़ी सेकुलरिज्म के भूत से ग्रस्त है और ना ही Wokeism से-
और ये भारत की सबसे बड़ी जीत है।
18/06/2026: खान यूनिस
एक कमरे में 4 आदमि���ों के समूह के बीच में बैठा था खलील अल-मसरी — हमास कमांडर, जिसने 7 अक्टूबर के नरसंहार का नेतृत्व किया था। वह किसी भी आम व्यक्ति की तरह कपड़े पहने हुए था और आसानी से घुल-मिल गया था। कोई यूनिफॉर्म नहीं। कोई बॉडीगार्ड नहीं। कोई संकेत नहीं कि वह एक खोजा हुआ आदमी है।
एक अत्याधुनिक इजरायली क्वाडकॉप्टर ड्रोन इमारतों के जटिल गलियारों के ऊपर चक्कर लगा रहा था। धैर्यपूर्वक। चुपचाप। देखते हुए।
AI निगरा��ी प्रणालियों ने नीचे बैठे लोगों के चेहरों को स्कैन किया। दसियों हजार तस्वीरें, वर्षों की खुफिया फाइलें, अनगिनत घंटों का विश्लेषण। सब कुछ एक पल में सिमट गया।
आखिरकार, वे उस चेहरे पर अटक गए जिसकी वे तलाश कर ��हे थे।
निशाना पहचान लिया गया था।
ड्रोन ने अपनी जगह ठीक कर ली।
वे लोग अपनी बातचीत जारी रखे हुए थे, यह नहीं जानते कि मौत अभी-अभी आ पहुंची है।
एक सटीक, एक गोली ने सन्नाटे को तोड़ दिया।
बातचीत अचानक रुक गई।
कॉफी के कप अभी भी मेज पर थे। सिगरेट का धुआँ अभी भी हवा में तैर रहा था। लेकिन किसी को कुछ पता चलने से पहले ही, खलील अल-मसरी गिर चुका था।
कोई चेतावनी नहीं। कोई पीछा नहीं। कोई नाटकीय मुकाबला नहीं���
बस एक गोली।
एक पल पहले वह अपने दोस्तों के साथ मजाक कर रहा था; अगले पल वह चला गया।
मोसाद और इजरायली काउंटर-टेररिज्म की दुनिया में एक कहावत बार-बार दोहराई जाती है: "एक बार निशाना मार्क हो जाने के बाद, मोसाद महीनों या सालों तक इंतजार कर सकता है, लेकिन वे शायद ही कभी चूकते हैं।"
चाहे म���नव एजेंटों के माध्यम से हो, निगरानी नेटवर्क से हो, या अत्याधुनिक तकनीक से — संदेश हमेशा एक ही होता है:
एक आदमी अपनी वर्दी छुपा सकता है।
वह अपना रूप बदल सकता है।
वह भीड़ में गायब हो सकता है।
लेकिन मोसाद जानता है कहाँ देखना है, और आखिरकार इंतजार खत्म हो जाता है।
इस घटना के अनुसार, उस शाम खान यूनिस में, इंतजार खत्म हो गया था।
एक पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते हुए एक रैली में कहा था-
“राम मंदिर ना बनबो ना” बंगाल के लोगों ने इसका जवाब दिया है।
हममें से जो लोग हिंदू धर्म में विश्वास रखते हैं, उन्होंने इसमें योगदान दिया। अब मंदिर बन चुका है।
दिल्ली से भाजपा के विधायक कैलाश गहलोत जी की बेटी देविना गहलोत ने CUET-UG टेस्ट में देश में प्रात
स्थान प्राप्त किया है 👏👏
यही गहलोत साहब अगर उसी आम आदमी पार्टी में रहे होते तो ये शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति होती-
अब भाजपा में है तो कोई बात नहीं।
पर एक बात तो निश्चित है- बढ़िया नेताओ के बच्चे खूब पढ़ लिख रहे है और मेहनत भी करते ह��।
नेहरू चाचा ने इतना सशक्त भारत बनाया कि 𝟏𝟗𝟖𝟒 में जब इंदिरा जी की मृत्यु हुई और राजीव गाँधी जी प्रधान मंत्री बने, तो देश मे आम नागरिक को दो बोरी सीमेन्ट लेने के लिये भी तहसीलदार से परमिट लेना पड़ता था। ऐसा लम्बे समय तक चला रहा!
01 एक किलो चीनी खरीदने तक के ल��ये भी परमिट लगता था। शादी विवाह में एक क्विंटल चीनी लेने के लिये,तो लोग महीनों पहले से सोर्स सिफारिश खोजते फिरते थे। ऐसा वृद्ध लोगों ने देखा है!
तब भारत में एलपीजी के कनेक्शन के लिये 0𝟐 दो से 0𝟑 तीन साल से लेकर 05/10 साल तक का समय लगता था। यकीन मानिए, घर में एलपीजी होते हुए, भी गृहणियां स्टोव जलाती थीं, क्योंकि उन्हें डर रहता था कि, अगर गैस खत्म हो गयी, तो ब्लैक और लम्बी लम्बी लाइनों में रात भर लगने के बाद अगला पूरा दिन खड़े रह, गैस सिलेंडर भरवाना बहुत बड़ा काम था। एजेंसी के सामने बहुत लम्बी लाइन होती थी!
ये वो ज़माना था, जब देश मे बजाज स्कूटर प्रीमियम पर बिकते थे, मतलब 𝟓𝟎𝟎𝟎 का स्कूटर और 𝟔𝟎𝟎𝟎 ब्लैक! तब 𝟏𝟏,𝟎𝟎𝟎 में स्कूटर मिलेगा। तब टेलीफोन के कनेक्शन मिलने में 0𝟕 से 𝟏𝟎 साल लग जाते थे और बहुत जबरदस्त ब्लैक होती थी।
इसी तरह सन 1970 के आसपास ट्रैक्टर खरीदना के लिए नंबर लगाना पडता था और उस समय में मैसी फर्ग्यूसन ट्रैक्टर की कीमत लगभग 18 हजार रुपए थी और उसका नंबर आने में 10 से 15 साल लगते थे, तथा तत्काल लेने पर करीब 15 हजार के अधिक देना पडता था! यह राशि उस वक्त बहुत अधिक थी!
उस नेहरु खानदान के शासनकाल ��े जमाने में हर किसी वस्तु का ब्लैक मार्केटिंग होता था। साथ ही हर तरह के खाद्य पदार्थ और सीमेंट जैसी अनेक प्रकार की वस्तुओं में बहुत मिलावट होती थीं।
आधुनिक भारत के निर्माता नेहरू चाचा कितने बड़े युगद्रष्टा थे, इसका एक और क़िस्सा सुनिये। नेहरू चचा ने 𝟏𝟗𝟓𝟕 में राजधानी दिल्ली के विकास के लिए 𝐃𝐃𝐀 की स्थापना की।
ऐसी एजेंसी जो मास्टर प्लान बनाती थी,उसमें अगले 𝟓𝟎 वर्षों की ही प्लानिंग करती ��ी कि, 𝟓𝟎 साल बाद ये शहर कैसा होगा। इसकी प्लानिंग करके ही शहर बसाया जाता है। उसकी सड़कें, पुल, सार्वजनिक परिवहन, रेलवे स्टेशन, बिजली पानी की व्यवस्था सब 𝟓𝟎 साल का सोच कर की जाती है।
नेहरू चाचा कहते थे, "मेरे सपनों का भारत" चाचा ने सपने में भी कभी नही सोचा था कि, दिल्ली वाले जिंदगी में कभी कार तो क्या, स्कूटर भी खरीद पाएंगे इसलिये 𝟔𝟎 और 𝟕𝟎 के दशक में बनाये गए, दिल्ली के 𝐃𝐃𝐀 ��्लैट्स देख लीजिये। किसी फ्लैट में कार, तो छोड़ो स्कूटर खड़ा करने तक की जगह नहीं है।
नेहरू चाचा कितने बड़े युगद्रष्टा थे, इसकी एक और मिसाल '𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚 𝐔𝐧𝐛𝐨𝐮𝐧𝐝𝐬' नामक किताब के लेखक गुरुचरण दास ने दी है। आप 𝟔𝟎 और 𝟕𝟎 के दशक में 𝐏&𝐆 के 𝐂𝐄𝐎 रहे हैं। नेहरू जी एवं इंदिरा जी के भारत में किसी कंपनी को टूथपेस्ट की ज़्यादा ट्यूब बनाने के लिए भी भारत सरकार से आज्ञा लेनी पड़ती थी और वो आज्ञा बहुत देरी में ��िलती थी!
𝟕𝟎 के दशक में एक बार तमिलनाडु में फ्लू फैल गया 𝐏&𝐆 का मशहूर विक्स इन्हेलर और विक्स वेपोरब तब भी बनता था। फ्लू फैला, तो विक्स बाजार से गायब हो गई। कंपनी ने भारत सरकार से 0𝟓 लाख अतिरिक्त विक्स इन्हेलर बनाने की इजाजत मांगी। वो इजाजत डेढ़ महीने में आयी, तब तक फ्लू ठीक हो चुका था। हमेशा ऐसा ही होता था!
बजाज के पास तब भी यह क्षमता थी कि, वे लाखों स्कूटर बना देते, पर नेहरू जी और इंदिरा जी ने ��नको कभी भी बड़ी संख्या में स्कूटर बनाने नहीं दिए, जिससे ब्लैक मार्केटिंग बंद हो सके।
गुरुचरण दास लिखते हैं कि, बिड़ला जी के एक बेटे आदित्य बिड़ला ने भारत मे जब हिंडाल्को खड़ी की, तो नेहरू इंदिरा ने उनको इतना परेशान किया कि, उन्होंने फिर कभी देश में लम्बे समय तक कोई फैक्ट्री नहीं लगाई। जबकि उन्होंने अपने जीवन मे देश के बाहर 𝟑𝟐 बहुत बड़ी बड़ी फैक्टरी लगाई। 🤔😳😢
इसलिये आज के बाद यदि आपके मित्��� कांग्रेसी ये कहे कि, नेहरू जी ने 𝐈𝐈𝐓, 𝐀𝐈𝐈𝐌𝐒, 𝐈𝐒𝐑𝐎 बनाए, तो उसके मुंह पर यह पोस्ट दे मारना।🫣
🇮🇳🙇♂️
मोदी जी का चश्मा देख रहे हैं....
ये बड़ा ही कमाल का है... स्पेशल तौर पर नासा को ऑर्डर देकर बनवाया हुआ...
इस चश्मे में ही टेलीप्रॉम्पटर फिट है...
मोदी जी पढ़ कर बोलते रहते हैं
पूरे पिछत्तीस करोड़ में आया था ये चश्मा...
इसके अलावे मोदी जी के दांतों के पीछे ���क छोटा सा AI डिवाइस लगा हुआ है
जिससे वो बोलते तो गुजराती में हैं पर ट्रांसलेशन होकर सामने वाले को अंग्रेजी में सुनाई देता है
ऐसा ही एक यन्त्र उनके कान में भी लगा है... कोई किसी भाषा में बोले... मोदी जी को गुजराती में सुनाई देता है...
एक और यन्त्र है जो मोदी जी ने 2014 के बाद से विपक्ष के स्थान विशेष में फिट करवा दिया है
जो रोज उनकी सुलगाया करता है
😜
स्लोवाकिया एक ऐसा देश है जिसमे आज तक भारत का कोई भी PM नहीं गया था।
लेकिन भारत का Diaspora अद्भुत है।
आज PM मोदी के वहाँ पहली बार पहुँचने पर भारतीय मूल के लोगो का उत्साह देखिए।
दुनिय�� का कोई कोना ऐसा नहीं है, जहाँ हम ना हो , और ये बात भी हमारी soft power को बहुत बढ़ाती है।
👉🏾भाजपा ने 2 सीट आने पर भी और 1951 से 1996 तक जब वाजपेयी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने तक 45 साल विपक्ष में बैठने के बावज��द कभी नहीं कहा कि कांग्रेस ने वोट चोरी की,
चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कब्जे में ले लिया - लोकतंत्र खत्म कर दिया कांग्रेस ने - 1989 से 2014 तक भाजपा की तरफ से विपक्ष के नेता की कुर्सी पर अटल बिहारी वाजपेयी, आडवाणी जी और सुषमा स्वराज रहे लेकिन कभी किसी ने स्वयं सत्ता पक्ष के खिलाफ नारेबाजी नहीं की लेकिन आज विपक्ष के नेता राहुल गांधी का व्यवहार देख लीजिए - ��ैंने किसी मुख्यमंत्री को विधानसभा में स्वयं नारे लगाते हुए नहीं देखा लेकिन ममता बनर्जी ऐसी मुख्यमंत्री थी जिसने सदन में नारे लगाए - "मोदी चोर, भाजपा चोर" - नारेबाजी केजरीवाल ने भी कम नहीं की..
राहुल गांधी ने देश में ही नहीं विदेशों में भी भारत का अपमान किया और एक बात तोते की तरह रट कर बोली कि भारत में लोकतन्त्र ख़तम हो चुका है,
आप लोकतंत्र बहाल करने में मदद करें- इतना ही नहीं मणिशंकर अय्यर ने त�� 2014 में ही पाकिस्तान में जाकर उससे कहा आप मोदी को हटाएं और हमें लाएं - कांग्रेस के जयराम रमेश ने मोदी द्वारा नेहरू के चुने हुए प्रधानमंत्री काल को पार करने पर भी एक बकवास की है कि "मोदी का दूसरा पहलू है कि वो लोकतंत्र की हत्या के लिए जिम्मेदार है"
अगर मोदी ने लोकतंत्र की हत्या की होती या फिर तानाशाही की होती तो तुम ऐसी बकवास करने की हिम्मत करते..??
लोकतंत्र की हत्या तो तुम्हारी अम्मा इंदिरा गां��ी ने की थी जब इमरजेंसी लगाई थी.. 🔥🔥
क्या चाहते हो मोदी भी वही करे जो इंदिरा ने किया .??
कांग्रेस वो कर ही नहीं सकती जो विपक्ष का नेता होते हुए वाजपेयी ने किया.. 1994 में जिनेवा में कश्मीर पर भारत का पक्ष जिस तरह उन्होंने रखा वो आज की कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है।
इतना ही नहीं वाजपेयी से प्रधानमंत्री के तौर पर जब अमेरिका में कांग्रेस के बारे सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब दिया - “while the ruling party and the opposition might have their differences at home, ‘in foreign countries, we are all Indians first.’ He consistently maintained that political disputes should remain within India’s borders.
दूसरी तरफ राहुल है जो विदेशों में जाकर भाजपा, आरएसएस और मोदी को गाली बकता फिरता है..!
🐉🐷😡
#कांग्रेस_के_कुकर्म 🔥⚔️🔥
🚨 राजदीप सरदेसाई राहुल गांधी पर भड़क उठा🔥
अब तो प्रोपेगंडा पत्तलकार राजदीप सरदेसाई ने राहुल गांधी को जमकर लताड़ दिया 😱
•“मोहन सिंह की सरकार में राहुल क्यों नहीं शामिल हुए?”
•“वे पावर चाहते हैं बिना जिम्मेदारी के!”
•“वे कभी भी मौका चूकने का मौका नहीं चूकते!”
10 साल UPA में सत्ता का मजा लिया, लेकिन खुद कभी जिम्मेदारी नहीं ली। अब भी सिर्फ यात्रा और भाषणबाजी!
राजदीप का गुस्सा देख��र लग रहा है — अब तो कांग्रेस के अंदरूनी लोग भी झेल नहीं पा रहे राहुल की “अनुभवहीन” राजनीति को!
#RahulGandhi #RajdeepSardesai #CongressExposed #PowerWithoutResponsibility
यह TMC नेता BJP कार्यकर्ताओं को उनके घरों में सफेद साड़ी भेजकर डराती थी।
आज वह जनता के हाथों में पड़ गई और लोगों ने उसे वही सफेद साड़ी पहना दी।
कर्मा की याददाश्त बहुत लंबी है।
नरेंद्र मोदी हर हाल में जवाहरलाल नेहरू से ���ड़े हैं। नेहरू 35 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री थे, वो भी गाँधी द्वारा थोपे हुए। मोदी 150 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री हैं, तीन-तीन बार चुने हुए।
नेहरू को बनी-बनाई कांग्रेस पार्टी मिली, जिसकी 15 समितियों में से एक ने भी उनका अनुमोदन नहीं किया फिर भी उन्हें PM पद दे दिया गया। मोदी को एक ऐसी पार्टी मिली जो लगातार 2 चुनाव हारकर 10 वर्ष से विपक्ष में बैठी हुई थी। नेहरू चंद दिन जेल में रहे तो पिता मोतीलाल ने उन्हें सारे तिकड़म करके निकलवाया। मोदी को UPA काल में सरकारी एजेंसियों ने लगातार प्रताड़ित किया। नेहरू रईस खानदान से थे और नेपोटिज्म का उत्पाद थे क्योंकि उनके पिता भी कांग्रेस अध्यक्ष थे। मोदी की माँ ने दूसरों के घरों में बर्तन माँजा, स्वयं मोदी ने पिता के साथ चाय बेची।
हर तथ्य चीख-चीखकर यही कहता है कि नेहरू से मोदी कई गुना बड़े हैं। नेहरू ने तिब्बत से लेकर कश्मीर और लद्दाख तक पर एक के बाद एक करके ब्लंडर किए, मोदी ने दुश्मन को घर में घुसकर मारा। नेहरू ने देश को चीन से युद्ध में हार की तरफ़ धकेल दिया, मोदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए पाकिस्तान के परमाणु संसाधनों पर वार किया। नेहरू की अगली 3 पीढियाँ ग़रीबी हटाने के नाम पर चुनाव लड़ती रही, मोदी ने 27 करोड़ लोगों को ग़रीबी से बाहर निकालकर दिखाया। एम्स के लिए राजकुमारी अमृता कौर को नेहरू से लड़ना पड़ा और अपनी ज़मीन दान में देनी पड़ी, मोदी ने कोविड-19 जैसी महामारी में दो-दो वैक्सीन बनवा दिए।
नेहरू बौने हैं मोदी के सामने। मोदी ने दुनियाभर में प्रवासी भारतीयों के भीतर स्वदेश को लेकर एक उत्साह का सृजन किया, नेहरू ने भारत को विदेश में सँपेरों का देश दिखाया।
अप्रैल: "ममता ने RG Kar के आरोपियों को बचाया, बंगाल को लूटा और BJP की राह आसान की।"
जून: "कांग्रेस में विलय कर लो, नेशनल वाइस प्रेसिडेंट बना देंगे!" 🤡
सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिरना INDI गठबंधन का असली चरित्र है। जीरो मोरालिटी, फुल अवसरवादिता!
🚨 MODI crosses the NEHRU LINE
Narendra Modi has become India’s LONGEST-SERVING uninterrupted democratically elected Prime Minister 🇮🇳
4,399 consecutive days in office. No dynastic heritage. No 'Bapu' hand on head. SELF MADE💥
टिकट ब्लेकिया संजय सिंह और अपनी गर्भवती पत्नी को कुत्ते से कटवाने वाला सोमनाथ भारती दिल्ली होटल अग्निकांड में मृतक के घर गया
मृतक के परिवार वालों ने उनको जमकर लताड़ा और कहा दोगले इस होटल का लाइसेंस तेरी सरकार ने दिया था अब तू अपनी राजनीतिक रोटी सेक��े आया है तेरा MLA पैसे खाकर सैकड़ो होटल को लाइसेंस दिया कोई जांच नहीं कोई फायर सेफ्टी नहीं यह सारा कुछ तेरी सरकार का किया धरा है
उसके बाद देखिए अपनी गर्भवती पत्नी को कुत्ते से काटने वाला सोमनाथ भारती और संजय सिंह दोनों कुत्ते की तरह तुम दबा कर फरार हो गए