रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
"एक मोमिन दूसरे मोमिन का आईना और भा�� है उसके माल का (नुकसान होता हो तो) बचाव करता है और उनकी गै़र मौजूदगी़ में उनकी हिफाज़त करता है।
📗(सुन्न अबू दाऊद 4918)
रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाय���:-
“कबीरा गुनाह अल्लाह के साथ शिर्क करना, वालिदैन की ना-फ़रमानी करना, किसी को नाहक़ क़त्ल करना और झूटी क़सम खाना।”
(सहीह बुखारी हदीस न .6675)
नमाज हर हाल में फर्ज है।
रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
के खड़े होकर नमाज पढो, अगर खड़े होने की ताक़त न हो तो बैठ के नमाज़ पढो, अगर बैठे के पढ़ने की भी ताक़त ना हो तो करवट पे लेट के नमाज़ पढो।
( जामे तिर्मिज़ी हदीस न. 372 )
रमज़ान के आखिरी अशरे का इतिकाफ सुननत-ए-मुअक्कदा अलल-किफाया है, यानी अगर मोहल्ले में कोई भी इतिकाफ कर ले, तो सबकी तरफ़ से सुन्नत अदा हो जाएगी, वरना सभी गुनाहगार होंगे...
रसूल अल्लाह (सल्ल०) ने फरमाया:
जो शख्स (रोज़े की हालत में) झूठ बोलना और दग़ाबाज़ी करना न छोड़े, तो अल्लाह तआला को उसकी कोई जरूरत नहीं की वह अपना खाना पीना छोड़े।
📓(सहीह बुखारी : 1903)
रसूल अल्लाह (सल्ल०) ने फरमाया:
जो शख्स (रोज़े की हालत में) झूठ बोलना और दग़ाबाज़ी करना न छोड़े, तो अल्लाह तआला को उसकी कोई जरूरत नहीं की वह अपना खाना पीना छोड़े।
📓(सहीह बुखारी : 1903)
कि अगर कोई शख़्स किसी शख़्स को काफ़िर या फ़ासिक़ कहे और वो हक़ीक़त में काफ़िर या फ़ासिक़ न हो तो ख़ुद कहने वाला फ़ासिक़ और काफ़िर हो जाएगा।
Sahih Bukhari Hadees No - 6045
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया
“जो शख़्स अपने माल की ज़कात अदा नहीं करता, क़यामत के दिन उसके माल को गंजे साँप की शक्ल दे दी जाएगी और इसके गर्दन में तौक (हार) बना कर लपेटा जाएगा”
(इब्ने माजा 1784)
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :-
“जिस ने अल्लाह की राह में एक दिन का रोज़ा रखा, अल्लाह त’आला उसके चहरे को (जहन्नुम की) आग से सत्तर साल के फ़ासले तक दूर कर देता है”
मुस्लिम:1153
नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया:-
किसी इंसान के लिए इजाज़त नहीं के वह दूसरे इंसान को सज़दा करे अगर एक इंसान को दूसरे इंसान का सज़दा करना मुनासिब होता तो में औरत ���ो हुक़्म देता के अपने ख़ाविंद को सज़दा करे, क्यों के इस पर इसके ख़ाविंद का बहुत बड़ा हक़ है।
📓(मुसनद अहमद : 7106)
रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
"जो कोई अल्लाह और आखिरात के दिन पर ईमान रखता हो उसे चाहिए कि अच्छी बात कहे वरना खामोश रहे और अपने पड़ोसी को तकलीफ ना पहुंचाएं और अपने मेहमान की इज्ज़त करें।
📗(सहीह बुखारी 6475)
रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
"जो शख्स अपने वालदेन के साथ ��च्छा सुलूक करता है इसके लिए मुबारकबाद है अल्लाह तआला इसकी उम्र मे इज़ाफ़ा कर देता हैं।
📗(मजमा अल जवाईद 13392)
रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:-
तुम में से कोई शख्स ईमान वाला न होगा, जब तक उसके वालिद, उसकी औलाद और तमाम लोगों से ज्यादा उसके दिल में मेरी मोहब्बत न हो जाए
(सहीह बुखारी हदीस न. 15)
रसूल अल्लाह (सल्ल०) ने फरमाया:
पांचों नमाज़ें और (हर) जुमा से (दूसरे) जुमा तक दरमयानी मुद्दत के गुनाहों का कफ़्फ़ारा (उनको मिटाने वाले) हैं जब तक कबीरा गुनाहों का इर्तिकाब ना किया जाए।
📓(सही मुस्लिम : 550)
रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
"जुमा का दिन तुम्हारे बेहतरीन दिनों में से है लिहाज़ा इस ��िन मेरे ऊपर कसरत से दरूद भेजा करो, इसलिए कि तुम्हारे दुरुद मुझ पर पेश किए जाते है।
📗(अबू दाऊद 153