"सोनम वांगचुक ने देश से कुछ नया या ग़ैरकानूनी नहीं म��ँगा, उन्होंने वही माँगा जो सरकार ने जनता से वादा किया था। लेकिन सवाल पूछना और अपना हक़ माँगना आज इस सरकार को गवारा नहीं।
जो इंसान देश के लिए अवॉर्ड लाता है, शिक्षा में क्रांति लाता है, सीमा पर चीन के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है… आज वही जेल भेजा जा रहा है। ये कैसी विडंबना है?
अगर सोनम वांगचुक जैसे पढ़े-लिखे और ईमानदार लोगों को "देशद्रोही" बताकर दबाया जाएगा तो समझ लीजिए असल समस्या उन लोगों में नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार में है।
हम सब सोनम वांगचुक के साथ खड़े हैं। आवाज़ को दबाने की हर कोशिश का जवाब और बुलंद आवाज़ से दिया जाएगा।
#SonamWangchuk
जनभागीदारी स्ववित्तीय अतिथि विद्वान उच्च शिक्षा की रीढ़ है सरकार को अतिथ�� विद्वानों में भेद किए बिना उनको भी रिक्त पदों के अतिथि विद्वानों के समान लाभ देना चाहिए।