ब्रेकिंग गोंडा
*चूहादानी में फंसा जहरीला सांप, परिवार के उड़े होश।*
घर में चूहे पकड़ने के लिए रखी गई चूहादानी में इस बार चूहा नहीं, बल्कि एक जहरीला कोबरा सांप फंस गया। सुबह जब परिवार की नजर चूहादानी पर पड़ी तो सभी हैरान रह गए।
करनी चलाना ना तो सबको आता है
लेकिन...😱
इस मिस्त्री की फिनिशिंग और सुंदरता का कोई जवाब नहीं है !
ऐसा मिस्त्री मिल जाए तो घर की रौनक में चार चांद लग जाए ! इस मिस्त्री का काम करने का तरीका कुछ अलग है ! 😍
जरा ये वीडियो देखों...😱
आज तक हमने जो भी सुना था.....वो सब गलत सुना था
क्या मोर शाकाहारी होती है...जो इसने किया वो बहुत भयानक है!
क्या मोर जो वीडियो में कर रही....शायद आपने ये करते नहीं देखा होगा आज देख लो भारत के लोग मोर को राष्ट्रीय पक्षी मानते है
*रोंगटे खड़े कर देनेवाला हादसा*
बहराइच। जिले से रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां मगरमच्छ ने 12 साल के बच्चे को जिंदा खा लिया।बौंडी थाना क्षेत्र में धान की रोपाई के बाद बच्चा नदी में हाथ-पैर धोने गया था। इसी दौरान मगरमच्छ ने उस पर हमला कर दिया।
अप्पा यानी गिरिजा देवी जी के साथ हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र हैं,तबले पर पंडित कुमार बोस हैं। तानपुरे पर सुनंदा शर्मा जी हैं।अप्पा ‘बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाए’ गा रही हैं।अपना पसंदीदा।इसके बाद कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है,बस सुनिए
#Raaggiri@YRDeshmukh@hvgoenka@sumrag
समंदर में स्टंट करना एक शख्स को भारी पड़ गया।
तेज लहरों के बीच स्टंट करते समय वह समुद्र की लहरों में बुरी तरह फंस गया और काफी मशक्कत के बाद अपनी जान बचा पाया।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
यह हादसा इस बात की चेतावनी है कि रोमांच के लिए की गई लापरवाही कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
प्रोफेसर जीडी अग्रवाल!
IIT रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पर्यावरण में Ph.D. और आईआईटी कानपुर के HOD रहे!
चाहते तो विदेश में ऐश की जिंदगी जी सकते थे लेकिन उन्होंने इस देश के कृतघ्न लोगों के लिए लड़ना चुना।
न जाने क्यों उनका दिमाग फिरा कि इस देश को बचा लें तो वह गंगा को बचाने के लिए अनशन पर बैठ गए।
लेकिन हमें गंगा थोड़े ही बचानी थी, हमें तो गंगा के नाम पर चल रहे धंधे को बचाना था! नतीजा? 111 दिन के अनशन के बाद उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।
इस महान विचारक की शहादत इस देश के दलाल मीडिया, उन्मादी लोगों और खोखले राष्ट्रवाद के शोर में बस एक छोटी सी खबर बनकर दब गई।
मुख्यधारा का मीडिया धार्मिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक नूराकुश्ती बेचने में व्यस्त रहा और इस व्यवस्था ने उन्हें चुपचाप निगल लिया।
हम सब मरेंगे क्योंकि हमने कभी सही लोगों को नहीं पहचाना। हम बस दलालों को सिर आंखों पर बिठाते रहे और देश को बचाने निकला एक सच्चा इंसान घुट-घुट कर चला गया।