युवाओं से किए वादे आज भी अधूरे है 🤔
PTI जाँच कब पूरी होगी कब वंचितों को न्याय मिलेगा
रीट सीबीआई जाँच के लिए ढाई साल में सब चुप क्यो है ??
माननीय कृषि मंत्री जी को प्रदेश की जगह केंद्र को लेटर क्यों लिखना पड़ा ???
विपक्ष में जिस युवा हित की बात हो रही थी अब पक्ष में आते ही चुप क्यो???
OMR घोटाले में मुख्य आरोपी कब पकड़े जाएँगे ??
SOG को अतिरिक्त संसाधन कब उपलब्ध होंगे ??
कैलेंडर की पालना कब होगी ??
पदों के आंकड़े की जगह उनका वर्गीकरण कब जारी होगा ???
प्रदेश के सख़्त क़ानून के तहत एक भी आरोपी पर एक्शन क्यों नहीं हुआ ??
दर्जनों सवाल युवाओं के जहन में है जिनका न जवाब मिला न न्याय 🤔🤔🤔🤔🤔🤔
Let's Unite Against Forced E20 Fuel.
Share your voice with Arvind Kejriwal at the National Townhall Against E20.
📍 Constitution Club, Delhi
📅 1 August 2026 | 11:30 AM
💻 Join us in person or online.
📲 To join online, WhatsApp us at: +91 85888 33212
#E20TownhallWithKejriwal
देश के युवाओं ने एक होकर आवाज़ उठाई तो धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा। E20 पर भी हमें एक होकर आवाज़ उठानी पड़ेगी।
इस शनिवार हम 'नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट E20' आयोजित कर रहे हैं, जिसमें शामिल होकर आप E20 पर अपनी बात रख सकते हैं। आप इसमें ऑनलाइन भी शामिल हो सकते हैं। आप सभी आमंत्रित हैं।
तारीख: 1 अगस्त, 2026
समय: सुबह 11:30 बजे
स्थान: कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, दिल्ली
#पीटीआई_भर्ती_2022
न्याय मांगते 3 साल हो गए ।
अभी तक अपात्र लिस्ट जारी नहीं कर पाए ।
कहते हैं 135 की नियुक्ति निरस्त कर दी ।
तो उनकी जगह वंचित पीटीआई को क्यों नहीं लिया जा रहा ।
कर्मचारीयों की गलती की सजा वंचित क्यों भुगते।
उन्हें उनका हक दिया जाए ।
@madandilawar
इनका भी लगे हाथ इस्तीफ़ा ले लेंना चाहिए
ये शिक्षा का वो हाल करके जाएँगे की आने वाला युग याद करेगा ।।
इस्तीफ़ा दे दो मदन दिलावर जी आपसे कोई काम नहीं ह�� रहा है शिक्षा व्यवस्था पर रहम कर दो आप 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
Why Are Police Name Tags Missing?
बैच हटाकर, नाम छुपाकर अगर पुलिस कार्रवाई करती है, तो इस बात का शक होता है कि वो पुलिस है भी या नहीं है। मुझे यही डर है कि इस प्रोटेस्ट में कहीं पुलिस की वर्दी पहनकर कुछ ऐसे गुंडे न घुस जाएं, जो छात्रों के साथ कुछ ऐसा कर दें जिसकी उम्मीद हमने की ही नहीं है। यह आखिरी मौका है देश के एजुकेशन सिस्टम की लड़ाई को लड़ने का और उसे बचाने का। ऐसे में हमें इन सब चीज़ो�� से सावधान भी रहना है और आने वाले खतरों के लिए तैयार भी रहना है।
"ये दिल्ली की सल्तनत के अंत का आरम्भ हो चुका है। देश के नौजवान इस बात को लेकर आगे बढ़ें, ये समय की माँग है। ये ज़ुल्म के सामने जंग ही रास्ता है दोस्तों। ज़ुल्म के सामने झुकना इस देश की मिट्टी में नहीं है दोस्तों।"
- नरेंद्र मोदी जी
इतना अहंकार ठीक नहीं है।
उन्हें जबरन उठाने की बजाय, मोदी सरकार को सोनम वांगचुक से बात करनी चाहिए थी।
कॉकरोच आंदोलन को कुचलने की बजाय, देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था सुधारो
सोनम वांगचुक के साथ ज़बरदस्ती मोदी सरकार की हार है।
ये बिल्कुल गलत है,
सोनम वांगचुक सर को ऐसे जबरदस्ती नहीं उठाना था,
अनशन तुड़वाने का तरीका होता है,
पहले आप आते उनसे बात करते उनकी मांग सुनते फिर उनकी डिमांड पूरी हो जाती तो वो अपना अनशन खुद ही तोड़ देते,
पर पुलिस द्वारा जबरन उठाना गलत है।🥺
पेपर लीक के खिलाफ चल रहे Sonam Wangchuk जी के शांतिपूर्ण अनशन को खत्म करने के लिए सरकार ने बातचीत का रास्ता नहीं चुना, बल्कि जबरदस्ती और गुंडागर्दी का सहारा लिया।
यह साफ दिखाता है कि सरकार छात्रों की आवाज़ से डर गई है।
आज इस आवाज में दर्द है...
���ाजवीर सिंह चलकोई को हम सुनते रहे हैं। उनकी बोली में हमेशा एक खनक रहती है अल्हड़पन झलकता है। मैंने इस पूरे वीडियो में देखा कि वो बात कहीं भी नहीं है। क्यों?
क्योंकि हमारे आत्मसम्मान पर चोट ही हुई है
राज्यपाल महोदय ने एक आदेश जारी कर राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों में मराठी के केंद्र खोलने के लिए कह दिया है। दूसरी तरफ वर्षों से राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे लोग अभी तक राजस��थान के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी के केंद्र नहीं खुलवा पाए हैं। स्कूलों में राजस्थानी की पढ़ाई शुरू नहीं करवा पाए हैं। राजस्थान की राजभाषा नहीं बनवा पाए हैं। पीड़ा तो है। सच्ची है। झलकेगी ही। छलकेगी ही।
राजस्थान वालों के चेहरे पर ऐसा जोरदार झापड़ मारा गया है, जिसका अहसास तो हुआ है लेकिन आत्म गौरव खो चुके लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि रिएक्ट क्या करना है और कैसे करना है। इस पीड़ा को सभी सुनें और और सोचें कि हम अभागे लोग कहां खड़े हैं?
वीडियो साभार @republic
‘हवा में उड़ते हुए’ सड़क परिवहन मंत्री का इंटरव्यू
सवाल : आपने जो आम दिए हैं वे खट्टा है।
जवाब : आप इमली की बात मत कीजिए।
इथेनॉल के मुद्दे पर नितिन गडकरी के इस इंटरव्यू का एक पंक्ति में सा सार यही है।
पूरा इंटरव्यू सुन लीजिए। अगर आप अपना माथ�� नहीं पकड़ लेंगे तो फिर कहिएगा!
मेघा ने माइलेज के मुद्दे पर पहले सवाल से ही घेरा। अपनी गाड़ी की माइलेज का भी उदाहरण दिया। पर गडकर ने कहा, माइलेज मापने की मशीन घर में नहीं होती, डीलर से जांच कराइए! दिक़्क़त हो तो कंज़्यूमर कोर्ट जाइए!
मतलब कुछ भी!
माइलेज बताने का मीटर घर में नहीं होता पर हर गाड़ी ��ें तो होता ही है। इसको नकार दिया गडकरी ने!
कार कंपनियों के लिए ये बहुत ही आपत्तिजनक बात है कि दशकों से हर कार के साथ बनाए गए उनके माइल-मीटर पर गडकरी ने सवाल उठा दिया है!
पर शायद कार कंपनियाँ गडकरी की इस बात के ख़िलाफ़ फिर भी ना बोलें! संभवतः कोई डर या दबाव होगा! नहीं तो कार कंपनियों को सामने आकर स्वीकारने चाहिए कि कार में फिट माइल-मीटर धोखा है!
बात इतनी भर नहीं है।
क़रीब आधे घंटे के इस इंटरव्य��� में गडकरी ने किसी सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया है। गोल गोल घुमाया है। ज़्यादा कुरेदने पर अपरोक्ष रूप से FIR और परोक्ष रूप से Defamation केस तक की धमकी दी है!
सवाल पूछा जा रहा है E10 वाली गाड़ियों में E20 डाले जाने की और जवाब दे रहे हैं 100% इथेनॉल या पेट्रोल से चलने वाले फ़्लेक्सी फ़्यूल इंजन की!
इथेनॉल के बाद भी पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं हुआ?
जवाब : आयं बाएँ साएं
जब एक सवाल का जवाब न सूझा तो पेट्रोलियम मिनिस्ट्री पर बात टाल दी!
इस पूरे इंटरव्यू पर एर रिसर्च पेपर लिखा जा सकता है। रिसर्च पेपर इस बात पर कि जब तर्क और तथ्य न पेश कर पा रहे हों तो अपनी ज़िद को सही साबित करने के लिए इंटरव्यू नहीं देना चाहिए।
बहुत लंबा लिखा जा सकता है। लेकिन निचोड़ ये कि अगर प्रधानमंत्री @narendramodi अपने मंत्री @nitin_gadkari की इन तमाम बातों को सुनने के बाद भी इन पर समुचित ‘नीतिगत’ ���ार्रवाई नहीं करते हैं तो फिर समझ लीजिए कि ईश्वर नहीं, अब इथेनॉल ही सबका मालिक है 🙏
और अंत में @MeghaSPrasad के लिए एक शब्द
Superb 🙌
Video Credit @ABPNews YT
दुनिया जिसे वैज्ञानिक, आविष्कारक और बदलाव की आवाज़ मानती है, वह आज 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठा है,
अपने लिए नहीं,
सत्ता के लिए नहीं,
बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए,
उनकी चुप्पी एक संघर्ष है, लेकिन हमारी चुप्पी - देश के लिये शर्म।
15 दिन हो गए जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल के इतने में तो अंग्रेज सरकार भी मान जाती।
आज देश के ऐसे अनमोल रत्न की ये हालत देखकर बहुत दुख होता है।
उनकी सेहत में गिरावट के बावजूद वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग पर अडिग हैं। उन्होंने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया है, ताकि छात्रों और युवाओं की ��वाज को सीधे सरकार तक पहुँचाया जा सके। यह आंदोलन अब केवल एक विरोध न रहकर व्यापक जन आंदोलन में बदलता जा रहा है।
20 जुलाई संसद चलो 🥺