@IDBIBankCares
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क्या आपको येदियुरप्पा डायरी विवाद याद है?
2011 में येदियुरप्पा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरास्त में भेज दिया गया था. कर्नाटक लोकायुक्त ने उन्हें सरकारी जमीन में हेराफेरी और उत्खनन घोटाले में घूस लेने का दोषी पाया था. इस आरोप के चलते येदियुरप्पा सरकार गिर गई थी. उस साल जुलाई में उन्हें मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था. बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया और उन्होंने कर्नाटक जनता पक्ष (केजेपी) पार्टी को पुनरुज्जीवित किया. लेकिन 2014 के लोक सभा चुनावों से पहले नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने येदियुरप्पा और केजेपी को बीजेपी में फिर शामिल करा लिया. बाद में येदियुरप्पा भ्रष्टाचार के इन मामलों से बरी हो गए. 2018 में राज्य विधान सभा चुनाव में वे बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे.
अगस्त 2017 में कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के घर में आयकर विभाग के छापे में डायरी के कुछ पेज प्राप्त हुए थे, जो बताते हैं कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं, उसकी केन्द्रीय समिति के नेताओं, जजों और वकीलों को 1800 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया था. येदियुरप्पा ने इन कथित भुगतानों को कर्नाटक विधान सभा की साल 2009 की विधायक डायरी में कन्नड भाषा में अपने हाथों से दर्ज किया था. इस डायरी एंट्री की कॉपी आयकर विभाग के पास 2017 से थी. येदियुरप्पा ने लिखा था कि उन्होंने बीजेपी की केन्द्रीय समिति को 1000 करोड़ रुपए दिए हैं. उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को 150-150 करोड़ रुपए, गृहमंत्री राजनाथ सिंह को 100 करोड़ रुपए और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को 50-50 करोड़ रुपए दिए हैं. इन भुगतानों के अतिरिक्त इस डायरी में गडकरी के “बेटे की शादी के लिए” 10 करोड़ रुपए देने की बात भी दर्ज है. येदियुरप्पा की डायरी में जजों को 250 करोड़ रुपए और वकीलों को 50 करोड़ रुपए (केस लड़ने की फीस) देने की बात भी है, लेकिन किसी का नाम डायरी में नहीं है.
बीजेपी के केन्द्रीय नेतृत्व को किए गए कथित भुगतान के अलावा, डायरी में राज्य के विधायकों को किए गए भुगतान का भी उल्लेख है. इन में कुछ विधायकों की 2008 में येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाए जाने में भूमिका थी. उस साल के विधानसभा चुनावों में येदियुरप्पा ने कांग्रेस, जनता दल (सेक्यूलर) और निर्दलीय विधायकों को अपने पक्ष में मिलाकर बहुमत हासिल किया था. उस वक्त येदियुरप्पा को समर्थन देने वाले 6 में से 5 विधायकों को बाद में येदियुरप्पा ने कैबिनेट में शामिल किया था. इनमें से कई नेताओं के नामों का उल्लेख डायरी में है.
पढ़ें निलीना एम एस और अतिरा कोनिक्करा का मार्च 2019 का यह लेख: https://t.co/YvaNgmJZ6r
@Anurag_Dwary@thealokputul
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